उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी
संत पापा फ्राँसिस एवं परमाध्यक्षीय रोमी कार्यालय के कर्मचारियों ने 10-15 मार्च तक रोम के निकट अरिच्चा स्थित दिव्य स्वामी आश्रम में एक आध्यात्मिक साधना में भाग लिया, जिसकी अगुवाई फादर बेर्नार्दो ने की।
संत पापा ने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा, "भाई बेर्नार्दो, इन दिनों की आपकी मदद के लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ।"
उन्होंने कहा कि फादर बेर्नार्दो के कार्य से वे अत्यन्त प्रभावित हुए जिसने उन्हें यह समझने में मदद दिया कि ईश्वर मानव में हमेशा उपस्थित रहते हैं। यह कार्य आध्यात्मिक साधना में भाग लेने वालों को अपने अंदर प्रवेश करने में उसी तरह मदद किया जिस तरह शब्द ने मानव रूप धारण किया। संत पापा ने कहा कि निसंदेह यह कार्य सबसे पहले ईश्वर का था।
आगे बढ़ना
आध्यात्मिक साधना के उपरांत संत पापा एवं उनके सहयोगियों ने महसूस किया कि अब उन्हें इसी रास्ते पर आगे बढ़ना है। संत पापा ने आध्यात्मिक साधना के दौरान आशा, कार्य एवं धैर्य पर चिंतन हेतु फादर बेर्नार्दो को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ये ऐसे सदगुण हैं जो भविष्य में भी स्मृति को बनाये रखते हैं, स्मृति जो हमें सदा आगे ले चलती है।
साहस के साथ बढ़ना
संत पापा ने वक्तव्य के अंत में कहा कि उन्होंने फादर बेर्नार्दो में उसी साहस को देखा जो साहस उन्होंने "गौदियुम एत स्पेस" पर हस्ताक्षर करने वाले धर्माचार्यों में देखा था।" गौदियुम एत स्पेस आधुनिक विश्व में कलीसिया पर संत पापा पौल षष्ठम द्वारा प्रकाशित विश्व पत्र है जो आज के युग में ख्रीस्त के अनुयायियों के आनन्द, उनकी आशा एवं चिंताओं पर प्रकाश डालता है, खासकर, गरीबों पर।
संत पापा ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने प्रथम प्रवचन सुना तो भटका हुआ महसूस किया था किन्तु बाद में उन्होंने उनके संदेश को समझ लिया।
फादर बेर्नार्दो फ्राँचेस्को मारिया जान्नी, फ्लोरेंस के संत मिनियातो अल मोंते के मठवासी हैं।