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सीरिया का इदलिब क्षेत्र सीरिया का इदलिब क्षेत्र  (AFP or licensors)

संत पापा द्वारा राष्ट्रपति असद से ठोस पहल की अपील, कार्ड.परोलिन

निहत्थे नागरिकों के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई और बमबारी जारी है: इदलिब में दर्जनों स्वास्थ्य सुविधाओं केंद्रों को नष्ट या बंद कर दिया गया है। सीरिया के राष्ट्रपति बशर हाफिज अल-असद को लिखे संत पापा के पत्र को मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठीय विभाग के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने दिया।

मार्ग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 22 जुलाई, 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर हाफिज अल-असद को सीरिया के लोगों के प्रति अपनी चिंताओं और ठोस पहलों की मांग करते हुए पत्र लिखा। 28 जून को लिखे पत्र में उन्होंने नागरिकों के जीवन की रक्षा करने, इदलिब क्षेत्र में मानवीय तबाही को रोकने, विस्थापितों की सुरक्षित वापसी के लिए ठोस पहल, कैदियों की रिहाई और अपने प्रियजनों की जानकारी के लिए परिवारों तक पहुंच, राजनीतिक कैदियों के लिए मानवता की स्थिति को सामने रखा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत और बातचीत की बहाली के लिए नए सिरे से भागीदारी की अपील की।

पत्र की सामग्री और उद्देश्य पर वाटिकन संचार विभाग के संपादकीय निदेशालय के निदेशक अंद्रेया तोर्नेल्ली ने संत पापा के पहले सहयोगी एवं वाटिकन राज्य सचिव पियेत्रो परोलिन का साक्षात्कार किया।

पत्र लिखने का उद्देश्य

संत पापा द्वारा  सीरिया के राष्ट्रपति असद को पत्र लिखने का निर्णय ने के बारे पूछने पर कार्डिनल परोलिन ने कहा कि "इस नई पहल के मूल में, विशेष रूप से इदलिब प्रांत में सीरिया में मानवीय आपातकालीन स्थिति के लिए संत पापा फ्राँसिस और परमधर्मपीठ की चिंता है। क्षेत्र में 30 लाख से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें से 1.3 मिलियन लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हैं। सीरिया में लंबे संघर्ष से मजबूर होकर उस इलाके में शरण लेनी पड़ी, जिसे पिछले साल असैनिक क्षेत्र घोषित किया गया था। हाल ही में सेना के आक्रामक हमले को, पहले से ही चरम पर रहने वाली परिस्थितियों में जोड़ा गया जिससे उन्हें खेतों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा था, उनमें से कई भागने के लिए मजबूर हो गए थे। संत पापा गहन दुःख के साथ इतनी बड़ी आबादी के नाटकीय परिस्थिति से अवगत हैं, विशेषकर उन बच्चों के लिए दुखी हैं जो खूनी लड़ाई में शामिल हैं। दुर्भाग्य से युद्ध जारी है, यह बंद नहीं हुआ है, बमबारी जारी है।

पत्र में लिखे गये मुद्दे

राष्ट्रपति बशर हाफिज अल-असद को भेजे पत्र के मुद्दों के बारे पूछे जाने पर कार्डिनल ने कहा, “संत पापा फ्राँसिस ने नागरिकों के जीवन की रक्षा करने तथा स्कूलों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी मुख्य संरचनाओं को संरक्षित करने की अपनी अपील को नवीनीकृत किया। वास्तव में जो हो रहा है वह अमानवीय है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। संत पापा ने राष्ट्रपति से मानवीय तबाही को रोकने का हर संभव प्रयास करने के लिए कहा है। विशेष रूप से यह, अंतरराष्ट्रीय मानव जाति के अनुपालन में रक्षाहीन आबादी, सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए है।”

राजनीतिक कैदी

एक और नाटकीय मुद्दा राजनीतिक कैदियों का है। संत पापा फ्रांसिस विशेष रूप से राजनीतिक कैदियों की स्थिति के बारे में चिंतित हैं, जिनकी मानवीय स्थितियों को इंकार नहीं किया जा सकता है। मार्च 2018 में, सीरियाई अरब गणराज्य पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग ने इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि दस हज़ार से भी अधिक लोग हैं जिन्हें मनमाने तरीके से हिरासत में रखा गया है। कई बार उन्हें अनौपचारिक जेलों और अज्ञात स्थानों में कथित तौर पर बिना किसी कानूनी सहायता या अपने परिवारों से संपर्क के, विभिन्न प्रकार की यातना दी जाती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्भाग्य से, उनमें से कई जेल में मर जाते हैं, जबकि अन्य को उसी हाल में जीना पड़ता है।

कूटनीति और वार्ता

संत पापा द्वारा फिर से लिये गये इस नये पहल के उद्देश्य के बारे में पूछे जाने पर कार्डिनल परोलिन ने कहा, "परमधर्मपीठ ने हमेशा संघर्ष को समाप्त करने और पक्षपातपूर्ण हितों पर काबू पाने के लिए एक व्यवहार्य राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहायता द्वारा कूटनीति और वार्ता के साथ किया जाना चाहिए। जैसा कि संत पापा ने कई बार कहा है कि हमें इस बात को सीखना चाहिए कि युद्ध से युद्ध समाप्त नहीं होता तथा हिंसा से हिंसा और बढ़ती है। यही बात उन्होंने इस पत्र में भी दोहराया है। दुर्भाग्य से हम संकट के लिए राजनीतिक समाधान, विशेष रूप से जिनेवा की वार्ता प्रक्रिया को रोकने के बारे में चिंतित हैं।

22 July 2019, 15:56