उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी
लाहौर, मंगलवार, 5 मार्च 2019 (रेई)˸ 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने भारत और पाकिस्तान में एक ही समय पर रैली में भाग लेकर दोनों देशों के बीच शांति की अपील की।
पाकिस्तान में, लाहौर के लिबर्टी बाजार के गोल चक्कर में युद्ध-विरोधी रैली आयोजित की गई थी और भारत में मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली के लाल किला के पास रैली निकाला। पाकिस्तान की काथलिक कलीसिया ने भी ताजा शांति वार्ता का आह्वान किया है।
इस बीच, नियंत्रण रेखा के साथ-साथ कश्मीर के विवादित क्षेत्र में दोनों देशों को अलग करने वाली सीमा पर दोनों ओर के पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ गया है।
आतंकवादियों के हमले में भारत के 44 जवानों की मौत का जवाब देने के लिए की गई कार्रवाई के बाद पकड़े गये भारतीय पायलट को पाकिस्तान ने शांति के चिन्ह स्वरूप शुक्रवार को स्वदेश वापस भेज दिया था।
पाकिस्तान के मानव अधिकार आयोग द्वारा आयोजित रैली में लाहौर के ख्रीस्तियों ने भी भाग लिया।
पाकिस्तान के मानव अधिकार आयोग की सदस्य हीना जिलानी ने एशिया न्यूज से कहा, "भारत के बुद्धिजावियों और नेताओं को लाहौर में व्याख्यान के लिए बुलाया गया है, लेकिन अब हमारी आवाज कमजोर हो गई है।"
उन्होंने कहा कि सीमा रेखा के दोनों ओर के अक्ड़पन के कारण सैन्य बजट और गरीबी का विस्तार हुआ है।
दक्षिण एशियाई मुक्त मीडिया संघ के महासचिव इम्तियाज आलम के लिए, युद्ध की कहानी चरमपंथी ताकतों का समर्थन करती है।
उन्होंने कहा कि भारत-पाक में शांति हेतु हम 19 सालों के संघर्ष कर रहे हैं। पिछला साल यह सबसे कठिन था। युद्ध विरोधी रैलियों के आयोजन के लिए अधिकारी हमें दुश्मन मानते हैं।
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को क्षेत्रीय शांति के साथ खिलवाड़ करने और कश्मीरियों के शांतिपूर्ण संघर्ष को खतरे में डालने के बजाए, उसे रोकने में ध्यान केंद्रित करना चाहिए।