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आध्यात्मिक साधना में प्रवचन सुनते संत पापा एवं वाटिकन कर्मचारी आध्यात्मिक साधना में प्रवचन सुनते संत पापा एवं वाटिकन कर्मचारी  (Vatican Media)

शहरें - मन-परिवर्तन, शांति और मुलाकात का स्थल बनें

संत पापा फ्राँसिस एवं परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के कर्मचारियों की आध्यात्मिक साधना सोमवार को अर्रिचा में शुरू हुई। दूसरे प्रवचन में उन्होंने सुना कि शहरों को अपनी बुलाहट को समझने के लिए पृथ्वी पर स्वर्गीय येरूसालेम पर चिंतन करना चाहिए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा एवं उनके 65 सहयोगी मार्च 10-15 तक, रोम के निकट अर्रिचा के "दिव्य स्वामी आश्रम" में आध्यात्मिक साधना में भाग ले रहे हैं, जिन्होंने प्रवचन में सुना कि हमारे शहरों को शांति, भाईचारा एवं आतिथ्य का स्थान होना चाहिए।  

पृथ्वी पर स्वर्गीय येरूसालेम

आध्यात्मिक साधना के संचालक इताली बेनेडिक्टाईन मठवासी फादर बेर्नार्दो फ्रंचेस्को मरिया जान्नी ने प्रवचन में आध्यात्मिक साधना के प्रतिभागियों का ध्यान इटली के फ्लोरेंस शहर के महापौर जोर्जो ला पिरा की ओर आकृष्ट कराया, जो ईश्वर की योजना पर विश्वास करते थे कि पृथ्वी पर स्वर्गीय येरूसालेम की स्थापना संभव है।  

फादर जान्नी ने बतलाया कि यहाँ ला पिरा के शहर फ्रोरेंस ही नहीं बल्कि विश्व के सभी शहर इस बात को समझ गये हैं कि सामंजस्य, शांति और मुलाकात के लिए जगह, ऐसी दुनिया के विपरीत है जिसमें अक्सर निराशा, इस्तीफा एवं अंधेरा की निंदा की जाती है।

बेनेडिक्टाईन मठवासी ने "विश्वव्यापी रहस्य" के बारे बतलाया कि यह हरेक शहर को इसकी सच्ची बुलाहट को खोजने तथा स्वर्गीय येरूसालेम पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है जहाँ लोग एकजुट, प्रबल इच्छाओं द्वारा प्रेरित एवं महान आशा के साथ जीते हैं।

उन्होंने समझाया कि एक तर्कहीन, भ्रमित और अर्थहीन झुकावों से दूर, यह सपना इतना ठोस है कि यह ईश्वर की कार्रवाई के लिए क्षितिज खोलते हैं। ला पिरा ने लिखा था कि शहर का दौरा करने एवं उसके नवीनीकरण के बाद, यह नागरिकों, राजनीति, तकनीक एवं आर्थिक संरचना की अच्छाई के लिए आधारभूत बन जाता है।  

यह विश्वास का चिंतनशील दृष्टिकोण है जो ख्रीस्त के इतिहास को ईश्वर के शहर के सौहार्द, सुन्दरता एवं वैभव को तोड़ने के हर प्रयास के बावजूद विश्व में लागू करने की कोशिश करता है।  

खमीर की तरह परिवर्तन

जोर्जो ला पिरा तथा इताली कवि मरियो लुजी की याद कर आध्यात्मिक साधना के संचालक ने कहा कि यह असाधारण स्वप्न न केवल नागरिक ढांचे में शामिल होने का निमंत्रण देता बल्कि कलीसिया के कार्यों को भी प्राथमिकता देने हेतु प्रेरित करता है ताकि सभी लोगों के लिए ईश्वर की योजना पूरी हो सके और उसे साकार रूप दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि ईश्वर की योजना की सराहना विगत शताब्दियों में की जा चुकी है और इसकी सराहना भविष्य में भी की जायेगी। यह पवित्र आत्मा के कार्य हैं जो कभी दूर, अप्रभावी अथवा निष्क्रिय नहीं होते किन्तु लोगों के जीवन में खमीर की तरह कार्य करते हैं।

मठवासी जान्नी ने कहा कि हमें पवित्र आत्मा का साक्ष्य देना है क्योंकि केवल उसके प्रेम की ज्वाला ही दुनिया की विनाशकारी आग को बुझा सकती है। प्रार्थना, विकास, सुन्दरता, कार्य एवं शांति को एक ठोस कार्य के रूप में साक्ष्य देने के द्वारा तथा ईश्वर पर भरोसा रखने, प्रेमपूर्ण व्यवहार करने आदि के द्वारा ही युद्ध और विनाश से शहरों की रक्षा की जा सकती है जो एक विश्वव्यापी मिशन है।

विश्वास की नजर

प्रवचन के अंत में, आध्यात्मिक संचालक ने कहा कि शहर को विश्वास की आँख से निहारने की आवश्यकता है जिसके द्वारा ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है जो घरों, सड़कों एवं प्रांगण में उपस्थित रहते हैं। ईश्वर नागरिकों के बीच रहते, एकात्मता, भाईचारा, अच्छाई, सच्चाई और न्याय को बढ़ावा देते हैं वे उन लोगों से अपने आपको नहीं छिपाते हैं जो सच्चे हृदय से उनकी खोज करते हैं।

12 March 2019, 16:21