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भूमध्यसागर में डूबने से बचाये गये प्रवासी भूमध्यसागर में डूबने से बचाये गये प्रवासी  (ANSA)

एमएसएफ दवारा भूमध्यसागर में फंसे लोगों के समाधान की मांग

‘सी-वॉच’ और ‘सी आई’ जहाजों पर भूमध्य सागर में कई दिनों से फंसे लोगों के लिए सीमा रहित डॉक्टरों ने शीघ्र समाधान की मांग की है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

रोम, गुरुवार, 3 जनवरी 2019 (रेई) : सीमा रहित डॉक्टरों के प्रेस कार्यालय ने सूचित किया है कि कुछ दिनों से बंदरगाह उपलब्ध न होने की वजह से 49 प्रवासी पुरुष, महिलाएं और बच्चे भूमध्य सागर के बीच में फंस गए हैं। 22 दिसंबर से 32 प्वासी सी वॉच जहाज पर और 29 दिसंबर से 17 अन्य लोग सी आई जहाज पर हैं।

सीमा रहित डॉक्टरों के संगठन (एमएसएफ) के उपनिदेशक डॉ रुज्जेरो जियानी ने कहा,"हम भूमध्यसागर में तीन साल से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं, अतः हम इस प्रकार की यात्रा करने वाले कमजोर लोगों की भावनाओं और कठिनाईयों को जानते हैं। मौसम की स्थिति बिगड़ने और कड़ाके की सर्दियों के तापमान को देखते हुए, इसका शीघ्र समाधान खोजना आवश्यक है। हम यूरोप और इटली के अधिकारियों से जल्द से जल्द इन जहाजों के लिए सुरक्षित बंदरगाह खोजने की मांग करते हैं।”

इटली नागर समाज से अपील

उन्होंने कहा,“हम इटली नागर समाज से अपील करते हैं कि इस अस्वीकार्य स्थिति पर आवाज उठाएं और लोगों की पीड़ा को कम करने वाली मानवीय नीतियों की मांग करें। पलायन करने वालों को सुरक्षा की जरूरत है। पहले लोगों के जीवन की रक्षा करना है, बाद में राजनीतिक बहस करना है कि वे किसका स्वागत करते हैं।”

समूद्री खतरों से जूझते प्रवासी

डॉ रुज्जेरो जियानी ने कहा कि यह निश्चित रूप से प्रवासी प्रवाह को कम करने के लिए बंदरगाहों को बंद नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके विपरीत यह समुद्र को पार करने वालों के लिए खतरे को बढ़ाता है: 2018 में 2,200 से अधिक लोग भूमध्य सागर के माध्यम से यूरोप पहुंचने की कोशिश में मारे गए या लापता हैं। 14,000 से अधिक लोगों को बंदरगाहों में उतरने से अस्वीकार कर दिया गया है और लीबिया के हिरासत केंद्रों के नरक में लौटने के लिए मजबूर किया गया, जहां किसी भी तरह से मानवीय अधिकारों का सम्मान नहीं किया जाता है।

सीमा रहित डॉक्टरों का संगठन 

2015 से 2018  के बीच, एमएसएफ ने विभिन्न मानवीय जहाजों पर सवार 80,000 से अधिक लोगों को बचाया या सहायता प्रदान की। एसएसएफ ने इटली के बंदरगाहों और लीबिया में भी काम किया है, जहां संगठन हिरासत केंद्रों में प्रवासियों और शरणार्थियों की चिकित्सा देखभाल करती है।

03 January 2019, 14:30