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श्रीलंका पीडितों का दफन क्रिया श्रीलंका पीडितों का दफन क्रिया  (ANSA)

सिरिसेना ने खतरों को अंधेरे में रखा, पीड़ितों की संख्या 359

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आतंकवाद के तीन अलर्ट जारी किए थे। इस्लामिक स्टेट ने सात हमलावरों की तस्वीर प्रकाशित की। 40 लोग गिरफ्तार।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

कोलम्बो, बुधवार 24 अप्रैल 2019 (एशिया न्यूज) :  तीन गिरजाघरों और तीन श्रीलंकाई होटलों में ईस्टर हत्याकांडों के बाद, राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने देश के खुफिया तंत्र का तेजी से पुनर्गठन की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि किसी ने भी उन्हें हमलों के खतरे की सूचना नहीं दी थी। ताजा खबर अनुसार 359 लोग मारे गये और 500 से अधिक घायलों को गंभीर परिस्थितियों में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मंगलवार 23 अप्रैल को नेमोम्बो के संत सेबास्टियन गिरजाघर में पहला सामूहिक अंतिम संस्कार सम्पन्न किया गया। सभी हमलों का दावा खलीफा की आधिकारिक मीडिया एजेंसी ‘अमाक’ पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों ने किया था, हालांकि कोलम्बो सरकार को संदेह है कि प्राथमिक जिम्मेदारी दो स्थानीय इस्लामी समूहों की है। इन समूहों के 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

आईएसआई ने ली जिम्मेदारी

आतंकी संगठन आईएसआईएस ने मंगलवार को इन हमलों की जिम्मेदारी ली। इसे अंजाम देने वाले सात आत्मघाती बम हमलावरों की पहचान कर ली गई। जिहादी गतिविधियों की निगरानी करने वाले साइट इंटेलीजेंस ग्रुप के अनुसार अपनी प्रचार संवाद समिति ‘अमाक' के एक बयान में आईएसआईएस ने कहा, ‘दो दिन पहले श्रीलंका में गठबंधन के सदस्य देशों के नागरिकों और ख्रीस्तियों को निशाना बना कर जिन लोगों ने हमला किया, वे इस्लामिक स्टेट समूह के लड़ाके थे।  इस बयान में हमलावरों की पहचान अबु उबायदा, अबु अल मुख्तार, अबु खलील, अबु हम्जा, अबु अल बारा, अबु मुहम्मद और अबु अब्दुल्लाह के रूप में की गई है।

रक्षा मंत्री रुवान विजयवर्धने ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि अब तक 359 लोगों की मौत हुई है जिनमें 39 विदेशी नागरिक हैं। 17 विदेशी नागरिकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं। घटना की विस्तृत जांच जारी है।

सरकार की लापरवाही

श्रीलंकाई मीडिया और वहां के कुछ मंत्रियों ने कहा है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आपसी झगड़े के चलते देश में इतनी बड़ी सुरक्षा चूक हुई और इंटेलीजेंस इनपुट के बावजूद उस पर गौर नहीं किया गया। इसका फायदा आतंकियों ने उठाया और एक साथ कई धमाके कर वे आसानी से चलते बने। श्रीलंकाई संसद के नेता लक्ष्मण किरेला ने बुधवार को कहा कि देश के वरिष्ठ अधिकारियों ने हमले की सूचना दबा दी जिस कारण ऐसे घातक हमले हुए।

किरेला ने संसद में कहा, 'कुछ उच्च अधिकारियों ने खुफिया सूचनाएं जानबूझ कर दबा दी। हमले की पुख्ता जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा अधिकारियों ने समुचित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि 4 अप्रैल को भारत ने इंटेलीजेंस अलर्ट किया था जिस पर 7 अप्रैल को राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरीसेन ने सुरक्षा परिषद की बैठक भी की थी लेकिन इससे जुड़ी सूचनाएं आगे नहीं बढ़ाई जा सकीं।

24 April 2019, 16:34