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संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, महाधर्माध्यक्ष  बेरनादीतो आऊज़ा संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, महाधर्माध्यक्ष बेरनादीतो आऊज़ा 

शांति मिशन पर संयुक्त राष्ट्र में महाधर्माध्यक्ष आऊज़ा

संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के प्रेरितिक प्रतिनिधि तथा स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेरनारदीतो आऊज़ा ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र संघीय आम सभा के 52 वें सत्र में शांति कायम रखने हेतु किये जा रहे कार्यों पर राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के पक्ष को रखा।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर- वाटिकन सिटी

न्यूयॉर्क, शुक्रवार, 15 नवम्बर 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के प्रेरितिक प्रतिनिधि तथा स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेरनारदीतो आऊज़ा ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र संघीय आम सभा के 52 वें सत्र में शांति कायम रखने हेतु किये जा रहे कार्यों पर राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के पक्ष को रखा।

राजनीतिज्ञों का पूर्ण योगदान आवश्यक

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में आयोजित शांति कायम रखने की प्रक्रियाओं में पुलिस कर्मियों, सुरक्षा बलों तथा समुदाय के लोगों का योगदान महान है जो विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में और, विशेष रूप से, युद्ध के उपरान्त शांति बनाये रखने में मदद प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्य में राजनीतिज्ञों का पूर्ण योगदान होना नितान्त आवश्यक है।

सन्त पापा फ्राँसिस के शब्दों को उद्धृत कर उन्होंने कहा, "राजनीति मानव समुदाय और संस्थानों के निर्माण का एक आवश्यक साधन है। स्वस्थ राजनीति शांति की सेवा में होती है। यह मौलिक मानवाधिकारों का सम्मान करती तथा उन्हें बढ़ावा देती है, वह व्यक्तियों की ज़िम्मेदारियों को प्रकाश में लाती तथा वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच विश्वास और परस्पर समझदारी के बंधन को मज़बूत करती है।"

नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता

शांति कायम रखने की कार्रवाइयों में नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर बल देते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि हर अवस्था में नागरिकों को, विशेष रूप से, महिलाओं, बच्चों एवं वयोवृद्धों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिये। साथ ही उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करने की नितान्त आवश्यकता है जो युद्ध के घावों से अभी भी उभर नहीं पाये हैं, जिनके मानवाधिकार छीन लिये गये हैं तथा जो धर्म, जाति अथवा नस्ल के कारण भेदभाव का शिकार बनाये जाते हैं।   

15 November 2019, 11:52