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कार्डिनल माईकेल चरनी कार्डिनल माईकेल चरनी 

कार्डिनल चरनी: फ्रातेल्ली तूत्ती आप्रवासियों के साथ सही व्यवहार का रास्ता दिखाता है

समग्र मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के आप्रवासी विभाग के उपसचिव कार्डिनल माईकेल चरनी ने अंतरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवासी आयोग के नये ब्लॉग में चिंतन प्रस्तुत किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 14 जनवरी 2021 (रेई)- कार्डिनल चरनी ने लिखा है कि संत पापा फ्रांसिस का नया प्रेरितिक विश्व पत्र फ्रातेल्ली तूत्ती में आप्रवासियों, शरणार्थियों एवं हाशिये के लोगों की खुशी और आशा, उदासी एवं चिंता को सीधे सम्बोधित किया गया है। प्रेरितिक पत्र के केंद्र में लोगों और राष्ट्रों को अधिक भ्रातृत्व एवं सामाजिक मित्रता के लिए आह्वान किया गया है।

कार्डिनल के चिंतन का शीर्षक है- "सभी भाई और विस्थापन की विपत्ति।" उन्होंने उदार बंधुत्व की याद दिलायी है जो स्वीकार करता, सराहना करता एवं अपने जन्म स्थान या निवास स्थान से परे लोगों को प्यार करता है।

प्रतिष्ठित जीवन का अधिकार

कार्डिनल चरनी के अनुसार अपने देश में सभी लोगों को सम्मानित जीवन जीने एवं समग्र विकास का अधिकार है। यह समस्त विश्व के कर्तव्य पर एक सवाल है चूँकि गरीब देशों को विकास में मदद किया जाना चाहिए। निवेश सिर्फ सतत् आर्थिक विकास में नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि गरीबी, भूख, बीमारी, पर्यावरण क्षरण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष करना भी आवश्यक है।

स्वागत, सुरक्षा, प्रोत्साहन और समावेश

समग्र मानव विकास के आप्रवासी विभाग के उपसचिव ने उन लोगों के प्रति उचित "नैतिक जवाब" की ओर संकेत दिया है जो पलायन करने के लिए मजबूर हैं। उन्हें संक्षेप में चार सक्रिय शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है- स्वागत, सुरक्षा, प्रोत्साहन और समावेश। किन्तु आप्रवासियों एवं शरणार्थियों के रास्ते पर कई बाधायें हैं। ये बाधाएँ जेनोफोबिक (विदेशी लोगों से डर) मानसिकता से उत्पन्न है एवं ख्रीस्तीयता के अनुकूल नहीं है।  

द्वार खोलने के कई तरीके

प्रेरितिक विश्व पत्र के दिशानिर्देश पर ध्यान देते हुए कार्डिनल माईकेल चरनी ने उन लोगों के लिए द्वार खोलने के कई तरीकों को बतलाया है जो मानवीय संकट से भागकर नये पड़ोसी बन गये हैं। वे तरीके हैं वीसा प्राप्ति में सहज उपाय, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वकालत कार्यक्रम, सबसे कमजोर शरणार्थियों के लिए मानवीय कोरिडोर खोलना एवं उचित तथा आवश्यक निवास की सुविधा आदि। व्यक्तिगत सुरक्षा, आवश्यक सेवा एवं न्याय की गारांटी देना भी आवश्यक है। साथ ही साथ, उन्हें आने-जाने की स्वतंत्रता एवं रोजगार, नाबालिगों की सुरक्षा एवं शिक्षा की व्यवस्था आदि प्रदान किया जाना चाहिए।

संयुक्त प्रयास

कार्डिनल ने कहा कि अकेले में उचित समाधान निकाला नहीं जा सकता। "विश्व स्तर पर ध्यान दिया गया प्रयास जरूरी है, उदाहरण के लिए सुरक्षा हेतु वैश्विक समझौता, 2018 में व्यवस्थित एवं नियमित विस्थापन प्रक्रिया, क्योंकि संयुक्त पहल के द्वारा ही प्रत्युत्तर दिया जा सकता है, आप्रवास के लिए वैश्विक कानून (शासन) को जन्म दिया जा सकता है।

संस्कृतियों का मिलन

कार्डिनल चरनी ने अपने चिंतन में गौर किया है कि स्वयं संत पापा फ्राँसिस ने ही विभिन्न संस्कृतियों के मिलन को "उपहार" कहा है जिसको आप्रवासियों से प्राप्त किया जा सकता है। मुलाकात से आपसी समृद्धि बढ़ती है।

उदार एवं मुफ्त

उन्होंने कहा है किन्तु आपसी फायदे के लिए आदान-प्रदान ही सब कुछ नहीं है। हमें दूसरों के प्रति उदार एवं मुफ्त में देने की भावना से प्रेरित होना चाहिए जिसको संत पापा ने एकमात्र तथ्य कहा है जो अपने आप में अच्छे हैं, परिणाम की उम्मीद नहीं करते और बदले में पाने की आशा नहीं करते हैं।

एक संस्कृति जिसका भविष्य है

कार्डिनल चरनी ने कहा है कि "संस्कृति जो स्वतंत्र रूप से दूसरों का स्वागत करती है उसी का भविष्य है।" उन्होंने कहा, "यही हमारा भविष्य है और इसे उन लोगों के लिए बांटा जाना चाहिए जिन्हें इसकी आवश्यकता है, आप्रवासी और शरणार्थियों को भी।" संत पापा अधिक न्यायपूर्ण, मानवीय और भ्रातृत्वपूर्ण विश्व की अपील करते हैं जो प्रेम एवं आपसी समृद्धि पर आधारित हो, संदेह एवं ठंढ़ी उदासीनता पर नहीं।

14 January 2021, 16:45