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फ्राँस के पोर्ता विले के शिविर से हटाये गये आप्रवासी और शरणार्थी फ्राँस के पोर्ता विले के शिविर से हटाये गये आप्रवासी और शरणार्थी  

आप्रवासियों एवं शरणार्थियों के लिये स्वास्थ्य सेवा का आह्वान

वाटिकन ने आप्रवासियों एवं शरणार्थियों को उपयुक्त स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने का आह्वान किया है। जिनिवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन की 144 वीं आम सभा में 2019 से 2023 तक के लिये वैश्विक कार्य योजना के प्रारूप पर विचार किया गया तथा “शरणार्थियों एवं आप्रवासियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा ” देने पर भी बल दिया गया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

जिनिवा, शुक्रवार, 1 फरवरी 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन ने आप्रवासियों एवं णरणार्थियों को उपयुक्त स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने का आह्वान किया है. जिनिवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन की 144 वीं आम सभा में 2019 से 2023 तक के लिये वैश्विक कार्य योजना के प्रारूप पर विचार किया गया तथा “शरणार्थियों एवं आप्रवासियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा” देने पर भी बल दिया गया.

आम सभा में अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को बुधवार को सम्बोधित करते हुए जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघीय कार्यालयों में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की दयनीय स्थिति का स्मरम दिलाया.

6 करोड़, 85 लाख विस्थापित, एक करोड़ राज्य विहीन

महाधर्माध्यक्ष ने ध्यान आकर्षित कराया कि विश्व में छः करोड़ 85 लाख व्यक्ति अपने ही देश में विस्थापित अथवा अन्यत्र शरण लेने के लिये बाध्य हैँ. इनके अतिरिक्त, लगभग एक करोड़ व्यक्ति ऐसे हैं क किसी भी देश के नागरिक नहीं हैं. 

सह-अपराधिता की दीवार को तोड़ें

सन्त पापा फ्राँसिस के शब्दों को उद्धृत कर उन्होंने कहा, “आप्रवास का मुद्दा केवल संख्या का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह व्यक्तियों से जुड़ा है जिनका अपना इतिहास, संस्कृति, भावनाएँ और आकांक्षाएँ हैं. ये हमारे भाई और हमारी बहनें हैं जिन्हें अनवरत सुरक्षा की ज़रूरत है. न सभी को उम्मीद है कि हम हमारे आस-पास घिरी आरामदायक एवं मूक सह-अपराधिता की दीवार को तोड़ने का साहस प्राप्त करें. वे हमसे दया और उत्कंठा प्रदर्शित करने की कामना कर रहे हैं. "

महाधर्माध्यक्ष ने कहा, “सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति के लिये सार्वभौमिक स्वास्थ्य योजनाओं में आप्रवासियों और शरणार्थियों को भी शामिल किया जाना अनिवार्य है. साथ ही उनके साथ संचार में सुधार तथा नस्लगत भेदभाव एवं हिंसा को रोकने हेतु ठोस प्रयासों की नितान्त आवश्यकता है क्योंकि यही मुद्दे समग्र जनकल्याण को गहन रूप से प्रभावित करते हैं. "

01 February 2019, 11:47