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बांग्लादेश की शरण लिये हुए रोहिंग्या बांग्लादेश की शरण लिये हुए रोहिंग्या  (AFP or licensors)

रखाइन संकट पर बातचीत करने हेतु म्यांमार धर्माध्यक्षों की मांग

सेना और अराकान सेना के बीच हो रहे नये संघर्ष भी रोहिंग्या शरणार्थियों को लौटने से रोक रही है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

मांडले, बुधवार 16 जनवरी, 2019 (एशिया न्यूज) : धर्माध्यक्ष अलेक्जेंडर पायोन चो ने सभी पक्षों से वार्ता की मेज पर लौटने का आह्वान किया है क्योंकि म्यांमार के रखाइन राज्य में लड़ाई बढ़ रही है। पाइ के धर्माध्यक्ष ने कहा कि सेना और अराकान सेना के बीच तनाव अधिक है।

धर्माध्यक्ष पायो चो ने उकान को बताया, "हथियारों से समस्या का समाधान नहीं होगा, इसलिए दोनों पक्षों को स्थिरता और शांति के लिए बातचीत की मेज पर जाने और काम करने की जरूरत है।"

रखाइन में 4,500 से अधिक लोग अपने घर छोड़कर भाग गए हैं और चार शहरी मठों और स्कूलों में शरण लिये हुए हैं।

धर्माध्यक्ष ने कहा, "नागरिक लड़ाई की कीमत चुकाते हैं और अगर लड़ाई तेज हो जाती है तो और लोग अपने घर छोड़कर भाग सकते हैं।"

69 वर्षीय धर्माध्यक्ष पायोन चो ने कहा कि राखीन में नए सिरे से लड़ाई का शांति प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ेगा क्योंकि आंग सान सू की सरकार टिकाऊ शांति के लिए सभी सशस्त्र जातीय समूहों के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रही है।

धर्माध्यक्ष पियोन चो ने कहा, "यह सरकार के लिए एक चुनौती है, लेकिन मेरा मानना है कि आंग सान सू ची शांति पाने की अपनी प्राथमिकता नहीं छोड़ेंगी क्योंकि वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।"

म्यांमार की सेना ने 21 दिसंबर को उत्तरी और पूर्वी म्यांमार में चार महीने के युद्धविराम की घोषणा की, लेकिन रखाइन को बाहर रखा गया और अराकान सेना के खिलाफ अभियान जारी है।

8 जनवरी को आंग सान सू की सहित म्यांमार के नागर नेताओं ने सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

राखीन के जातीय लोगों की सुरक्षा के लिए 2009 में रखाइन में अराकान सेना का गठन किया गया था और इसमें कई हज़ार सुसज्जित सैनिकों के होने का अनुमान है।

धर्माध्यक्ष पियोन चो के धर्मप्रांत में रखाइन राज्य आता है जहाँ रोहिंग्यों पर अत्याचार हुआ। अगस्त 2017 में म्यांमार की सेना की कार्रवाई के बाद लाखों लोग बांग्लादेश भाग गए।

16 January 2019, 16:20