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संत इग्नासियुस की प्रासंगिकताः फा. फेदरिको लोम्बार्दी

31 जुलाई को माता कलीसिया लोयोला के संत इग्नासियुस, येसु समाजी पुरोहितों का त्योहार मनाती है। फा. फेदरिको लोम्बार्दी वाटिकन के भूतपूर्व प्रवक्ता ने इस अवसर पर येसु समाज के स्थापक संत इग्नासियुस लोयोला के आदर्शों की चर्चा यूजिनीयो बोन्नाता से की जिसकी महत्ता आज भी दुनिया में व्याप्त है, जो काथलीक कलीसिया के परमाधर्माध्यक्ष संत पापा फ्रांसिस के कार्य प्रणाली में अभिव्यक्त होती है।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

येसु समाजी, संत पापा के संग अपने एक विशेष सामंजस्य का अनुभाव करते हैं क्योंकि धर्मसमाज की स्थापना के शुरू से ही वे उन्हें अपने परमाधिकारी के रुप में देखते हैं। उक्त बातें वाटिकन के पूर्व प्रवक्ता येसु समाजी पुरोहित फेदरिको लोम्बार्दी ने वाटिकन रेडियो को दिये गये अपने साक्षात्कार के दौरान कही, जो वर्तमान में वाटिकन फाउंडेशन जोसेफ रैत्जिंगर-बेनेडिक्ट सोलहवें के अध्यक्ष हैं। उन्होंने अपने साक्षात्कार में येसु समाजियों के संबंध में तीन मुख्य विन्दुओं कलीसियाई प्रेरिताई, आत्म-परीक्षण और धर्मसभा का जिक्र किया जिसके फलस्वरुप वे पवित्र आत्मा की प्रेरणा से अपने जीवन को लोगों की सेवा में जीते हैं। उन्होंने कहा, “येसु समाजी संत इग्नासियुस के आदर्श को, येसु का अनुसरण करते हुए सेवा कार्य में जीने का प्रयास करते हैं। वे लोगों को सुसमाचार के मूल्यों के अनुरूप जीवन संवारने हेतु मदद करते हैं।” फादर लोम्बर्दी ने अपने साक्षात्कार के दौरान येसु समाजियों के प्रेरिताई में समर्पण जैसे कि चीन, भारत और लैटिन अमेरीका जैसे देशों में विश्वास और संस्कृति को सुसंगठित करने हेतु कई विद्यालों और विश्वविद्यालयों की स्थापना पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान परिवेश में दुनिया के कई प्रांतों में प्रवासियों के बीच प्रेरिताई का जिक्र किया।


फा. लोम्बार्दी आज संत इग्नासियुस की प्रासंगिकता क्या है?

हमारे दो आयाम हैं - प्रथम अपनी मदद, अपने लिए प्रेरणा, जो व्यक्तिगत आध्यात्मकिता की खोज से शुरू होती है। आध्यात्मिक साधना की पुस्तिका इग्नासियुस द्वारा विश्व हेतु एक संदेश है, जो हमें ईश्वर की योजना को अपने जीवन में खोजने और देखने में मदद करती है, जो काथलिक कलीसिया से परे भी प्रंशसनीय है। दूसरा जिसे हम धर्मसमाज में ठोस रुप में पाते हैं, वे धर्मसंघी जो एक शरीर का अंग बनकर इसका अनुसरण करते हैं, उनके लिए सेवा एक आदर्श बनता है जहाँ वे दुनिया के किसी भी कोने में, जहाँ उनकी जरुरत है, लोगों की सेवा हेतु भेजे जाते हैं। यह वह सेवा है, जो संत पापा द्वारा निर्देशित होती विशेष कर जहाँ वैश्विक कलीसिया अति जरुरत की स्थिति में है।

