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महाधर्माध्यक्ष इवान जुरकोविच महाधर्माध्यक्ष इवान जुरकोविच  

परमधर्मपीठ : धर्म की स्वतंत्रता-अन्य मानवाधिकारों का "लिटमस जाँच

परमधर्मपीठ ने, धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के सार्वभौमिक और निष्पक्ष अनुप्रयोग के अपने निर्णय को दोहराते हुए कहा है यह "अन्य सभी मानव अधिकारों का लिटमस परीक्षण" है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

जिनेवा, बुधवार 6 मार्च 2019 (वेटिकन न्यूज) : परमधर्मपीठ की ओर से संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान जुरकोविच ने 5 मार्च को जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के विश्वास, धर्म की स्वतंत्रता पर आयोजित बैठक में भाग लिया।

केंद्र स्तंभ

संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान जुरकोविच ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से कहा कि पिछली शताब्दी के "बर्बर कृत्य" ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता के साथ-साथ इसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को मानव अधिकारों की वास्तु-कला के केंद्र स्तंभों में से एक के रूप में नेतृत्व किया।

उन्होंने धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता पर मानवाधिकार परिषद की बैठक के दौरान मंगलवार को दिए गए एक बयान में यह बात कही।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार पर ध्यान दिया जाना चाहिए, "व्यक्तिगत या सामाजिक स्तरों पर, किसी की आस्था के विपरीत कार्य करने की स्वतंत्रता किसी को नहीं है। मानव की गहराई में निहित, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,  सभी मानवाधिकारों के साथ खिलता या मुरझाता है।  इस तरह से धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए इसे "अन्य सभी मानव अधिकारों का लिटमस परीक्षण" माना जा सकता है।

वर्तमान रुझान

महाधर्माध्यक्ष ने इस बात पर गौर किया कि कर्तव्यनिष्ठा आपत्ति के अधिकार को प्रतिबंधित करने के लिए बढ़ती हुई मांग, यह संकेत देती है कि कुछ राजनेता और यहां तक कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी, अपने स्वभाव और जनादेश को भूलकर, विवेक और विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार के मामले में अभी भी असहज हैं।

उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों में भेदभाव, असहिष्णुता, आक्रामकता, कारावास और यहां तक कि अपने धर्म और विश्वास के प्रति वफादार रहने हेतु मौत के आश्चर्यजनक रिपोर्ट का उल्लेख किया।

जब व्यक्तियों और समुदायों को अपनी गहरी आस्था को जीने, प्रकट करने और समारोह मनाने की अनुमति नहीं मिलती है, तो समाज को एकजुट रखने वाले बंधन और अधिकारों का उल्लंघन अक्सर हिंसक संकट में बदल जाता है।

महाधर्माध्यक्ष जुरकोविच ने संत पापा फ्राँसिस की चिंता को दोहराया कि बहुपक्षवाद का वर्तमान संकट अंतरराष्ट्रीय संगठनों के भीतर बढ़ती "शक्तियों के प्रभाव पर निर्भर कर सकता है जो अपने स्वयं के उद्देश्य और विचारों को दूसरों पर थोपते हैं और बहुधा दूसरों की पहचान, गरिमा और संवेदनशीलता की उपेक्षा करते हैं।”

समावेशी भविष्य

महाधर्माध्यक्ष ने कुछ सरकारों के प्रयासों की प्रशंसा की जो दुनिया भर में सताये जा रहे ख्रीस्तियों के लिए प्रभावी कानूनी ढांचे स्थापित कर रहे हैं जो धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करता है।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा,कि इस अधिकार का एक प्रभावी संरक्षण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ, एक समावेशी भविष्य प्रदान करेगा, जो कि 2030 एजेंडा के सफल कार्यान्वयन की ओर ले जा सकता है।

06 March 2019, 16:22