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संत पापा के साथ कार्डिनल बो संत पापा के साथ कार्डिनल बो 

चंगाई का समय है घावों को खोलने का नहीं

म्यानमार एक ऐतिहासिक चुनौती से होकर गुजर रहा है। म्यानमार के प्रथम कार्डिनल चार्स मौंग बो ने देश की स्टेट कौंसलर आंग सन सु की के साथ सहमति जतायी तथा लोकतांत्रिक बदलाव में सैनिकों की मुख्य भूमिका को रेखांकित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

यांगोन, मंगलवार, 11 सितम्बर 2018 (एशियान्यूज़)˸ म्यानमार का इतिहास एक घायल इतिहास है। यह चंगाई का समय है न कि घावों को पुनः खोलने का। उक्त बात म्यानमार के प्रथम कार्डिनल एवं यांगोन के महाधर्माध्यक्ष चार्स मौंग बो ने शांति की चाह रखने वालों से की गयी अपील में लिखी।

कार्डिनल ने देश की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा, "म्यानमार के लोगों ने लम्बे समय तक एक अर्थपूर्ण स्वतंत्रता एवं मानव विकास का इंतजार किया है। इस देश के युवा उन्नति के अवसर का इंतजार कर रहे हैं। विद्यार्थी गुणवत्ता शिक्षा की और लाखों युवा रोजगार के अवसरों का इंतजार कर रहे हैं। हजारों विस्थापित अपने स्वप्नों को साकार करने के लिए घर लौटने की बाट जोह रहे हैं। देश आशा की प्रतीक्षा में है। राष्ट्र व्यापक शांति की तलाश कर रहा है। कार्डिनल बो ने उन चुनौतियों पर गौर किया जिन्होंने लोगों को उपनिवेश की स्थापना के समय से ही परेशान किया है तथा संघर्ष, विस्थापन एवं पलायन के द्वारा देश को घायल किया है।"

म्यानमार के लोगों की आशा

कार्डिनल याद करते हैं कि 2016 में लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना हुई थी जिसके लिए शांति प्रक्रिया एक जरूरी जनादेश था। कार्डिनल बो ने स्टेट कौंसलर को लिखे पत्र में कहा कि प्रजातंत्र को सुदृढ़ किया जाना चाहिए जो अभी भी कमजोर है। म्यानमार के लोगों की आशा, शांति एवं समृद्ध प्राप्त करना है। वे स्टेट कौंसलर से उम्मीद करते हैं कि वे सरकार, सैनिक, बौद्ध याजकों एवं नागरिकों के बीच समझदारी लायेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए लोकतांत्रिक बदलाव में सैनिकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। नागरिकों एवं सैन्य प्रशासन को एक साथ काम करना चाहिए ताकि लाखों लोगों के लिए इसे एक आशावान देश बनाया जा सके।

23 अगस्त को, म्यानमार काथलिक धर्माध्यक्षों, कलीसियाओं के परिषद, एवंजेलिकल ख्रीस्तीय अलायंस तथा ख्रीस्त के मिशन के सहयोग की, एक संयुक्त सभा के वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा कि "इस वर्तमान समय में हम महसूस करते हैं कि विनाशकारी तत्व, अनुचित दबाव एवं बाधाओं द्वारा, डेमोक्रेटिक फेडेरल संघ के गठन हेतु विभिन्न संस्थाओं और संघ के शांति निर्माण में अड़चन डाल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा सहयोग की आशा

जातीय संघर्ष एवं देश की पीड़ित मानवीय आपात स्थिति, खासकर, रखाईन एवं काचिन प्रांत को इंगित करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि नरसंहार, जातीय सफाई और प्रतिबंध आदि हमें शांति एवं प्रजातंत्र की ओर यात्रा में मदद नहीं कर सकते, बल्कि हमारी जटिल परिस्थिति को समझते हुए अंतराष्ट्रीय समुदाय द्वारा हमें सहयोग एवं साथ की आवश्यकता है।  

कार्डिनल ने अंत मे कहा कि म्यानमार एक प्रतिज्ञा का देश है, आइये हम उस प्रतिज्ञा को पूरा करने में अपना सहयोग दें। आइये हम आगे बढ़ें।

11 September 2018, 17:37