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थायलैण्ड और जापान में सन्त पापा फ्राँसिस की यात्रा का पोस्टर थायलैण्ड और जापान में सन्त पापा फ्राँसिस की यात्रा का पोस्टर   (AFP or licensors)

सन्त पापा फ्राँसिस की एशियाई यात्रा का पदक जारी

थायलैण्ड तथा जापान में 19 से 26 नवम्बर तक निर्धारित सन्त पापा फ्राँसिस की यात्रा का पदक वाटिकन ने जारी कर दिया है। इस पदक पर पवित्र कुँवारी मरियम एवं काथलिक धर्म के शहीदों की तस्वीर चित्रित की गई है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 15 नवम्बर 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): थायलैण्ड तथा जापान में 19 से 26 नवम्बर तक निर्धारित सन्त पापा फ्राँसिस की यात्रा का पदक वाटिकन ने जारी कर दिया है। इस पदक पर पवित्र कुँवारी मरियम एवं काथलिक धर्म के शहीदों की तस्वीर चित्रित की गई है।

माँ मरियम वं शहीद सन्त एशियाई देशों के संरक्षक

गुरुवार को पदक जारी किया गया तथा वाटिकन द्वारा प्रकाशित एक विज्ञप्ति में कहा गया कि कुँवारी मरियम तथा शहीद सन्तों ने ख्रीस्त एवं उनकी कलीसिया के लिये अपना रक्त बहाया। पदक के ऊपरी ओर परमधर्मपीठीय प्रतीक है तथा इसकी दूसरी तरफ थायलैण्ड तथा जापान की कलीसियाओं को माँ मरियम एवं शहीद सन्तों के संरक्षण के सिपुर्द करने का मनोरथ व्यक्त किया गया है।  

पदक के बाईं ओर, स्वर्ग में उठा ली गई मरियम को चित्रित किया गया जबकि दाईं ओर माता मरियम को शिशु येसु को लिये दर्शाया गया है। मरियम दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की संरक्षिका का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्हें उगते सूर्य के बीच से निकलते चित्रित किया गया है। पदक के केंद्र में क्रूस को दर्शाया गया है जिसके ऊपर, एक ताड़ का पत्ता है जो शहीदों का स्मारक है। इस पत्ते पर चित्रित 33 बीज जापान के 26 तथा थायलैण्ड के सात शहीदों का प्रतीक हैं।

सन्त एवं धन्य घोषित काथलिक शहीद

जापान के शहीदों में उन काथलिकों को याद किया गया है जो 05 फरवरी 1597 को नागासाकी में अपने विश्वास के ख़ातिर मार डाले गये थे। इन शहीदों को सन्त पापा अर्बन ने 1627 ई. की 14 सितम्बर को धन्य घोषित किया था तथा 08 जून, 1862 ई. को सन्त पापा पियुस नवम ने सन्त घोषित कर वेदी का सम्मान प्रदान किया था। इनमें यूरोप के छः फ्राँसिसकन मिशनरी, तीन जापानी येसु धर्मसमाजी तथा लोकधर्मी सन्त पौल मिकी एवं उनके साथी शहीद शामिल थे।

थायलैण्ड के सात शहीदों में गकाँग समुदाय की तीन किशोरियाँ, खाना बनानेवाली महिला आगाता, एग्नेस एवं लूसिया नामक दो धर्मबहनें तथा लोकधर्मी फिलिप सिफॉंग शामिल थे। तीस वर्ष पूर्व 22 अक्टूबर, 1989 को सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने इन्हें धन्य घोषित किया था। थायलैण्ड में इनके आदर में निर्मित आराधनालय आज दूर-दूर के काथलिक तीर्थयात्रियों का लक्ष्य बन गया है।  

15 November 2019, 11:39