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कार्डिनल मिगुएल आयुसू कार्डिनल मिगुएल आयुसू  

मानवता के घावों को ठीक करने हेतु बुलाये गये हैं,कार्डिनल आयुसू

अंतरधार्मिक वार्ता के लिए बनी परमधर्मपीठीय सम्मेलन द्वारा एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य था एक संवेदनशील और घायल मानवता की सेवा में पारस्परिक एकता को बढ़ाना।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 11 दिसम्बर 2019 (वाटिकन न्यूज) : वाटिकन में मंगलवार को अंतरधार्मिक वार्ता के लिए बनी परमधर्मपीठीय सम्मेलन द्वारा "जख्मी मानवता की सेवा: अंतरजातीय एकजुटता की ओर” विषय पर एक दिवसीय बैठकका आयोजन किया गया। यह बैठक अंतरधार्मिक वार्ता के लिए बनी परमधर्मपीठीय सम्मेलन (पीसीआईडी) और कलीसियाओं के विश्व सम्मेलन (डब्ल्यूसीसी) के बीच दीर्घकालिक मित्रता और सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई।

मंगलवार की बैठक, पीसीआईडी के कार्यालय में हुई। बैठक में धर्मशास्त्रियों, राजनयिकों और ख्रीस्तीय उदार संगठनों के सदस्यों द्वारा गरीबों, जरूरतमंदों और पीड़ितों के साथ रहने और काम करने के अपने अनुभवों के आधार पर कई मुद्दों पर चर्चा की।

अपने शुरूआती संबोधन में, अंतरधार्मिक वार्ता के लिए बनी परमधर्मपीठीय सम्मेलन के अध्यक्ष, कार्डिनल मिगुएल आयुसू ने उपस्थित प्रतिनिधियों को बताया कि इस सत्र ने विभिन्न कलीसियाओं के विशेषज्ञों को "अतरधार्मिक संवाद के दायरे में हमारी आम सेवा के विशिष्ट आयाम को बढ़ाने का अवसर" दिया।

इस बैठक का विषय जनवरी में पीसीआईडी और डब्ल्यूसीसी दोनों द्वारा एक संयुक्त परियोजना के रूप में चुना गया था और कार्डिनल ने उम्मीद जताई कि यह बैठक इस संयुक्त परियोजना पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित और समृद्ध करेगी।

एक सहयोगी संवाद

वेटिकन न्यूज से बात करते हुए, कार्डिनल ने कहा, “संवाद की मांग है, कि सबसे पहले, अपनी पहचान के साथ पूरी तरह से पहचाना जाना और फिर सुनने के माध्यम से खुद को दूसरे के सामने खोलना और इस तरह से अपने आप को फिर से देखने संभावना रहती है। आपके लिए एक सामान्य मंच मिलता है, जो कि समानताओं और असमानताओं से बना है। इन समानताओं के माध्यम से हम आम कार्यों को एक साथ करने की कोशिश करते हैं। हम इसे संवाद कह सकते हैं।”

भरते हुए घाव

इस बैठक के विषय "एक घायल मानवता की सेवा," के बारे में बात करते हुए, कार्डिनल ने कहा कि संत पापा फ्राँसिस ने अपने कार्यकाल के शुरु में ही स्पष्ट रूप से कहा कि कलीसिया को आज जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है, वह है, घावों को भरने और लोकधर्मियों के दिलों को गर्म करने की क्षमता।"

कार्डिनल ने कहा कि कलीसिया को लोगों के पास होने की जरूरत है। कलीसिया को अपने से बाहर निकलना चाहिए।

कार्डिनल आयुसू ने कहा, कि अंतरधार्मिक संवाद के माध्यम से, "हम अपनी मानवता के घावों को ठीक करने के लिए और चंगा करने के लिए बुलाये गये हैं।"

11 December 2019, 16:20