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आध्यात्मिक साधना में भाग लेते संत पापा एवं उनके सहयोगी आध्यात्मिक साधना में भाग लेते संत पापा एवं उनके सहयोगी  (ANSA)

आतिथ्य सात्कार दया का एक महत्वपूर्ण कार्य, आध्यात्मिक संचालक

आध्यात्मिक साधना के संचालक ने येरूसालेम की भव्यता पर चिंतन जारी रखते हुए नबी इसायस के ग्रंथ के 62 अध्याय पर ध्यान आकृष्ट किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रोम, बृहस्पतिवार, 14 मार्च 19 (रेई)˸ अरिच्चा के "दिव्य स्वामी आश्रम" में संत पापा फ्राँसिस एवं परमाध्यक्षीय रोमी कार्यालय के कर्मचारियों की आध्यात्मिक के पाँचवें दिन, आध्यात्मिक साधना के संचालक फादर फ्राँचेस्को मरिया जान्नी ने "शांति एवं मित्रता के उनके ध्वज" तथा "आतिथ्य सात्कार" पर चिंतन केंद्रित किया।  

आध्यात्मिक साधना के संचालक ने येरूसालेम की भव्यता पर चिंतन जारी रखते हुए नबी इसायस के ग्रंथ के 62 अध्याय पर ध्यान आकृष्ट किया।  

शहर के खुले द्वार

नबी इसायस कहते हैं, "नगर के फाटक के बाहर निकलो, प्रजा का मार्ग तैयार करो। राजमार्ग का पुननिर्माण करो, पक्की सड़क बनाओ और झण्डा फहरा कर राष्ट्रों को सूचना दो।"

फादर ने कहा कि खुले द्वार की छवि अति सुन्दर है जिसमें पूरी मानव जाति प्रवेश कर सकती है तथा ईश्वर की महान प्रतिज्ञा का अनुभव कर सकती जो वास्तविकता में बदल जायेगा। प्रभु के करीब आने एवं उनके वचनों पर चलने वाले लोगों का भविष्य प्रकाशमान, प्रेम, शांति एवं न्याय से पूर्ण हो जाएगा।  

रॉबर्ट मनचिनी अपने एक लेख में लिखते हैं, "दीवाल उन लोगों को कैद कर लेता है जो उसका निर्माण करते हैं।" फादर जान्नी ने कहा कि जॉर्ज ला पीरा नबी इसायस के पद "झण्डा फहरा कर राष्ट्रों को सूचना दो" को अच्छी तरह समझते थे। यह सभी मानव जाति के लिए आशा का झण्डा है। ला पीरा के इसी स्वपन के कारण फ्लोरेंस शहर विश्व हेतु आकर्षण का केंद्र बन गया, जो प्रत्येक मनुष्य की स्थिति की गरिमा के एक उच्च और प्रामाणिक रूप से सुसमाचार प्रचार के उपाय का स्मरण दिलाता है।

हरेक शहर शांति और आशा के संदेश को नवीकृत करने का स्थल

फ्लोरेंस के महापौर ला पीरा के लिए यह आवश्यक था कि वह शहर को शांति और आशा के नवीकृत संदेश के रूप में दूसरों के लिए छोड़े। उसे शांति की आशा, नागरिक आशा, ईश्वर की आशा एवं लोगों की आशा में बदले।

संत पापा चेतावनी देते हैं कि हम तृतीया विश्व युद्ध को आंशिक रूप से महसूस कर रहे हैं जो विश्व के कई हिस्सों में चल रहा है। ऐसे समय में फ्लोरेंस के महापौर हमें प्रेरित कर रहे हैं कि हम शहरों को शांति एवं आशा के संदेश के साथ स्वागत का स्थान बनायें। ला पीरा ने एक राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी सेवा प्रदान की किन्तु कलीसिया ही महापौरों को सहयोग दे सकती है और उनके सामने इसका प्रस्ताव रख सकती है, क्योंकि इसायस नबी सभी राष्ट्रों में येरूसालेम शहर की परिकल्पना करते हैं।

शांति मिशन के लिए प्रार्थना

ला पीरा जानते थे कि प्रार्थना एवं चिंतन के द्वारा फ्लोरेंस का नवीनीकरण होगा तथा वहाँ शांति और न्याय का राज्य फैलेगा। वहाँ के एकांत मठवासियों एवं संतों के रहस्यात्मक मूल के बिना इस शहर में चिंतन एवं धार्मिक सुन्दरता नहीं आ पाती।  

आज हमारे लिए आह्वान है कि हम किस तरह पूरे विश्व में शांति की कामना कर सकते हैं जबकि एकता की भावना न लायें, जैसा कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय हमें स्मरण दिलाते हैं कि हम अपने कलीसियाई समुदायों में सौहार्द, एकता, भाईचारा एवं शांति के महत्वपूर्ण वरदानों को बनाये रखें, अतः कलीसिया को इस दृष्टिकोण से खमीर के समान कार्य करना होगा।

फादर जान्नी ने संत पापा फ्राँसिस द्वारा मोनसिन्योर विनचेंसो पालिया को लिखे पत्र की याद दिलाते हुए कहा, ख्रीस्तानुयायी, जो लोगों के दुःखों को समझते हैं उन्हें उन भावनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना चाहिए जो विभाजन, उदासीनता एवं विद्रोह लाते हैं।

येसु के मनोभाव को धारण करना

आध्यात्मिक संचालक ने सुसमाचार में निहित ख्रीस्त के मनोभाव को धारण करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा, "आत्मा एवं सच्चाई में ईश्वर की पूजा मनुष्यों में ख्रीस्तीय धर्म की नई सरहद को प्रस्तुत करेगा।"

इस तरह शरीर और आत्मा के सभी संघर्षों के द्वारा नई सृष्टि में प्रेम एवं मुक्ति के सच्चे चमत्कार को हम पुनरूत्थान में महसूस करेंगे। प्रभु हमें इन चमत्कारों में बढ़ने की कृपा दे ताकि हम प्रभु के प्रेम के मनोभाव को धारण कर सकें, जिसके लिए उन्हें क्रूसित होना पड़ा, ताकि हम उनके पास्का में सहभागी हो सकेंगे और पवित्र आत्मा को ग्रहण कर सकेंगे, जिसके द्वारा पिता हमें पूर्ण जीवन प्रदान करना चाहते हैं। यही कलीसिया की आशा है।  

14 March 2019, 17:30