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नाबालिगों के संरक्षण के लिए बैठक में पहली महिला वक्ता, डॉं लिंडा घिसोनी नाबालिगों के संरक्षण के लिए बैठक में पहली महिला वक्ता, डॉं लिंडा घिसोनी   (Santiago Perez de Camino)

नाबालिगों की सुरक्षा: जवाबदेही “सहभागिता” पर आधारित होनी चाहिए

नाबालिगों के संरक्षण के लिए बैठक में पहली महिला वक्ता, डॉं लिंडा घिसोनी ने बच्चों के यौन शोषण के विश्वव्यापी संकट का सामना करने के लिए कलीसिया के सभी पहलुओं के महत्व के बारे में बात की।

माग्रेट सुनिता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 23 फरवरी 2019 (वाटिकन न्यूज): लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए गठित परधर्मपीठीय विभाग की उपसचिव डॉ लिंडा घिसोनी ने अपने संबोधन में कहा, “मेरा मानना है कि सक्रिय रुप से एक दूसरे को सुनते हुए, हम खुद को काम करने के लिए प्रतिबद्ध करते हैं ताकि भविष्य में हमें इस बैठक जैसे किसी अन्य संकट-विमोचन की आवश्यकता न हो: जिससे कि कलीसिया और ईश्वर के लोग पूरी जिम्मेदारी, सक्षमता और प्यार से देखभाल कर सकते हैं जो लोग यौन शोषण से प्रभावित हुए हैं। ताकि रोकथाम एक आदर्श योजना के रूप में समाप्त न हो लेकिन एक सामान्य प्रेरितिक मनोभाव बन सके।”  

डॉ घिसोनी का भाषण दिन 2 विषय “जवाबदेही”  पर केंद्रित था। अपने भाषण के पहले भाग में, घिसोनी ने जवाबदेही के लिए मौलिक शुरुआती बिंदु के रूप में "दुरुपयोग का ज्ञान और दुरुपयोग की सीमा" के बारे में चर्चा की थी। हालाँकि, जवाबदेही में शामिल निर्णयों से संबंधित एक संवाद भी शामिल होना चाहिए, जिसमें कलीसिया के नेताओं के निर्णयों का "मूल्यांकन और रिपोर्टिंग" भी शामिल है। उसने कहा कि कलीसिया में जवाबदेही, समाजशास्त्रीय मानदंडों का सवाल नहीं है, लेकिन धर्मशास्त्रीय अवधारणा में सहभागिता है।

धर्मशास्त्रीय प्रश्न

उन्होंने आगे कहा कि यह कई धार्मिक प्रश्नों की ओर ले जाती है, कलीसिया के प्रत्येक सदस्य की भूमिकाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें उनके विभिन्न परिस्थितियों और जीवन की स्थितियों के अनुसार, उनके बपतिस्मा संबंधी अधिकारों और जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहिए। उसने अभिषिक्त प्रेरिताई एक सही समझ और विशेष रूप से धर्माध्यक्षों और पुरोहितों के बीच संबंध के महत्व का उल्लेख किया।

सहभागिता के रूप में कलीसिया का प्रेरितिक कार्य द्वितीय वाटिकन महासभा के शिक्षण में निहित है। इसका तात्पर्य विभिन्न कारिस्मा और मंत्रालयों के बीच बातचीत करने की आवश्यकता भी है और गतिशील तरीके से पूरी कलीसिया की भागीदारी की आह्वान करता है।

व्यावहारिक सुझाव

डॉ घिसोनीने अपना भाषण के अंतिम खंड में कलीसिया की जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक सुझावों को पेश किया। उसने कहा कि यह सिद्ध तकनीकों के ज्ञान और निरंतर अध्ययन के साथ शुरू होता है।

उसने कई ठोस सुझाव भी दिए: जवाबदेही के लिए प्रक्रियाओं का राष्ट्रीय दिशानिर्देश,  धर्माध्यक्षों को राय देने के लिए स्वतंत्र परिषद का निर्माण; एक केंद्रीय कार्यालय की स्थापना जो ऐसे निकायों को बढ़ावा देगा, और उन्हें ठीक से काम करने में मदद करेगा; और कलीसियाई मामलों में गोपनीयता बनाए रखने पर कानून का एक संशोधन। अंतिम मुद्दे पर डॉ. घिसोनी ने जोर देकर कहा कि पारदर्शिता के अधिकार के साथ अधिक से अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए। कलीसिया में सभी को अपने उत्तरदायित्व को साझा करते हुए मिलजुल कर काम करने की आवश्यकता है।

23 February 2019, 17:54