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धर्माध्यक्ष जॉर्ज पाल्लीप्परंबिल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार पाते हुए धर्माध्यक्ष जॉर्ज पाल्लीप्परंबिल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार पाते हुए 

धर्माध्यक्ष शिक्षा एवं स्वास्थ्य देखभाल हेतु पुरस्कार से प्रतिष्ठित

9 दिसंबर को पूर्वोत्तर भारत के एक काथलिक धर्माध्यक्ष को शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए आठवां अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार प्रदान किया गया था।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, सोमवार 10 दिसम्बर 2018 (मैटर्स इन्डिया) : अरुणाचल प्रदेश स्थित मियाओ धर्मप्रांत के सालेसियन धर्माध्यक्ष जॉर्ज पाल्लीप्परंबिल भारत और विदेशों के कई लोगों में से थे, जिन्होंने मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय को बनाए रखने के अपने अद्वितीय प्रयासों के लिए पुरस्कार प्राप्त किया।

स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय एवं मानव अधिकार की अखिल भारतीय समिति ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस को चिह्नित करने के लिए सम्मानित किया।

"उत्कृष्टता प्रमाण पत्र" प्रतिष्ठित पुरस्कार उन विश्व शांति कार्यकर्ताओं और व्यावसायिक लोगों को दिया जाता है जो मानवता की सेवा में असाधारण नेतृत्व दिखाते हैं।

पुरस्कार समारोह नई दिल्ली के ‘इंडिया इस्लामिक स्टडी सेंटर’ में आयोजित किया गया था।

मुख्य अतिथि न्यायाधीश कुरियन जोसेफ

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ, पुरस्कार समारोह के मुख्य अतिथि थे। पूरे भारत से करीब 200 लोगों ने समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि हर किसी की कमजोर, पिछड़े और खोये हुए लोगों के मानवाधिकारों के लिए खड़े होने की नैतिक जिम्मेदारी है। कानून के प्रावधानों की व्याख्या करते समय हम संवैधानिक नैतिकता पर बहुत ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम संवैधानिक करुणा पर अपना ध्यान केंद्रित करें। "

धर्माध्यक्ष जॉर्ज पाल्लीप्परंबिल

धर्माध्यक्ष पाल्लीप्परंबिल ने अरुणाचल प्रदेश के कमजोर, पिछड़े और खोये हुए लोगों के लिए सम्मान स्वीकार कर लिया। 65 वर्षीय धर्माध्यक्ष ने कहा, "मुझे आशा है कि यह पुरस्कार, अरुणाचल प्रदेश के अंतिम गांवों में मेरे लोगों को कुछ दृश्यता देगा।भारत के इस बहुत दूरदराज के पूर्वी कोने में विभिन्न जाति के आदिवासी लोगों के साथ काम करने में मुझे खुशी मिलती है।"

केरल के मूल निवासी धर्माध्यक्ष पाल्लीप्परंबिल ने अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के साथ 40 से अधिक वर्षों तक काम किया है। उनका मिशन शिक्षा का प्रसार और लोगों की प्राचीन संस्कृति का संरक्षण करना था।

इन वर्षों के दौरान धर्माध्यक्ष पाल्लीप्परंबिल ने 46 स्कूलों, 180,00 गरीब आदिवासी बच्चों की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करते हुए, लड़कों और लड़कियों के लिए 85 बोर्डिंग, 17 डिस्पेंसरी, एक अस्पताल, एक स्नातक डिग्री कॉलेज और स्कूल छोड़े हुए युवाओं के लिए एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की। ये सभी म्यांमार और चीन के सीमावर्ती गांवों में स्थित हैं।

इस साल धर्माध्यक्ष को मिला यह दूसरा पुरस्कार है। अप्रैल में, संस्कृत युवा संस्थान ने उन्हें अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यावरण और विकास के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘भारत गौरव लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार’ से सम्मानित किया।

10 December 2018, 17:03