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27 मार्च 2020 को कोविड-19 लॉकडाऊन के दौरान विशेष प्रार्थना करते संत पापा फ्राँसिस 27 मार्च 2020 को कोविड-19 लॉकडाऊन के दौरान विशेष प्रार्थना करते संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

क्रूस हमारे जीवन का कम्पास एवं आशा, पोप

"तुम लोग इस प्रकार क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?" यह उस नये किताब का शीर्षक है जिसको वाटिकन संचार विभाग ने प्रकाशित किया है। इस किताब में निहित चित्र और लेख, असाधारण "उर्बी एत ओर्बी" प्रार्थना एवं आशीर्वाद में, संत पापा फ्राँसिस के भावों और शब्दों की याद दिलाते हैं जिनको उन्होंने पिछले साल 27 मार्च को कोरोनावायरस के कारण लॉकडाऊन के दौरान सम्पन्न किया था।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 25 मार्च 2021 (रेई)- "मैं इस तरह अकेला, चला, कई लोगों के अकेलेपन की याद करते हुए...समावेशी विचार, एक विचार जो मन और हृदय दोनों में चल रहे थे।" ये संत पापा फ्राँसिस के शब्द हैं जो किताब में 27 मार्च की शाम की असाधारण प्रार्थना के क्षण की याद दिलाते हैं। उस दिन संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में अकेले और वर्षा की रिमझिम बुंदों के बीच प्रार्थना की कि घातक कोरोना वायरस के चंगुल से मानवता की रक्षा हो। इस कार्यक्रम को लाईव प्रसारित किया गया था जिसमें विश्वभर के लोगों ने संचार माध्यमों के द्वारा भाग लिया।  

किताब, "तुम लोग इस प्रकार क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?" संत पापा फ्राँसिस के साथ वाटिकन संचार विभाग के सचिव मोनसिन्योर लुचो अंड्रियन रूइज़ का संक्षेप साक्षात्कार है, जिसमें पोप उस यादगार पल को पुनः जीते हैं। शीर्षक को मारकुस रचित सुसमाचार से लिया गया है। (मार.4,40) ये शब्द येसु के शब्द हैं जो उनके भयभीत शिष्यों के लिए कहे गये थे जब समुद्र में भयंकर आंधी के समय नाव में सो रहे येसु को उन्होंने जगाया था। वाटिकन प्रकाशन हाऊस (एल.ई.वी) किताब को 17 दिसम्बर को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करेगा, जब संत पापा फ्राँसिस 85 साल के हो जायेंगे।  

किताब का पहला भाग, 27 मार्च के कार्यक्रम में पोप के मानवता के लिए ईश्वर से जोरदार एवं शक्तिशाली अर्जी को प्रस्तुत करता है। दूसरे भाग में सुसमाचार एवं कलीसिया के सामाजिक सिद्धांत के आलोक में चिंतन किया गया है। उन्होंने लोगों को प्रोत्साहन दिया है कि वे महामारी को जीवन के अर्थ एवं अस्तित्व पर पुनः विचार करने हेतु एक अवसर के रूप में लें, ताकि इसमें से बदतर नहीं बल्कि बेहतर रूप में बाहर निकला जा सके,  और व्यक्ति अपने आप से सवाल करते हुए मन-परिवर्तन कर सके।      

सभी एक ही नाव में सवार

संत पापा ने अपने साक्षात्कार में याद किया है कि "खाली प्रांगण में, मन मैं दो विचार आये ˸ दूर से जुड़े लोग...और दूसरी ओर आप्रवासियों की नाव का स्मारक...।"

"हम सभी एक ही नाव पर सवार हैं और इस नाव से, हम नहीं जानते कि कितने लोग उतर पायेंगे। नाव के सामने सारे नाटक, महामारी, अकेलापन...मौन ...आदि में "संत पापा जोर देते हैं कि उन्होंने अकेलापन महसूस नहीं किया बल्कि वे सभी के साथ जुड़े थे।"

मार्च 27 की शाम को मार्मिक क्षण तब आया जब पोप क्रूस के सामने चुपचाप प्रार्थना में कुछ पल व्यतीत करने के बाद, येसु के पैरों को चूमे। संत पापा ने कहा कि क्रूसित येसु के पाँव चूमना, हमेशा आशा प्रदान करता है।" येसु जानते हैं कि चलने का अर्थ क्या है और क्वारानडाईन का अर्थ क्या है क्योंकि उन्हें स्थिर रखने के लिए दो कीलें जड़ी हुई हैं। येसु के पाँव लोगों के जीवन में दिशा सूचक यंत्र हैं कि कब उन्हें चलना है और कब रूकना। संत पापा ने कहा, "येसु के पाँव मुझे बहुत कुछ सिखाते हैं...।"

क्रूस के अलावा उस खाली प्राँगण में रोम की संरक्षिका माता मरियम की तस्वीर (रोमी लोगों के स्वास्थ्य की माता मरियम) भी रखी गई थी। प्रार्थना उस समय में एक प्रकार का ठहराव था जब विश्वभर के ख्रीस्तीय संत पेत्रुस प्राँगण में घटित घटना से चकित थे, ईश्वर की दया की याचना कर रहे थे एवं व्यक्तिगत तथा वैश्विक रूप में जीवन पर चिंतन कर रहे थे।  

27 मार्च अनुवर्ती

किताब के दूसरे भाग में 27 मार्च की प्रार्थना के बाद किये गये कई साक्षात्कार शामिल हैं। जिसमें संत पापा ने दिशा परिवर्तन की अपील की है। यह संत पापा के प्रेरितिक विश्वपत्र "फ्रातेल्ली तूत्ती" की ओर ले जाता है, जिसके कुछ अंश वैश्विक महामारी से संबंधित हैं।  

इस संबंध में संत पापा ने अपने 5 अगस्त से 30 सितम्बर 2020 के आमदर्शन समारोहों में विश्व की चंगाई पर अपनी धर्मशिक्षा के एक नये चक्र को पूरा किया। ये चिंतन हमारी शारीरिक, आध्यात्मिक और सामाजिक बीमारियों की जड़ को आमहित, गरीबों के लिए बेहतर विकल्प, आम घर की देखभाल जैसे मुद्दों में बदलने के लिए प्रेरित करती हैं। हमें ख्रीस्त को केंद्र में रखते हुए याद रखना है कि कोई भी अकेला नहीं बच सकता, जिसको महामारी ने स्पष्ट कर दिया है।

25 March 2021, 15:26