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केरल के मछुवारे केरल के मछुवारे  (AFP or licensors)

केरल के बाढ़ में मछुवारे बने बहादूर

भारत के केरल राज्य में मछुआरों को अपनी पारंपरिक लकड़ी की नौकाओं का उपयोग कर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बाढ़ के पानी से बचाने में मदद करने के कारण बहादूरों के रूप में सम्मानित किया जा रहा है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

आलप्पुषा जिला के एक बाल आश्रम में फंसे 30 बच्चों के साथ, बाढ़ के जल से बचायी गयी एक महिला ने अपने दोनों हाथ जोड़कर नाव खेने वाले मछुवारे से कहा, "आप हमारे ईश्वर के समान हैं।"

काथलिक एवं मुसलमान मछुवारे

अरेबियन सागर में मछुवारे जिनमें अधिकतर काथलिक एवं मुसलमान हैं उन्होंने 15 से 18 अगस्त के बीच आये बाढ़ से राहत कार्य हेतु एक स्वयंसेवक दल का निर्माण किया है।

बाढ़ के जल में घरों के डूब जाने के कारण कुछ लोग अस्थायी रूप से अलग हो गये थे और कुछ लोगों का जीवन गंभीर खतरे में था।

त्रिवेंद्रम महाधर्मप्रांत के राजू थॉमस की अगुवाई में एक दल ने अपनी नावों को, केरल के आपदा क्षेत्रों से करीब 200 किलो मीटर की दूरी पर रखा।

राजू थॉमस ने कहा, "हम बाल आश्रम को नहीं देख सकते थे, हमने उन्हें तब पाया जब हमने उनका चिल्लाना सुना।"

राजू का दल स्थानीय महाधर्मप्रांत द्वारा प्रबंध किये गये कई दलों में से एक है। कोची, क्विलन, एलेप्पी और त्रिवेंद्रम तट के करीब 1500 मछुवारों ने राहत कार्यों में भाग लिया।

मछुवारों का साहसपूर्ण कार्य

कई मौकों पर वे अपनी छोटी पारंपरिक नौकाओं को उन जगहों पर कुशलता से खेने में सक्षम थे जब हेलीकॉप्टर अनुपलब्ध थे अथवा जहाँ पेड़ों के उखड़ जाने के कारण पीड़ितों तक पहुंचना मुश्किल था। आपदा से निपटने के लिए नौसेना के जहाजों की संख्या भी अपर्याप्त थी।

त्रिवेंद्रेम महाधर्मप्रांत के संयोजक फादर शिजिन जोश ने कहा कि त्रिवेंद्रेम महाधर्मप्रांत ने अकेले 130 नावों का प्रबंध किया था जिनमें 500 मछुवारे मदद कर रहे थे। यह कठिन काम था क्योंकि मछुवारों को आवासों के संकरे स्थलों से होकर गुजरना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि कई नावें खराब हो गयीं किन्तु उन्होंने उनकी मरम्मत की और मिशन को सफलता पूर्वक पूरा किया।

सरकार ने मछवारों को अपनी आजीविका के नुकसान की भरपाई के लिए 3,000 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से देनी चाही किन्तु उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि वे पीड़ित लोगों की मदद करना चाहते थे।

उदारता में सच्चा संतोष

मछुवारे जिन्होंने राहत कार्य में भाग लिया, उका समाचार को बतलाया कि उनका सबसे बड़ा इनाम था, उन लोगों के चेहरे पर संतोष के भाव देखना जिन्हें उन्होंने बचाया था।

राहत कार्य से जुड़े शोजी डेनसी ने कहा, "हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते कि कितना आभार उन्होंने हम लोगों के प्रति प्रकट किया। हम समाज के पिछड़े वर्ग से आते हैं किन्तु बचाये गये अधितर लोग धनी वर्ग के हैं। हमें दुःख हुआ जब उन्होंने हाथ जोड़कर अपना जीवन बचाने के लिए हमसे अर्जी की।"

उन्होंने कहा कि कई लोगों का जीवन बचाया जा सका क्योंकि लोगों ने जाति, समुदाय, वर्ग और धर्म पर ध्यान दिये बिना, लगातार काम किये।

केरल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के अनुसार, पूरे मानसून के मौसम में बाढ़ ने 383 लोगों की जान ले ली और इसके कारण 1.3 मिलियन से अधिक लोगों को 3,612 राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया।

28 August 2018, 16:31