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वाटिकन बैंक: प्रेरितिक कार्य हेतु अधिक निष्ठा की जरुरत

वाटिकन संचार विभाग के संपादकीय अधिकारी, अन्द्रेया तोरनियेल्ली ने धार्मिक कार्यों हेतु संस्था (आईओआर) के संदर्भ में, नौतिकता, कार्यकर्ता, समयपबंदी और बाहरी लेखा परीक्षक की नियुक्ति के नवीनीकरण पर प्रकाश डाला।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमावार, 12 अगस्त 2019 (रेई) अन्द्रेया तोरनियेल्ली ने कहा कि धार्मिक कार्यों हेतु संस्था (आईओआर) का नवीनीकरण की प्रक्रिया अपने में महत्वपूर्ण है जिससे वे अन्तरराष्ट्रीय स्तर के हो सकें।

उन्होंने कहा कि इसका मुख्य संदर्भ वाटिकन बैंक से है जिसे अपने अधिकारी की भूमिका को परिभाषित करने की जरुरत है जिससे धार्मिक कार्यों का सम्पादन उचित रुप में किया जा सके। यह संस्थान के प्रत्येक घटक के साथ संपर्क बनाए रखने, सूचना के प्रसार को सुनिश्चित करने और रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण ईकाई है। वास्तव में, वाटिकन बैंक धर्माधिकारी, संचलकों और कर्मचारियों के साथ निरंतर विचार-विमार्श करते, "उनके काम में नैतिक आयाम को बढ़ावा देते" और "कार्डिनलों के आयोग के संग्रह" को संरक्षित करते हैं। अतीत में जो कुछ भी हुआ उसे लेकर हम प्रीलेट के कार्यालय को खाली नहीं रख सकते हैं।

आईओआर की एक दूसरी खासियत यह है कि यह कालीसिया कानून के मापदंडों के आधार पर संचालित होती है जिसका नवीनीकरण संत पापा बेनेदिक्त 16वें द्वारा शुरू हुई और वित्तीय लेन-देन, पारदर्शिता तथा मनी-लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों का निपटारा संत पापा फ्रांसिस ने पूरा किया।

इस संदर्भ में बैंक कर्मियों पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया जाता है जिससे वे अधीक्षण बोर्ड द्वारा अनुमोदित आचार संहिता का पालन करें। ऐसे स्पष्ट नियम हैं जो कर्मचारियों को दोहरा काम करने पर पबंदी लगाते, उन्हें परामर्श देते  या कंपनी की भागीदारी में संलग्न करते हैं। यहाँ हम संस्थान के साथ उनके संबंध को विशेषकर रोजगार संबंधी स्वरुप में देखते हैं।

तोरनियेल्ली ने कहा कि नवीनीकृत क़ानून प्रबंधन में हम जिम्मेदारियों, नियंत्रण और पर्यवेक्षण की गारंटी को पाते हैं। कार्डिनल और अधीक्षण बोर्ड के सदस्यों को दुबारा पुन: नियुक्त नहीं किया जा सकता है। पिछले नियमों के अनुसार, निदेशक अनिश्चित काल तक अपने पद पर बने रह सकता है जबकि नये नियम के अनुसार 70 वर्ष की आयु में वे सेवानिवृत्त होंगे और उनकी पुनर्नियुक्ति की संभावना नहीं होगी। यद्यपि, उप निदेशक का पद, एक बार अनिवार्य, "संभव" के रूप में वर्णित है।

आईओआर के वर्तमान पांच निकायों को घटाकर चार कर दिया गया है आंतरिक लेखा परीक्षक, जो पहले असीमित नवीकरण के साथ तीन साल का जनादेश रखते थे, अब शामिल नहीं हैं। दूसरी ओर, एक बाहरी लेखा परीक्षक की नियुक्ति, अधीक्षण के प्रस्ताव उपरांत कार्डिनल आयोग द्वारा होगी। बाहरी लेखा परीक्षक का कार्यकाल लगातार तीन वर्षों का होगा, जिसका नवीनीकरण एक बार संभंव है।  

आईओआर की दूसरी नई विशेषता अधीक्षण बोर्ड के सदस्यों की संख्या में वृद्धि है। इसमें पहले पांच सदस्य थे, अब सात होंगे। इस निर्णय के तहत बोर्ड के सदस्यों के लिए अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना आसान होगा, भले ही उन्हें विषयवस्तु के अनुसार सलाहकार समितियों में विभाजित किया गया हो। यदि आवश्यकता पड़ी तो दूरसंचार और दूरभाष की उपयोगिता में बैठक को संभव बनाते हुए बोर्ड के कामों को आसान बनाया जा सकता है। 

12 August 2019, 16:37