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वाटिकन में आध्यात्मिक साधना वाटिकन में आध्यात्मिक साधना  (ANSA)

शुद्धि, प्रकाश और ईश्वर के संग सम्मिलन की आवश्यकता, कार्डिनल

वाटिकन में परमधर्मपीठीय रोमी कार्यालय के धर्माधिकारियों की चालीसाकालीन आध्यात्मिक साधना के दौरान शुक्रवार को प्रस्तुत चिन्तन में कार्डिनल कान्तालामेस्सा ने शुद्धि, प्रकाश एवं ईश्वर के साथ सम्मिलन पर बल दिया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 26 फरवरी 2021 (रेई,वाटिकन रेडियो): वाटिकन में परमधर्मपीठीय रोमी कार्यालय के धर्माधिकारियों की चालीसाकालीन आध्यात्मिक साधना के दौरान शुक्रवार को प्रस्तुत चिन्तन में कार्डिनल कान्तालामेस्सा ने शुद्धि, प्रकाश एवं ईश्वर के साथ सम्मिलन पर बल दिया।

पश्चाताप करो

सुसमाचार के "पश्चाताप करो एवं विश्वास करो" वाक्य पर चिन्तन करते हुए उन्होंने कहा कि मन की शुद्धि के लिये पश्चाताप की नितान्त आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि हालांकि, पश्चाताप करना आसान कार्य नहीं है, क्योंकि इसमें हमें अपनी कुछ आदतों को छोड़ना होता है, अपने आप को बदलने का संकल्प करना होता है, तथापि, चालीसाकल के दौरान इसका प्रयास करना हमारा दायित्व है, ताकि हम मन से शुद्ध होकर, ईश्वरीय आलोक का आनन्द उठा सकें।

कार्डिनल कान्तालामेस्सा ने कहा कि प्रभु येसु के वचनों पर ध्यान कर हम बच्चों के सदृश बनें तथा अपनी खामियों को दूर करने से न डरें, बल्कि अपने दुर्गुणों को पहचान कर उनपर पश्चाताप करें तथा ईश कृपा के पात्र बनें।

आध्यात्मिकता के उत्तराधिकारी

कार्डिनल महोदय ने कहा, "बपतिस्मा संस्कार प्राप्त करने के कारण हम ख्रीस्तीय उस आध्यात्मिकता के उत्तराधिकारी हैं जो सामान्यतः पूर्णता को तीन चरणों में विभाजित करती है, जो हैं, शुद्धि, प्रकाश और ईश्वर के संग सम्मिलन। ये तीन चरण ईश्वर के साथ हमारे सम्बन्ध को मज़बूत करते हैं। इसका अर्थ है कि हमें त्याग और वैराग्य का वरण करना होगा तब ही हम ख्रीस्तीय धर्म के मर्म को समझ पायेंगे।"

मनपरिवर्तन आऊटमोडेड नहीं

उन्होंने कहा कि पश्चाताप, "मनपरिवर्तन एवं ईश्वर के साथ मिलन महान प्रज्ञा एवं सदियों के अन्तराल में किये गये ख्रीस्तीय धर्म के महानुभवों द्वारा की गई अनुभूतियों का फल है, इसलिये यह सोचना कि आज के युग में यह आऊटमोडेड या दकियानूसी ख्याल मात्र है ग़लत होगा।"

उन्होंने कहा कि यह न तो दकियानूसी है, न ही अनाधुनिक अथवा पुरानी सोच पर आधारित है बल्कि यह ईश कृपा के फलों को ग्रहण करने का एकमात्र तरीका है।      

26 February 2021, 11:32