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स्वतंत्रता दिवस मनाती हुई स्कूल की छात्राएँ स्वतंत्रता दिवस मनाती हुई स्कूल की छात्राएँ  (AFP or licensors)

समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है: राष्ट्रपति कोविंद

आज, बुधवार 15 अगस्त को पूरे भारत के लोग देश का 72वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। 15 अगस्त 1947 को भारत में प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।

माग्रेट सुनीता मिंज - वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, बुधवार 15 अगस्त 2018 (एशिया न्यूज) :  स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में तिरंगे को देश की अस्मिता का प्रतीक बताया और कहा कि देश एक निर्णायक दौर से गुज़र रहा है, ऐसे में ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में उलझने और निरर्थक विवादों में पड़ने की बजाए सभी को एकजुट होकर ग़रीबी, अशिक्षा और असमानता को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वाधीनता दिवस  हमेशा ही एक विशेष महत्व का होता है। लेकिन इस बार, इस दिवस के साथ एक खास बात जुड़ी हुई है। कुछ ही सप्ताह बाद, 2 अक्टूबर से, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह शुरू हो जाएंगे। गांधीजी ने,केवल हमारे स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व नहीं किया था, बल्‍कि वे हमारे नैतिक पथ-प्रदर्शक भी थे और सदैव रहेंगे। भारत के राष्ट्रपति के रूप में, मुझे अफ्रीका के देशों की यात्रा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। विश्व में, जहां-जहां मैं गया,  मैंने पाया कि सम्‍पूर्ण मानवता के आदर्श के रूप में गांधीजी को सम्‍मान के साथ स्‍मरण किया जाता है। उन्हें मूर्तिमान भारत के रूप में देखा जाता है।

अहिंसा

गांधीजी का महानतम संदेश यही था कि हिंसा की अपेक्षा,अहिंसा की शक्ति कहीं अधिक है। प्रहार करने की अपेक्षा, संयम बरतना, कहीं अधिक सराहनीय है। हमारे समाज में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। गांधीजी ने अहिंसा का यह अनमोल अस्त्र हमें प्रदान किया है। उनकी अन्य शिक्षाओं की तरह, अहिंसा का यह मंत्र भी, भारत की प्राचीन परम्‍परा में मौजूद थी और आज 21वीं सदी में भी, हमारे जीवन में यह उतना ही उपयोगी और प्रासंगिक है। हम सब भारतवासी अपने दिन-प्रतिदिन के आचरण में, उनके द्वारा सुझाए गए रास्तों पर चलने का संकल्प लें। हमारी स्वाधीनता का उत्सव मनाने, तथा भारतीयता के गौरव को महसूस करने का, इससे बेहतर कोई और तरीका नहीं हो सकता है।

15 August 2018, 15:40