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कलीसिया में नाबालिगों की सुरक्षा पर समिति के सदस्य संत पापा से मुलाकात करते हुए कलीसिया में नाबालिगों की सुरक्षा पर समिति के सदस्य संत पापा से मुलाकात करते हुए  (ANSA)

कलीसिया में नाबालिगों के संरक्षण की पहल आज की नहीं, भाग दो

कलीसिया में नाबालिगों की सुरक्षा के लिए उठाये गये कदम नये नहीं हैं। इतिहास बतलाता है कि काफी सालों से कलीसिया इसके लिए प्रयासरत है और कई ठोस कदम संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें के द्वारा भी उठाये जा चुके हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

नीचे उन प्रयासों का व्यौरा प्रस्तुत किया जा रहा है।

आयरलैंड: रयान और मर्फी रिपोर्ट

सन् 2009 में आयरलैंड में, विशेष सरकारी आयोगों द्वारा वर्षों के कार्यों के बाद, डबलिन महाधर्मप्रांत में स्कूल प्रणाली में रयान रिर्पोट एवं बाल दुराचार पर मर्फी रिपोर्ट प्रकाशित किया गया था। रिपोर्टों में उन कमियों को उजागर किया गया था जिनके द्वारा कलीसिया ने दुरुपयोग के मामलों पर कार्रवाई की थी तथा आयरिश धर्माध्यक्षों को रोम बुलाने के लिए संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें को प्रेरित किया था। मार्च 2010 में संत पापा ने एक प्रेरितिक पत्र प्रकाशित किया था जिसमें आयरलैंड के काथलिकों को सम्बोधित किया गया था। पत्र में उन्होंने सच्चाई को धोखा देने के जवाब में वास्तविक प्रेरितिक, उचित एवं प्रभावी उपाय अपनाने की मांग की थी। उन्होंने नवम्बर 2010 से मार्च 2012 तक देश में प्रेरितिक दौरा निश्चित किया था। 2008 से शुरू करते हुए संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेट ब्रिटेन, माल्टा एवं जर्मनी में यौन दुराचार के शिकार लोगों से लगातार मुलाकात करते रहे। संत पापा फ्राँसिस ने इस बात को जारी रखा है और वे प्रेरितिक आवास संत मर्था में व्यक्तिगत रूप से बारम्बार मुलाकात करते रहते हैं।   

धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के लिए दिशा निर्देश

इस प्रक्रिया में दूरी महत्वपूर्ण पहल थी मई 2011 में विश्वास के सिद्धांत हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ द्वारा, सभी धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के लिए एक पत्र का प्रकाशन, जिसमें यौन दुराचार के मामलों की कार्रवाई पीड़ितों की सहायता तथा धर्मप्रांत का, उस क्षेत्र के साथ तालमेल रखने के लिए दिशानिर्देश। पत्र में कहा गया था कि याजकों द्वारा यौन शोषण के अपराधों से निपटने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से धर्मप्रांतीय धर्माध्यक्ष के पास है।

ग्रेगोरियन संगोष्ठी

धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों एवं धर्मसमाजों को मदद पहुँचाने के लिए कई बार दिशा निर्देश तैयार किये गये। परमधर्मपीठ ने चंगाई एवं नवीनीकरण हेतु अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन को प्रोत्साहन दिया और इसके तहत फरवरी 2012 को रोम स्थित परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्व विद्यालय में इसका आयोजन किया गया। संगोष्ठी का अंतरराष्ट्रीय उद्देश्य, फरवरी 2019 में हो रही सभा के ही समान था। उस सभा में धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के 110 प्रतिनिधि तथा 35 धर्मसमाजों के सुपीरियर जेनेरल ने भाग लिया था। संगोष्ठी का समापन नाबालिगों की सुरक्षा हेतु केंद्र की स्थापना की घोषणा के साथ किया गया था जिसके लिए ग्रेगोरियन विश्व विद्यालय के फादर हान्स जोलनर येसु समाजी को निदेशक का भार सौंपा गया था ताकि बाल यौन दुराचार को रोकने हेतु व्यक्तियों को विशेष रूप से तैयार किया जाए।

