Vatican News
आध्यात्मिक साधना में भाग लेते प्रतिभागी आध्यात्मिक साधना में भाग लेते प्रतिभागी  (Vatican Media)

आध्यात्मिक साधना में बुलाहट पर चिंतन

अरिच्चा में रोमी कूरिया एवं संत मर्था में संत पापा फ्राँसिस की आध्यात्मिक साधना के दूसरे मनन-चिंतन की विषयवस्तु थी, बुलाहट।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 3 मार्च 2020 (रेई)˸ आध्यात्मिक साधना के संचालक फादर बोभाती ने कहा, "बुलाहट हमेशा एक चुनाव है जो व्यक्ति के हृदय से आता है, न कि सामूहिक निर्धारित है।

बुलाहट एक निर्णयात्मक मुलाकात है जिसमें ईश्वर हमसे बात करते हैं और हम उनके चुनाव को मानने का निर्णय लेते हैं। यह एक नई कहानी की शुरूआत है, एक नया जन्म है जिसमें नये माता-पिता एवं नये भाई-बहन बनते हैं। अतः उस क्षण को याद किया जाना आवश्यक है जिसमें व्यक्ति ईश्वर की आज्ञा मानता और उनकी आवाज सुनता है। यही प्रार्थना का मौलिक अर्थ है।  

जीवन में ईश्वर का बुलावा

फादर बोभाती ने सोमवार के दूसरे प्रवचन में पुनः मूसा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बुलाहट के अर्थ पर चिंतन किया। मूसा एक चरवाहा और एक सेवक था। वह कभी नहीं सोचा था कि अपने ससुर की भेड़ों को चराने वाला, एक दिन इस्राएल के लोगों की देखभाल करेगा। आध्यात्मिक संचालक ने कहा कि कभी-कभी धर्मग्रंथ हमारे सामने बुलाहट की ऐसी कहानी प्रस्तुत करता है जिसमें हम पेशे में बदलाव, भौतिक चीजों से आध्यात्मिक चीजों की ओर झुकाव देखते हैं।

ईश्वर हमेशा लोगों को जीने के उच्च आयाम की खोज करने में मदद देने के लिए प्रयासरत हैं। यह एक उपयुक्त आयाम है जो भाई-बहनों की सेवा करने का आयाम है। ईश्वर हमारे जीवन में, ठोस इतिहास में बुलाते हैं और अपने आप को प्रकट करते हैं।

मूसा की अचेतना  

होरेब पर्वत पर जलती झाड़ी के निकट पहुँचते हुए मूसा नहीं जानता था कि वह कहाँ जा रहा है। उसे इस बात का एहसास नहीं था कि वह पवित्र स्थल के निकट पहुँच रहा है। वह झाड़ी के जलने किन्तु राख नहीं होने का अर्थ नहीं समझता था और प्रकट होने वाली घटना से भी अनभिज्ञ था। फादर बोभाती ने कहा कि बुलाहट के साथ हमेशा ईश्वर की प्रकाशना जुड़ी होती है न कि आत्म-चेतना अथवा आत्म-निर्धारण। मूसा का नाम लेकर ईश्वर उन्हें व्यक्तिगत रूप से बुलाते हैं जिसका उत्तर देते हुए वे कहते हैं, "मैं प्रस्तुत हूँ" तथा चेतना एवं आज्ञापालन के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं।

अनापेक्षित घटना

फादर ने कहा कि ईश्वर का बुलावा व्यक्ति के लिए मानवीय परिस्थिति में आता है जिसमें वह तैयार नहीं होता। यह एक विस्मयकारी घटना है जो अनापेक्षित, एक अनोखी घटना है।  

दाऊद को ईश्वर ने चुना जो कोई सेनापति नहीं बल्कि एक सितार बजाने वाला था। गोलियाथ से उसका लड़ना कल्पना से परे था। उसी तरह येरेमियाह जो एक अनुभवहीन लड़का था उनको राष्ट्रों में भविष्यवाणी करने के लिए चुना गया। अतः विस्मय ईश्वर का चिन्ह है।  

झाड़ी का अर्थ

झाड़ी से ईश्वर की आवाज आती है। इस चिन्ह के बारे बाईबिल स्पष्ट व्याख्या नहीं देता। फादर ने कहा कि झाड़ी को दो तरह से समझा जा सकता है। पहला, झाड़ी मूसा का प्रतीकात्मक चिन्ह है जो एक मनुष्य है, जबकि आग जीवित ईश्वर का प्रतीक है। इन दोनों का मिलन कमजोर और दुर्बल जीव को नष्ट नहीं करता वरन् जीवन शक्ति प्रदान करता है, जिससे मनुष्यों के द्वारा असंभव काम भी संभव हो जाता है। दूसरा, झाड़ी इस्राएली लोगों की पीड़ा का सूचक है जबकि आग मिस्र के क्रूस शासकों के शोषण का प्रतीक है जो शक्तिशाली होने के बावजूद इन कमजोर लोगों को नष्ट नहीं कर सकते क्योंकि ईश्वर उनके साथ हैं।

बुलाहट व्यक्ति के हृदय में उत्पन्न होता है

नये व्यवस्थान में बुलाहट के आध्यात्मिक मूल्य को उन लोगों के लिए दिखलाया जाता है जो प्रभु का अनुसरण करते हैं। संत मत्ती रचित सुसमाचार में येसु अपने शिष्यों से पूछते हैं, तुम क्या कहते हो कि मैं कौन हूँ? इसके द्वारा वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वे कोई नबी नहीं हैं बल्कि ईश्वर के पुत्र मसीह हैं। वे बतलाना चाहते हैं कि यही उपयुक्त समय है एवं प्रतीक्षा या तैयारी करने की आवश्यकता नहीं रह गयी है। पेत्रुस जवाब देता है, "आप मसीह हैं आप जीवन्त ईश्वर के पुत्र हैं।" ऐसा उत्तर कोई साधारण व्यक्ति अपने आप से नहीं दे सकता बल्कि पिता इसे प्रकट करते हैं। यह कोई दल का जवाब नहीं है बल्कि व्यक्तिगत जवाब है। बुलाहट हमेशा एक चुनाव है जो व्यक्ति के हृदय में उत्पन्न होता है न कि कोई सामूहिक निर्णय है।

प्रभु का सच्चा अनुसरण

फादर बाभाती ने प्रवचन के अंत में कहा कि हमें पेत्रुस के समान प्रकाशना मिली है किन्तु हमें प्रभु का अनुसरण करना है। उनके दुःखभोग एवं क्रूस के रास्ते पर भी उनका अनुसरण करना है। उन्होंने पवित्र आत्मा की कृपा के लिए प्रार्थना करने की सलाह दी ताकि वे प्रभु के सच्चे शिष्य बन सकें। उन्होंने उन्हें स्तोत्र 63 पढ़ने का सुझाव दिया, "तेरी सत्य-प्रतिज्ञता प्राणों से भी अधिक प्यारी है। मेरा कण्ठ तेरी स्तुति करता रहे।"

03 March 2020, 16:46