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बम्बिनो जेसु अस्पताल के दौरे पर संत पापा फ्राँसिस बम्बिनो जेसु अस्पताल के दौरे पर संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

150 साल के बम्बिनो जेसु अस्पताल : दान और विज्ञान की कहानी

19 मार्च 1869 को रोम में, ताइबर नदी के किनारे स्थित विया देल्ला ज़ोकोलेत्ते के एक छोटे से कमरे में, चार बीमार बच्चियों की सेवा में शुरु किया गया स्वास्थ्य केंन्द्र 150 वर्षों के अंतराल में संत पापा का यह अस्पताल अपनी व्यावसायिकता, गुणवत्ता और मानव के प्रति प्यार एवं सेवा से दुनिया में उत्कृष्टता का एक स्तंभ बन गया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार 19 मार्च 2019 (रेई) :  आज इटली का सबसे पुराना ‘बम्बिनो जेसु’ बाल चिकित्सा अस्पताल अपनी नींव का 150 वां वर्षगांठ मना रहा है। इन वर्षों के दौरान अस्पताल अपनी व्यावसायिकता और मानव के प्रति प्यार एवं सेवा से दुनिया में उत्कृष्टता का एक स्तंभ बन गया है।

अस्पताल की शुरुआत

19 मार्च 1869 को रोम में, ताइबर नदी के किनारे स्थित विया देल्ला ज़ोकोलेत्ते के एक छोटे से कमरे में,  चार बीमार बच्चियों को दो डॉक्टरों और संत विंसेंट डी पॉल की दया की पुत्रियों के धर्मबहनों की देखभाल में सौंपा गया था। इस प्रकार अस्पताल का पहला पक्ष शुरु हुआ - आज बाल चिकित्सालय देखभाल की गुणवत्ता और जटिलता में उत्कृष्टता का केंद्र है। संत पापा पियुस नवें  की अनुमति द्वारा इस अस्पताल का नाम ‘बम्बिनो जेसु’ रखा गया। अस्पताल के ऐतिहासिक संग्रह में संरक्षित दस्तावेज़ पर संत पापा पियुस नवें ने लिखा था, "ईश्वर अच्छी सोच को आशीर्वाद देते हैं, इसे मजबूत और परिपूर्ण करते हैं”। रोम शहर के लिए 150 साल पहले यह एक क्रांति थी क्योंकि, इटली के बाकी हिस्सों की तरह, छोटे बीमार बच्चे अक्सर विशेष ध्यान के बिना अस्पताल में भर्ती होते थे और वयस्कों के साथ खुद को गलियारे में पाते थे।

सबसे ज्यादा जरूरतमंदों के लिए दान और प्यार

इसकी शुरुआत ड्यूस सालवी परिवार के अरबेला और एलेसांड्रो की उदारता से हुआ। उन्होंने अपनी माँ के उस सपने को पूरा करने के लिए बचत करना करना शुरू कर दिया। उनकी माँ का सपना था कि वो रोम के गरीब बच्चों के लिए एक अस्पताल खोले। कम से कम बीस वर्षों तक खुद के रुपये बचाये और रोम की पल्लियों से धन इकट्ठा किये गये। कई ऐतिहासिक घटनाएं जरूरतमंदों के लिए जुनून और प्यार के साथ परस्पर जुड़ी हुई हैं। 1869 में चार बिस्तरों से शुरु किया गया छोटा अस्पताल, 20वीं शताब्दी की शुरुआत में, जनीकोलो में बड़े अस्पताल में परिवर्तित हो गया, जहाँ 900 से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था की गई। सावोनी की रानी एलेना ने उसी अस्पताल में हड्डी तपेदिक से पीड़ित बच्चों के लिए एक विभाग को खोलने में आर्थिक मदद की।

संत पापा और अस्पताल

सन् 1924 ई के बाद से अस्पताल के इतिहास में संत पापा भी जुड़े। अस्पताल के भविष्य और उनके सपने को स्थिरता देने के उद्देश्य से सालवी परिवार ने संत पापा पियुस ग्यारहवें को दान दिया और उस क्षण से यह "संत पापा का अस्पताल" बन गया।

संत पापा जॉन तेईसवें, संत पापा पॉल छठे, संत पापा जॉन पॉल द्वितीय, संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें और संत पापा फ्रांसिस ने समय-समय पर अस्पताल का दौरा किया। एक अनुसंधान केंद्र के रूप में अस्पताल का विस्तार होता गया। सन् 1978 ई. में पालिडोरो का अस्पताल पोलियो और लकवा के मामलों में एक विशेष प्रारंभिक सहायता के साथ शुरु किया गया। 2012 से संत पाओलो फोरी देल मूरा के अस्पताल को एक वैज्ञानिक और उपचार संस्थान (आइआरसीसीएस) के रूप में मान्यता प्राप्त हुई, इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संयुक्त आयोग ने उच्च वैज्ञानिक मानकों की गारंटी ली।

अस्पताल की निदेशिका मरीला 

बम्बिनो जेसु अस्पताल की निदेशिका श्रीमति मरीला एनोक ने 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर  वाटिकन न्यूज को बताया कि यह अस्पताल केवल "दूसरों के लिए एक उपहार के रुप में" कार्य करता है "अस्पताल का धन ज्ञान है" हम अस्पतालों का निर्माण करने के लिए दुनिया में नहीं जाते हैं, हम एक एनजीओ नहीं हैं। हाँ, मध्य अफ्रीका में बांगुई का बाल अस्पताल एक अपवाद है संत पापा फ्राँसिस के कहने पर इसका निर्माण किया गया। लेकिन हम सबसे दूर के स्थानों में प्रशिक्षण और परियोजनाओं में सहयोग करते हैं।”

19 March 2019, 16:12