Cerca

Vatican News
पापुआ में बाढ़ से प्रभावित लोग पापुआ में बाढ़ से प्रभावित लोग  (ANSA)

इन्डोनेशिया के पापुआ जिले में बाढ़ से 77 लोगों की मौत

इन्डोनेशिया के पापुआ जिले में 16 और 17 मार्च को हुए बारिश और बाढ़ से दर्जनों घर, भवन, पुल को काफी नुकसान पहुंचा है। मलबे में दबे लोगों की खोज जारी है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

जयापुरा, मंगलवार 19 मार्च 2019 (उकान) : इंडोनेशिया के पूर्वी प्रांत पापुआ में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ में कम से कम 77 लोगों की मौत हो गई है। कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।

शनिवार को जयपुरा जिले के कई गांवों में करीब शाम 6 बजे मूसलाधार बारिश से बाढ़ आ गई। इस हादसे में सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

आपदा प्रबंधन एजेंसी की आपातकालीन इकाई के प्रमुख कोरी सिमबोलोन ने बताया कि 16 और 17 मार्च को हुए बारिश और बाढ़ से दर्जनों घर, भवन, पुल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे लगभग 4,000 लोग बेघर हो गए हैं। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ राहत शिविरों में रखा गया है। बाढ़ से सिर्फ सेंतानी शहर में 51 लोगों की मौत की खबर है। पापुआ की राजधानी जयपुरा में बारिश की वजह से हुए भूस्खलन में दबकर भी अनेक लोगों की मौत हो गई।

राहत कार्य जारी

राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुगरोहो ने कहा, “फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है। मृतकों और घायलों की संख्या में इजाफा हो सकता है। बचाव दल अभी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बचाव दल पेड़ गिरने, चट्टानों और कीचड़ के चलते सभी प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।”

पापुआ पुलिस के एक प्रवक्ता अहमद मुस्तफा कमल ने कहा कि 69 लोग कथित रूप से अभी भी लापता हैं।

कमल ने संवाददाताओं से कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, पुलिस अस्पताल में ली गई 61 लाशों में से 20 से अधिक की पहचान की गई जिन्हें दफन के लिए परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया। बाकी की पहचान की जा रही है।

कमल ने कहा कि बाढ़ ने 350 घरों, 104 दुकानों, दो प्रोटेस्टेंट गिरजाघरों, एक मस्जिद, तीन बड़े पुलों, आठ स्कूलों, एक प्रमुख बाजार और चार मुख्य सड़कों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया।

पल्ली का योगदान

सेंटानी में मुक्तिदाता मसीह पल्ली के एक काथलिक नेता हेंगकी हिलापोक ने उका न्यूज को बताया कि पल्ली पुरोहित और पल्ली के नेता विस्थापितों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने एक सहायता पोस्ट खोला है। उनकी पहली प्राथमिकता उन बच्चों के लिए दूध उपलब्ध कराना है जो आपदा क्षेत्र से विस्थापित हुए हैं। उनकी टीम जयापुर में स्थानीय और अन्य परगनों और काथलिक कल्याण एजेंसी, कारितास से दान मांग रही है।

पर्यावरण के लिए पापुआ फोरम के निदेशक ऐश रुमबकवन ने बुनियादी ढांचा विकास और वृक्षारोपण के लिए भूमि की मंजूरी के साथ-साथ अवैध कटाई पर आपदा को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा, "इस आपदा को पापुआ में स्थानीय सरकारों के लिए एक अनुस्मारक के रूप में काम करना चाहिए ताकि विकास में पर्यावरण के मुद्दों की उपेक्षा न हो।"

19 March 2019, 16:04