अतीत में धर्म समाज के विशिष्ट कार्य क्या-क्या रहे हैंॽ

येसु समाज का कोई निश्चित और विशिष्ट कार्य नहीं रहा है। यद्यपि कलीसिया के इतिहास में निश्चित रूप से येसु समाजी कुछ प्रेरिताई कार्य के प्रति समर्पित थे जैसे चीन, भारत, लैटिन अमेरीका इत्यादि देशों में सुसमाचार का प्रचार करना। इस प्रेरितिक कार्य का स्वरुप आज परिवर्तित हो गया है लेकिन यह आज भी कई रुपों में बना हुआ है। प्रेरितिक कार्य की एक दूसरी विशेषत, जो येसु समाजियों की आध्यात्मिकता और प्रशिक्षण की संस्कृति में प्रकट होती है जो इग्नासियुस और उनके प्रथम साथियों के जीवन का अंग बना, जोकि शिक्षण कार्यों पर जोर देना था। अतः धर्मसमाज की प्रथम सदी में ही हम यूरोप के प्रायः सभी शहरों में स्कूलों और महाविद्लायों को स्थापित होता पाते हैं। आज भी विश्व में कई शिक्षण संस्थान और ख्रीस्तीय विश्वविद्यालय हैं जो उनके द्वारा संचालित किये जाते हैं। वर्तमान समय में धर्मसमाज ने विश्वास पर बल दिया है जो न्याय स्थापित करता है। आज हम प्रवासियों और शरणार्थियों के बीच अपने प्रेरितिक कार्य की अति विशिष्टता को पाते हैं जो धर्मसमाज की आधारशिला की ओर हमें ले चलती है। यह विशेष रूप से एक महत्वपूर्ण आयाम बन गया है जो हमें संत पापा फ्रांसिस के विचारों से संयुक्त करता है जिसकी चर्चा वे सदा करते हैं।


संत पापा फ्रांसिस के परमाध्यक्षीय काल में इग्नासियुस की कौन-सी विशेषत झलकती हैॽ

संत पापा फ्रांसिस एक येसु समाजी हैं, वे यह व्यक्त करते, स्वीकारते और इसे अनुभव करते हैं। वाटिकन रेडियो के भूतपूर्व संचालक फादर फेदरिको लोम्बार्दी ने कहा कि एक येसु समाजी के रुप में मैं उनमें तीन बातों को देखा हूँ जो हमें उनके साथ संयुक्त करता है। पहली बात यह सत्य है कि उन्होंने कलीसिया को सदा ही एक प्रेरितिक कलीसिया की संज्ञा दी है। येसु समाजी अपने में इस बात को अनुभव करते हैं कि वे प्रेरिताई कार्य हेतु, येसु ख्रीस्त द्वारा विश्व के किसी भी कोने, सीमांतों में ईश सेवा के लिए भेजे गये हैं। दूसरा अपने में एक महान आयाम है जो हमें सदैव अपने से परे जाने को कहता है जहां हम इस बात को समझते हैं कि ईश्वर हमें बुलाते और सदैव आगे बढ़ने हेतु निर्देशित करते हैं। संत इग्नसियुस ने सदैव ईश्वर की महत्तर महिमा की बात कही, अर्थात हम अपने में कभी यह विचार नहीं कर करते कि हमने अपने कार्यो को पूरा कर लिया है, अब हम शांति में आराम से बैठकर सुस्ता सकते हैं। संत पापा में यह आयाम कूट-कूट कर भरा हुआ है। येसु समाजियों की तीसरी विशेषता आत्म-परिक्षण है। यह शब्द संत पापा फ्रांसिस के जीवन में देखा जा सकता है जिसके फलस्वरुप वे परिस्थितियों की जटिलता को देख सकते हैं, जो पूरी मानवता और कलीसियाई जीवन में व्याप्त है। वे इस बात की परख कर सकते हैं कि ईश्वर की योजना हमारे लिए क्या है, वे हमें क्यों बुलाते हैं, कलीसिया में हमारी बुलाहट का सार क्या है।


येसु समाज का संबंध संत पापा फ्रांसिस से कैसा हैॽ

एक धर्मसंघ के रुप में येसु समाज का संबंध संत पापा फ्रांसिस के साथ वैसे ही है जैसे की दूसरे संत पापाओं के साथ रहा है, हम उनके अधीन, उनकी सेवा में उपलब्ध हैं। येसु समाज उन्हें अपना परमाधिकारी स्वरुप देखता है। स्वाभाविक रूप से संत पापा फ्रांसिस के साथ यह आध्यात्मिक सद्भाव हो सकता है जो हमें उनके संदेशों के अर्थ को समझने की सुविधा भी प्रदान करता है, स्वयं येसु समाजी होने के नाते, उनका उन लोगों के साथ एक सामान्य संबंध हैं जिन्हें वे जानते हैं और जिनके साथ वे आध्यात्मिक और ऐतिहासिक रूप में निकटता का एहसास करते हैं। लेकिन यह कोई विशेषाधिकार प्राप्त संबंध नहीं है, और न ही कोई येसु समाजी विशेषाधिकार की चाह अपने में रखता है। हम संत पापा की इच्छा अनुसार अपनी सेवा देने की चाह रखते हैं। हमें खुशी है कि संत पापा एक येसु समाजी हैं और उनके नेतृत्व में हम दुनिया को एक उत्तम सेवा दे रहें हैं।
 

01 August 2019, 17:34