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इंडोनेशिया की एक बच्ची इंडोनेशिया की एक बच्ची  (AFP or licensors)

इंडोनेशिया के अनाथ बच्चे दहशत में, "सेभ द चिलड्रेन"

सेभ द चिलड्रेन ने कहा है कि इंडोनेशिया में भुकम्प एवं सुनामी के कारण कई बच्चे अनाथ हो गये हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है वे दहशत की स्थिति में हैं। उन्हें तत्काल पहचान कर, उनके परिवार के साथ मिलाने की आवश्यकता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

शुक्रवार को आये भुकम्प एवं सुनामी में जो बच्चे अपने माता-पिता एवं परिवार से अलग हो गये हैं उन्हें शीघ्र पहचाने जाने एवं उनके रिश्तेदारों से मिलाने की आवश्यकता है।

इंडोनेशिया के अधिकारियों के अनुसार करीब 46 हजार बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है। इस आपदा में कुल 1400 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है जिनमें कई बच्चे हैं। वहाँ 65 हजार घर ध्वस्त हो चुके हैं।

अनाथ बच्चों की स्थिति

पालू में बाल सुरक्षा अधिकारी जूबेदे कोतेंग ने कहा, "सड़कों पर घूमकर आप सभी ओर विनाश का स्पष्ट नजारा देख सकते हैं। घर इस तरह नष्ट हो गये हैं कि यह समझना भी मुश्किल है कि वह पहले कहाँ था। उन्होंने कहा कि मैं सबसे अधिक बच्चों के लिए चिंतित हूँ जो अनाथ हो गये हैं अथवा अपना परिवार खो दिये हैं। वे रास्ते पर सोते हैं क्योंकि उन्हें मालूम ही नहीं है कि कहाँ जाना है। बच्चों की इस भयावाह स्थिति की कल्पना करना अत्यन्त कठिन है।"

पुरी नाम की 9 साल की बच्ची को पाँच घंटे बाद मलबे से निकाला गया। "सेभ द चिल्ड्रन" को जानकारी देते हुए उसके भाई दिमास ने कहा कि उसकी बहन लाश से दबी, बेहोश पड़ी थी। सौभाग्य से, उसके हाथ खाली थे और उसने लोगों को आकर्षित किया, जिन्होंने मलबे को हटाकर उसे बाहर निकाला। उन्होंने कहा कि पुरी का बचना एक चमत्कार है। घर जिसमें वे रहते थे वह खिसककर 50 मीटर दूर चला गया था। बहुत कम ऐसे घर हैं जो अभी भी खड़े हैं।   

‘सेभ द चिलड्रेन’ का प्रयास

स्थानीय सहयोगियों द्वारा, अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर ‘सेभ द चिलड्रेन’ बच्चों को पहचानने तथा परिवारों को पुनः एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही साथ, नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष क्रियाविधि स्थापित किया है। कोतेंग ने कहा, "बिछुड़े बच्चों को उनके परिवार के जीवित सदस्यों तक पहुँचाना उनकी सबसे बड़ी कोशिश है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके एवं एजेंसियों और सरकार के सहयोग से अनाथ बच्चों का सही देखभाल किया जा सकें। उन्होंने कहा कि सुनामी से विनाश के कारण सुलावेसी समुदाय तक पहुँचना बहुत कठिन है जो परिवार से बिछुड़े बच्चों को अधिक कमजोर बना रहा है।"

‘सेभ द चिल्ड्रेन’ के कार्य

‘सेभ द चिल्ड्रेन’ एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो 1919 से ही बच्चों की सुरक्षा एवं उन्हें भविष्य दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। इंडोनेशिया में 28 सितम्बर को भुकम्प एवं सुनामी के कारण हुई तबाही से निपटने के लिए, वह शुरू से ही मौलिक आवश्यकताओं को प्रदान करने की कोशिश कर रहा है। संगठन बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान बनाने की भी कोशिश कर रहा है ताकि उन्हें बचाव अभियान के भयावाह दृश्य से बचाया जा सके। इंडोनेशया में सेभ द चिलड्रेन 1976 से ही कार्यरत है।

04 October 2018, 16:21