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आसिया बीवी ईश निन्दा आरोप से मुक्त आसिया बीवी ईश निन्दा आरोप से मुक्त  (ANSA)

आसिया बीवी पर हुआ फ़ैसला सबके लिये लाभकर

पाकिस्थान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की न्याय एवं शांति सम्बन्धी समिति के अध्यक्ष फादर इम्मानुएल यूसुफ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आसिया बीवी पर दिये फ़ैसले पर वाटिकन न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि यह फ़ैसला केवल कलीसिया के लिये ही नहीं अपितु पाकिस्तान के सभी नागरिकों के लिये महत्वपूर्ण है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 2 नवम्बर 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): पाकिस्थान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की न्याय एवं शांति सम्बन्धी समिति के अध्यक्ष फादर इम्मानुएल यूसुफ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आसिया बीवी पर दिये फ़ैसले पर वाटिकन न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि यह फ़ैसला केवल कलीसिया के लिये ही नहीं अपितु पाकिस्तान के सभी नागरिकों के लिये महत्वपूर्ण है.  

31 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक फैसले में, पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ निंदा करने के आरोप में 2010 से मृत्यु दण्ड पानेवाली काथलिक महिला आसिया बिवी को निर्दोष बताते हुए उन्हें बरी कर दिया था. आसिया बीबी इस आरोप से सदा इनकार करती रही हैं.

इस बात के मद्देनज़र कि कई मुस्लिम भी ईश निन्दा कानून से पीड़ित हैं, फादर यूसुफ ने कहा कि फैसला पाकिस्तान के सभी नागरिकों के लिए फायदेमंद है, भले ही वे मुस्लिम, ईसाई, हिंदू, सिख या अन्य धर्मों के ही क्यों न हों.

ईश्वर प्रार्थना सुनते हैं

यूादर यूसुफ ने कहा, "ईश्वर ने आसिया की तथा हम सबकी प्रार्थना सुन ली है और इसमें सभी शुभचिन्तक मुसलमानों की प्रार्थनाएँ भी शामिल रहीं हैं."

उन्होंने न्याय देने वाले सभी न्यायाधीशों पर ईश्वर के आशीर्वाद का आह्वान किया. उन्होंने सम्पूर्ण पाकिस्तान पर ईश्वर की आशीष की मंगलयाचना की और कहा कि मुस्लिम, ईसाई और अन्य सभी धर्मों के पाकिस्तानी नागरिक अपने देश से प्यार करते हैं जिनके लिये प्रार्थना की नितान्त आवश्यकता है.

यूादर यूसुफ ने सम्पूर्ण विश्व के लोगों से अपील की कि वेाकिस्तान की कलीसिया के लिये प्रार्थना करें जो पीड़ित है किन्तु जिसका विश्वास अटल है. देश में खुशहाली एवं समृद्धि के लिये फादर यूसुफ ने प्रार्थनी ​​की अपील की.

विवादास्पद ईश निन्दा कानून

मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान में ईश निंदा कानून एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है जिसकी देश के भीतर भी गहन आलोचना हेती रही है.

ग़ौरतलब है कि सन् 2011 में आसिया बीबी के पक्ष में आवाज़ उठानेवाले तथा उन्हें दिये गये प्राण दण्ड के खिलाफ़ बोलनेवाले पंजाब के राज्यपाल सलमान तासिर एवं पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री काथलिक धर्मानुयायी शाहबाज़ भट्टी दोनों की हत्या कर दी गई थी. मानवाधिकार दल इस बात पर बल देते रहे हैं कि ईश निन्दा कानून की आड़ में अल्पसंख्यकों को उत्पीड़ित किया जाता रहा है तथा निजी रंजिशों का बदला लेने का माध्यम बनाकर इसका दुरुपयोग किया जाता रहा है.  

02 November 2018, 11:33