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 बेनेडिक्टाइन मठाधीस बर्नार्डो उपदेश देते हुए बेनेडिक्टाइन मठाधीस बर्नार्डो उपदेश देते हुए  (Vatican Media)

आध्यात्मिक साधना का चौथा प्रवचन : उदासीनता को उखाड़ फेकें

संत पापा फ्राँसिस और उनके सहयोगी अरिच्चा के डिवाइन मास्टर हाऊस में आध्यात्मिक साधना कर रहे हैं, जो 10 मार्च शाम को शुरु हुआ और 15 मार्च तक चलेगा।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

अरिच्चा, बुधवार 13 मार्च 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस और रोमी कार्यालय के सभी अधिकारी एक सप्ताह की आध्यात्मिक साधना में हैं। आध्यात्मिक साधना के तीसरे दिन 12 मार्च को प्रथम प्रवचन का विषय थाः हमारे शहरों से उदासीनता और बीमारियों को खत्म करना और उनकी सुंदरता बनाये रखना।

उपदेशक बेनेडिक्टाइन मठाधीस बर्नार्डो फ्रांसेस्को मारिया जॉन्नी ने, उदासीनता को उखाड़ने की आवश्यकता पर विचार किया, जो हमें ईश्वर के प्यार को ग्रहण करने और बदले में उसे प्यार करने के संतुलन को बनाये रखने के क्रम में दूसरों के प्रति हमारी जिम्मेदारी से अलग कर देता है।

"आज की कमजोरी, अपमान और उदासीनता" विषय पर मनन-चिंतन करते हुए, मठाधीश ने कहा कि हम उन शहरों के घावों को देखने के लिए बुलाये गये हैं जो बहुत ही पेचीदा और सभी प्रकार के अन्याय से चिह्नित हैं। ऐसा करने के लिए, जैसा कि संत पापा फ्राँसिस कहते हैं, हमें वास्तविकता को अवधारणा पर हावी होने देना चाहिए, इसके विपरीत नहीं।

उदासीनता

उपदेशक ने उदासीनता के बारे में कहा कि यह बुराई के तीन लक्षणों में से एक है जो अक्सर हमारे दिलों को सूक्ष्म तरीके से पंगु बना देता है और आंखों को धुंधला कर देता है। उदासीनता, एक ढ़ाल के रूप में कार्य करता है, हमें दूसरों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से रोकता है। यह उस सुसमाचारी जुनून के खिलाफ है जिसे प्रभु हमारे दिलों में पवित्र आत्मा की शक्ति से प्रज्वलित करना चाहते हैं।

मठाधीश ने कहा कि कलीसिया और भले लोग जब येसु का सुसमाचार सुनते हैं और उनकी आज्ञाओं का पालन करते हैं तो उनके सभी कार्य फलदायी होते हैं। वर्तमान समय की पवित्रता, वास्तव में वे अंगारे हैं जो हमारे विश्व के शहरों की रात में आशा की रोशनी को जगमग कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उदासीनता का प्रलोभन, जो कलीसिया के लोगों को भी प्रभावित करता है, हर कीमत पर हमारे शहरों में ईश्वर के वचन को लाने से दूर हो सकता है।

सौंदर्य और अनुपात

इसके लिए, उपदेशक ने दवाओं के सौंदर्य और अनुपात का प्रस्ताव दिया। व्यक्ति और खुद के बीच तथा व्य़क्ति और चीजों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। इसका अर्थ है खुद को केंद्र में रखने के हमारे भ्रम का त्याग करना और वास्तविकता देखने हेतु अपनी आँखें खोलना तथा शांत होकर मौन में सच्चाई को सुनना।

मठाधीश ने कहा कि मसीह इतिहास और अंतरिक्ष के केंद्र हैं हम नहीं।  हमें स्वयं को उनसे जोड़ना चाहिए और यह पिता ईश्वर को खुशी देता है। एक अच्छे चालीसा यात्रा का परिणाम, ईश्वर के हाथों हमारी सुंदरता को बहाल करने देना है, हम तो निरे मिट्टी, नाजुक और बेचारे हैं, हमें ईश्वरीय आत्मा की जरूरत है। यदि हम अपने आप को पूरी तरह से ईश्वर को सौंपते हैं, तो हम उनके आदर्श कलाकृति बन जाएंगे।

13 March 2019, 16:37