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व्याभिचार मामले पर फ़ैसला, नई दिल्ली व्याभिचार मामले पर फ़ैसला, नई दिल्ली  (ANSA)

व्यभिचार कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, महिलाएँ मवेशी नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ब्रिटिश युग से चली आ रही भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को रद्द कर इसे असंवैधानिक, पुराकालीन तथा मनमाना निरूपित किया है। एक न्यायाधीश ने यहाँ तक कह डाला कि महिलाओं को "मवेशी" नहीं माना जा सकता है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शुक्रवार, 28 सितम्बर 2018 (ऊका समाचार): भारत के सुप्रीम कोर्ट ने व्याभिचार को अपराध बताने वाले क़ानूनी प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ब्रिटिश युग से चली रआ भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को रद्द कर इसे असंवैधानिक, पुराकालीन तथा मनमाना निरूपित किया है. क न्यायाधीश ने यहाँ तक कह डाला कि महिलाओं को "मवेशी" नहीं माना जा सकता है.

आईपीसी की धारा 497 संविधान के खिलाफ़

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस आर एफ़ नरीमन, जस्टिस इंदू मल्होत्रा ​​और जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में कहा कि व्याभिचार से संबंधित भारतीय दंड संहिता आईपीसी की धारा -497 संविधान के ख़िलाफ़ है.

न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा, "व्याभिचार को अपराधिक जुर्म नहीं माना जा सकता, यह गोपनीयता का मामला है. पति पत्नी का स्वामी नहीं है. पुरुषों के सदृश ही महिलाओं के साथ भी समान व्यवहार किया जाना चाहिये." फ़ैसला पढ़ते हुए उन्होंने कहा, "यह आपराधिक जुर्म नहीं होना चाहिए क्योंकि इसमें और लोग भी शामिल होते हैं."

भेदभाव संविधान का उल्लंघन

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी प्रकार का भेदभाव संविधान का उल्लंघन होगा. उन्होंने कहा कि महिला को समाज के तौर तरीकों के बारे में सोचने के लिये मजबूर नहीं किया जा सकता. न्यायमूर्ति रोहिंगटन नरीमन ने कहा, "महिलाओं के साथ मवेशियों के सदृश व्यवहार नहीं किया जा सकता."

जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में इस बात पर खेद व्यक्त किया कि यौनाचर के बारे में हमारे समाज में दो तरह की नैतिकता प्रचलित है, एक महिलाओं के लिये और दूसरी पुरुषों के लिये. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सदगुणों का मूर्तरूप मानने के कारण ही इज्ज़त हत्या जैसी क्रूर प्रथाओं को प्रश्रय मिला है. इसके साथ ही कोर्ट ने साल 1860 में पारित इस 158 साल पुराने क़ानून को असंवैधानिक करार दिया तथा कहा कि यह संविधान में प्रत्याभू महिलाओं की गरिमा, उनकी स्वतंत्रता और यौन स्वायत्तता के खिलाफ है.

28 September 2018, 11:37