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असिया बीबी असिया बीबी  

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने असिया बीबी को बरी कर दिया

29 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा ने अशिया बीबी के खिलाफ गवाही में विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें झूठे सबूत के आधार पर दोषी ठहराया गया था।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

इस्लामाबाद, बुधवार 29 जनवरी 2019 (वाटिकन न्यूज) : पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को काथलिक महिला आसिया बीबी को बरी कर दिया। वे  ईश निंदा के आरोप में मौत की सजा पर थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामवादियों द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा ने अदालत में कहा, "योग्यता के आधार पर, इस याचिका को खारिज कर दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि याचिका करीब 3 महीने पहले मूल निर्णय में कोई गलती पाने में विफल रही है।"

गलत सबूत

याचिका लाहौर के एक मौलवी मुहम्मद सलाम ने दायर की थी। सलाम ने एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ईसीएल) पर आसिया के नाम की भी मांग की थी, ताकि वह समीक्षा पूरा होने तक देश के बाहर नहीं जा सकती।

अदालत में खोसा याचिकाकर्ताओं के फैसले को पलट देने के गंभीर प्रयास की भर्तसना की और कहा कि बीबी को झूठे सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया गया था, जो मूल मामले में प्रस्तुत गवाही में विसंगतियों की ओर इशारा करता है।

खोसा ने कहा, "आपको लगता है कि हम झूठे सबूतों के आधार पर किसी को मौत की सजा देते हैं?" मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इस तरह के झूठ बोले गए कि एक बयान दूसरे के साथ मेल नहीं खाता।" "कृपया हमारे निर्णय में किसी भी त्रुटि को इंगित करें और हम इसे सुधारने के लिए तैयार हैं।"  

उन्होंने कहा, "आप तो किसी को झूठे सबूतों के आधार पर मारने की घोषणा करने लगते हैं।"

8 साल मौत की कतार पर

चार बच्चों की मां आसिया बीबी को ईश निंदा के दोषी ठहराए जाने के बाद 2010 से मौत की सजा पर एकांत कारावास में रखा गया था। जून 2009 में अपने सहकर्मियों द्वारा ईश निंदा का आरोप लगाये जाने के बाद उसे जेल में बंद कर दिया गया था। सहकर्मियों का कहना था कि बीबी ने पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी,  पाकिस्तान में इसकी सजा मौत है।

बीबी और उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें मुसलमानों के एक गिलास से पानी पीने के लिए दंडित किया गया था।

रिहाई का आदेश

31 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक फैसले में, पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश मियां साकिब निसार ने एशिया बीबी को बरी कर दिया, उसकी रिहाई का आदेश दिया। निसार 17 जनवरी को सेवानिवृत्त हो गए।

उसके बरी होने से धार्मिक कट्टरपंथियों के हिंसक विरोध प्रदर्शकों ने उनकी मौत की मांग की और यह भी मांग की, कि सरकार उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा तक देश छोड़ने से रोके।

7 नवंबर को जेल से रिहा होने के बाद, बीबी को इस्लामाबाद ले जाया गया और उसकी सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा समीक्षा याचिका को खारिज करने के कुछ घंटे पहले, पिछले साल विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले कट्टरपंथियों ने अदालत को "निंदा करने वाले" का पक्ष लेने वालों को शासन नहीं करने की नई चेतावनी जारी की।

अब आसिया बीबी और उसका परिवार उन्हें शरण देने वाले किसी भी देश में शरण लेने हेतु पाकिस्तान छोड़ सकता है।

30 January 2019, 15:37