जूलरयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी
नई दिल्ली, शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019 (ऊका समाचार): सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ईसाई संगठन की याचिका खारिज कर दी जिसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी में लोकसभा के लिए 18 अप्रैल को होने वाले मतदान के पुनर्निर्धारण की मांग की गई थी।
जल्द सुनवाई से इनकार
न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नाज़ेर और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी सहित सुप्रीम कोर्ट की एक खण्डपीठ ने याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए मना कर दिया।
याचिकाकर्ता की दलील थी कि इस वर्ष पुण्य गुरुवार 18 अप्रैल को पड़ रहा है जिस दिन मतदान भी रखा गया है, और यह ईसाई समुदाय के लिए गुड फ्राइडे और ईस्टर से पहले पड़नेवाला पवित्र दिन है।
जैसे ही याचिकाकर्ता के वकील ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई का उल्लेख किया, अदालत ने प्रश्न किया: "क्या आप एक पवित्र दिन पर वोट नहीं डाल सकते? मतदान करने में कितना समय लगता है? हम आपको न तो प्रार्थना करने की सलाह देना चाहते हैं और न ही यह बताना चाहते हैं कि आप वोट कैसे डालें।”
मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज
मद्रास उच्च न्यायालय ने पहले ही पुण्य गुरुवार के मतदान को स्थगित करने की याचिका को खारिज कर दिया था।
तमिलनाडु और पुडुचेरी 18 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान करेंगे। दूसरे चरण में भारत के 13 अन्य राज्यों में भी मतदान निर्धारित हैं, इनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि उक्त मामले की सुनवाई करने की कोई जल्दी नहीं है।