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दुराचार की बुराई को नाम देने का साहस

कलीसिया में नाबालिगों की सुरक्षा विषय पर चार दिवसीय शीर्ष बैठक संत पापा फ्राँसिस के संबोधन के साथ संपन्न हुई। लेकिन अधिक प्रभावी ढंग से घटना का मुकाबला करने का काम कभी भी समाप्त नहीं होता।

माग्रेट सुनिता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 25 फरवरी 2019 (वाटिकन न्यूज): “इन कृत्यों के पीछे शैतान है।”  संत पापा फ्राँसिस ने नाबालिगों की सुरक्षा पर हो रहे शीर्ष बैठक में अपने समापन भाषण के दौरान इस वाक्य को स्वतः जोड़ा। साला रेजिया में पवित्र मिस्सा समारोह के अंत में संत पापा फ्राँसिस ने इस घृणित घटना के बारे में बड़े साहस और यथार्थवादी तरीके से अपने विचारों को प्रकट किया।

उन्होंने कहा,“इन दुखद घटनाओं में मैं शैतान का हाथ देखता हूँ जो छोटे बच्चों की मासूमियत को भी नहीं छोड़ता है। यह मुझे उस हेरोद की याद दिलाता है जिसने अपने मान और सम्मान को खोने के डर से बेथलेहेम के सभी बच्चों की हत्या करायी थी। संत पापा ने पहले भी विमान यात्रा में पत्रकारों के साथ हुए प्रेस कॉन्फ्रेस में दुराचार को “ब्लैक मास” से तुलना की थी और इसलिए, “इसके पीछे शैतान है,”  बुराई का हाथ है। इसे पहचानने का मतलब सभी स्पष्टीकरणों को भूलना या व्यक्तियों की व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी को कम करना नहीं है। इसका मतलब है कि इसे और अधिक गहन संदर्भ में लेना।

अपने संबोधन में संत पापा ने न सिर्फ कलीसिया में अपितु पूरी दुनिया में हो रहे दुराचार के बारे में कहा। यह एक पिता और एक पुरोहित की चिंता को प्रकट करने के लिए था, जो कलीसिया में घटी दुर्व्यवहार की गंभीरता को कभी भी कम नहीं करता है, क्योंकि घटना की घिनौनी अमानवीयता कलीसिया में और भी अधिक गंभीर और निंदनीय बन जाती है। माता-पिता जिन्होंने अपनी बेटियों और बेटों को पुरोहितों को सौंपा था ताकि उन्हें अच्छी शिक्षा और विश्वास में मजबूत करा सकें पर वे अपने बच्चों के शरीर और आत्मा को स्थायी रूप से घायल पाते हैं। संत पापा ने कहा “वास्तव में, लोगों का गुस्सा उचित है और उनके गुस्से में कलीसिया ईश्वर के क्रोध का प्रतिबिंब देखती है, इन धोखेबाज अभिषिक्त लोगों द्वारा कलीसिया अपमानित होती है।”

यौन पीड़ितों का मौन क्रंदन, अभिषिक्त लोगों द्वारा नष्ट किए गए जीवन का असाध्य नाटक, भ्रष्ट और तर्कहीन नरभक्षी में बदल गया। संत पापा की बातें धर्मसभा हॉल में इतने जोर से गूंज गयी कि इसने धर्माध्यक्षों और धर्मसंघ के वरिष्ठ अधिकारियों के दिलों को बेध दिया। इसने औचित्य, न्यायिक विस्तार, तकनीकी चर्चाओं के रुखेपन, आंकड़ों में शरण लेने की इच्छा को पीछे छोड़ दिया है। घटना की पूर्ण गंभीरता विश्वव्यापी कलीसिया के विवेक का हिस्सा बन गई है, जैसा कि पहले कभी नहीं हुआ था।

अंत में संत पापा ने अपने समापन संबोधन में बहुत सारे पुरोहितों और धर्मसंघियों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने सुसमाचार की घोषणा में अपना जीवन समर्पित कर दिया; छोटे और मासूम बच्चों की शिक्षा और उनकी रक्षा करने के लिए, येसु का अनुसरण किया है। पर कुछ पुरोहितों और धर्मसंघियों के पापों के चलते पूरे याजक वर्ग की प्रेरिताई और सेवा पर संदेह और कलंक का धब्बा लगा है। बुराई पर गौर करते हुए हम निश्चय ही अच्छाई को नहीं भूल सकते। हमें यह जानने की जरूरत है कि उदाहरण के तौर पर किसे देखना है और किसे अपना आदर्श बनाना है।

संत पापा ने उन विश्वासियों को भी धन्यवाद दिया तो अपने पुरोहितों की भलाई के बारे में अच्छी तरह जानते हैं और जो उनके लिए प्रार्थना करते और उनका हर संभव समर्थन करते हैं।

25 February 2019, 16:32