खोज

Vatican News
यमन में हैजा का प्रकोप यमन में हैजा का प्रकोप  (ANSA)

यमन में हैजे की आपात स्थिति, लगभग 190 पीड़ित

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 108,889 पंजीकृत मामलों में से एक तिहाई बच्चों की उम्र पांच साल से कम है। विशेषज्ञों के अनुसार यह "दुनिया का सबसे खराब मानवीय संकट" है। 80% आबादी को सहायता की आवश्यकता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

सान्ना, बुधवार 27 मार्च 2019 (उकान) : जनवरी की शुरुआत से यमन में हैजा के लगभग 110 हजार संदिग्ध मामले सामने आए हैं, कम से कम 190 पीड़ितों की पुष्टि हुई है। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय मामलों की एजेंसी (ओचा) द्वारा हाल के दिनों में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी से 17 मार्च तक 108,889 आधिकारिक रुप से दर्ज मामलों में एक तिहाई पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कहना है कि देश के इतिहास में दो साल के बाद आयी वर्तमान की सबसे खराब महामारी है जाो छः प्रांतों में फैली है, जिसमें हुदैदा शहर भी शामिल है, जो आज अरब देश में संघर्ष का केंद्र है।

इस क्षेत्र में भारी बारिश के कारण "स्थिति और भी बिगड़ गई है। कई जिलों में कचरों को नष्ट करने और गंदे पानी के निष्कासन की व्यवस्था ठीक नहीं है। ओचा विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध से बचने के लिए विस्थापित लोगों ने दूषित पानी का उपयोग किया है।

2017 में, यमन ने आधुनिक इतिहास में सबसे खराब संकट का सामना किया है, जिसमें केवल आठ महीनों में एक लाख से अधिक संदिग्ध मामले तथा अप्रैल और दिसंबर के बीच 2500 हैजा पीड़ितों की पुष्टि की गई है।

मार्च 2015 से आज तक, इस संघर्ष में अनुमानित 10 हजार मृत और 55 हजार घायल हुए हैं। यह केवल "अप्रत्यक्ष पीड़ितों" (नागरिकों) को नहीं बल्कि कुपोषण या हैजे से मारे गए पीड़ितों को दर्शाता है।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवीय एजेंसियों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के 85,000 बच्चों की मृत्यु बम या बहुत गंभीर कुपोषण के परिणाम स्वरूप हुई है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार संघर्ष ने "दुनिया में सबसे खराब मानवीय संकट" शुरू कर दिया है, लगभग 24 मिलियन यमनियों (आबादी का 80%) को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है।

27 March 2019, 16:27