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संकट में पड़े बच्चे संकट में पड़े बच्चे  (2018 Getty Images)

धर्मगुरूओं द्वारा युवाओं को ऑनलाइन शोषण से बचाने की कोशिश

बच्चों को सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर दी गई झूठी सूचनाओं के खतरों के बारे में आगाह किया जाना चाहिए। पारिवारिक प्रार्थनाएं, बच्चों के साथ समय बिताना और उनके विचारों को सुनना इस समस्या से निपटने का महत्वपूर्ण तरीका है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, बुधवार, 3 अक्तूबर 2018 (उकान) भारतीय बौद्ध, ख्रीस्तीय, हिंदू, मुस्लिम और सिख नेता इंटरनेट का उपयोग करने वाले युवाओं की सुरक्षा के तरीकों की तलाश कर रहे हैं। करीब 50 धार्मिक नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ, नई दिल्ली में, 26 से 27 सितंबर तक आयोजित क्षेत्रीय अंतरधार्मिक वार्ता' में 'बाल विनम्रता ऑनलाइनट पर योजना तैयार की।

भारत के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष जॉनबप्तिस्ता दीक्वात्रो उन नेताओं में से एक थे जिन्होंने गैर-सरकारी समूहों द्वारा आयोजित वार्ता सम्मेलन में भाग लिया। काथलिक फोकोलारे आंदोलन के सदस्य भी शामिल थे।

महाधर्माध्यक्ष दीक्वात्रो ने कहा कि बच्चों को सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर दी गई झूठी सूचनाओं के खतरों के बारे में सिखाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पारिवारिक प्रार्थनाएं, बच्चों के विचारों को सुनना और उनके साथ समय बिताना इस समस्या से निपटने का महत्वपूर्ण तरीका है।

यूनिसेफ इंडिया के बाल संरक्षण विभाग के प्रमुख जेवियर अगुइलेर ने कहा कि प्रमुख मुद्दों पर हितधारकों को संवेदनशील बनाने और नुकसान को कम करने में धार्मिक नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

जापान स्थित बाल विकास समूह अरिगाटो इंटरनेशनल के प्रोफेसर अनंत रामबाचन ने कहा कि नई दिल्ली सेमिनार का लक्ष्य परिवार और सामाजिक दोनों स्तरों पर हिंसा को रोकने के लिए रणनीतियों को विकसित करना है। उन्होंने सकारात्मक परिवर्तन और नकारात्मक प्रभाव सहित तकनीकी परिवर्तन से जुड़े नैतिक मुद्दों पर अंतर-धार्मिक वार्ता को भी बढ़ावा दिया।

सम्मेलन के वक्ताओं ने कहा कि हिंसा के परंपरागत रूप जारी हैं, जबकि नई चुनौतियां उभर रही हैं जैसे सौंदर्य, सेक्सी तस्वीर या संदेश भेजना, साइबर धमकी और बच्चों का वेबकॉम यौन शोषण आदि।

यूनिसेफ की 'विश्व में बच्चों की स्थिति 2017’ में कहा गया कि डिजिटल दुनिया में, विश्व के हर तीन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से एक 18 वर्ष से कम आयु के युवा थे। 15 से 24 साल के युवा लोग सबसे ज्यादा इंटरनेट से जुड़े थे।

राजस्थान राज्य के जोधपुर में मौलाना आजाद विश्वविद्यालय के मुस्लिम बौद्धिक अकथारुल वासेसी ने कहा कि धर्मगुरू समुदायों को शिक्षित और संवेदनशील बनाकर बाल शोषण का मुकाबला कर सकते हैं।

नई दिल्ली सेमिनार रोम में 2017 की बैठक का अनुवर्ती था और बाल संरक्षण से संबंधित एक और बैठक 19-20 नवम्बर को अबू धाबी में निर्धारित की गई।

03 October 2018, 16:10