खोज

Vatican News
प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर 

परमधर्मपीठीय बाईबिल आयोग द्वारा मानव के सवाल पर खोज

परमधर्मपीठीय बाईबिल आयोग ने बाईबिल के, उत्पति ग्रंथ से प्रकाशना ग्रंथ तक का, मानवशास्त्रीय दृष्टि पर एक नया व्यवस्थित अध्ययन प्रकाशित किया है। वाटिकन न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में जेस्विट फादर पियेत्रो बोवती ने कहा कि इस पवित्र लेख में हमारे युग के महत्वपूर्ण सवालों पर चिंतन करने हेतु सिद्धांत निहित हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 17 दिसम्बर 2019 (रेई) ˸ परमधर्मपीठीय बाईबिल आयोग द्वारा एक नये अध्ययन से मानवप्राणी की धर्मग्रंथ सम्मत समझ का पता चलता है। किताब का शीर्षक है, "मानव क्या है? बाइबिल मानवविज्ञान का एक यात्रावृतांत", दस्तावेज का लक्ष्य मानव सम्बधित सभी सवालों का उत्तर देना नहीं है बल्कि आत्मपरख के लिए मूलभूत सिद्धांत प्रदान करना।

परमधर्मपीठीय बाईबिल आयोग के सचिव फादर पियत्रो बोवाती येसु समाजी ने वाटिकन न्यूज को दस्तावेज का महत्व बतलाते हुए कहा, "संत पापा चाहते थे कि इस विषय की व्याख्या बाईबिल से शुरू की जाए, जो सभी ख्रीस्तीय चिंतनों की नींव और आत्मा है। मानव क्या है? यह सवाल पूरे बाईबिल को छूता है।

मौलिक सिद्धांत प्रदान करना

बाईबिल द्वारा प्रेरित किये जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए फादर बोवाती ने कहा, "बाईबिल मानव को मानव की सच्चाई के बारे सिखलाता है। इस तरह के बाइबिल धर्मशास्त्र के सिद्धांत द्वारा हर प्रकार के सवालों का उत्तर देने की नहीं बल्कि इतिहास में मनुष्य के आत्मपरख की समझ के लिए "मूलभूत सिद्धांत" देने की कोशिश की गयी है।

आयोग के अध्ययन को 4 अध्यायों में बांटा गया है जिसमें मुख्य विषय हैं; मानव ईश्वर द्वारा सृष्ट, मानव का सृष्टि के अन्य चीजों के साथ संबंध, मानवशास्त्र की संबंधपरक वास्तविकता तथा मानवजाति के लिए ईश्वर की मुक्तिदायी योजना।

आधुनिक सवालों का उत्तर देने में मददगार

मानव प्राणी के बारे खास सवालों के संबंध में फादर बोवाती ने कहा कि आयोग, इन सवालों में बाईबिल के परे जाना नहीं चाहता है। उन्होंने कहा, इसलिए हम उन मुद्दों की व्याख्या करने के लिए सहमत हुए, जो हमारे पास बाईबिल से मिली जानकारी के स्तर का सम्मान करते हैं। इस बात को स्वीकार करते हुए कि हमारी सांस्कृतिक स्थिति, बाईबिल में लिखी स्थिति से बहुत अलग है, हम बाईबिल में समकालीन प्रश्नों का तत्काल एवं ठोस उत्तर नहीं पा सकते। फिर भी बाईबिल में हम चिंतन हेतु उपयोगी संकेत के सिद्धांत पा सकते हैं जो ईशशास्त्रियों, नैतिक शास्त्रियों और याजकों के लिए आधुनिक मुद्दों का जवाब देने हेतु मदद दे सकते हैं।       

एक व्यवस्थित कार्य

फादर बोवाती ने कहा कि आयोग ने अपने कार्य में सभी ख्रीस्तीय परम्पराओं को ध्यान में रखा है किन्तु साथ ही, इस बात को प्राथमिकता से दिखाने की कोशिश की है कि बाईबिल वास्तव में क्या कहता है। उन्होंने कहा कि यह कार्य कभी नहीं किया गया था चूँकि ईशशास्त्री केवल उन लेखों का उद्धरण लेते हैं जो उनके लिए उपयोगी होते हैं। उनके विपरीत हमने व्यवस्थित कार्य करने की कोशिश की है ताकि मानव प्राणी की जटिलताओं के संबंध में बाईबिल क्या कहता है उसके लिए एक रास्ता दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि नया दस्तावेज का कार्य एक बहुत ही मौलिक योगदान है। हमने न केवल कुछ विन्दुओं को स्पष्ट करने का प्रयास किया है किन्तु उसे अधिक परिपक्वता और बाईबिल के कुछ लेखों का जटिल व्याख्यान भी प्रदान किया है। असलियत उसकी व्याख्या में है जिसको ईशशास्त्रियों एवं उन लोगों के लिए प्रदान की गयी है जो विश्वास के प्रचार में भाग लेते हैं। मानव की समझ अधिक जटिल, जैविक और बाईबिल की परम्परा के अनुरूप है।

फादर ने कहा कि मानव की वास्तविकता क्या है इस सवाल का जवाब बाईबिल कुछ संकेतों के माध्यम से देता है जिसको सभी के लिए बिलकुल मौलिक माना जाना चाहिए।

17 December 2019, 17:07