नया परमधर्मपीठीय आयोग

संत पापा फ्राँसिस के निर्देश पर बाल यौन दुराचार रोकने और दुराचार का सामना करने हेतु पहला कदम था, दिसम्बर 2013 में नाबालिगों की सुरक्षा हेतु नये परमधर्मपीठीय आयोग का गठन। आयोग के कार्यों में दिशा निर्देश तैयार करना, नव नियुक्त धर्माध्यक्षों के लिए कोर्स का आयोजन तथा दुराचार के शिकार लोगों के लिए एक दिवसीय प्रार्थना आदि शामिल है।

संत पापा फ्राँसिस ने दुरुपयोग के क्षेत्र में नवाचार, नियम और प्रक्रियाओं की शुरूआत की। इसके लिए प्रथम पहल जून 2016 में मोतू प्रोप्रियो "एक ममतामय माता की तरह" के द्वारा किया गया था। यह कलीसियाई अधिकारियों की जवाबदेही के मुद्दे से संबंधित था और जिसमें स्थापित धर्मवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार, नाबालिगों के यौन दुराचार के मामले पर कार्रवाई करने में लापरवाही के लिए धर्माध्यक्षों को उनके पद से निष्कासन की मांग की गयी थी।  

नवम्बर 2014 में संत पापा ने विश्वास के सिद्धांत के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अंदर और एक समिति का गठन किया, जिससे कि "सबसे गंभीर अपराधों" के संबंध में दण्ड की आज्ञा की कलीसियाई अपील की जाँच की जा सके तथा इसे महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स शिक्लुना को सौंपा जा सके। इसका एक ही उद्देश्य था नाबालिगों के दुरुपयोग के मामलों की अधिक तीव्र जांच सुनिश्चित करना।  

यह रेखांकित करने के लिए कि नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कलीसिया की प्रतिबद्धता किस तरह एक परिप्रेक्ष्य में चलती है, जो न केवल आंतरिक है बल्कि पूरे समाज के साथ सहयोग करती है संत पापा फ्राँसिस ने "डिजिटल विश्व में बाल प्रतिष्ठा" पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्ग्रेस को समर्थन एवं प्रोत्साहन दिया, जिसका आयोजन परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्व विद्यालय में अक्टूबर 2017 में किया गया था।    

दुराचार एवं याजकवाद से संघर्ष

जनवरी 2018 में चिली में अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान संत पापा फ्राँसिस को फादर फेरनान्दो कारादिमा के मामले में स्थानीय कलीसिया में विभाजन के ठोकर का सामना करना पड़ा था जिसको परमधर्मपीठ ने 2011 में दुराचार का दोषी पाया था। फरवरी में महाधर्माध्यक्ष शिक्लुना को सौंपे गये एक जाँच रिपोर्ट के बाद संत पापा ने अप्रैल में चिली के धर्माध्यक्षों को, मूल्यांकन और स्थिति की सही जानकारी की कमी की गंभीर त्रुटियों को उजागर करते हुए पत्र लिखा था। उसके बाद मई में चिली के सभी धर्माध्यक्षों को एक सभा हेतु रोम बुलाया गया था जो धर्माध्यक्षों द्वारा संत पापा को इस्तीफा सौंपने के साथ समाप्त हुआ था, जिनमें से कुछ को ही स्वीकार किया गया था।

इस पृष्ठभूमि ने हाल में संत पापा फ्राँसिस द्वारा एक प्रेरितिक दस्तावेज तैयार किया। मई 2018 को अपने दस्तावेज "चिली के रास्ते पर ईश प्रजा को एक पत्र" में संत पापा फ्राँसिस ने यौन दुराचार के शिकार लोगों को उनके साहस के लिए धन्यवाद दिया है तथा दुराचार की जड़ में याजकवाद से संघर्ष करने हेतु ईश प्रजा से अपील कीम । पुनः अगस्त 2018 को "ईश प्रजा को पत्र" में संत पापा फ्राँसिस ने यौन दुराचार, सत्ता के दुरूपयोग एवं अंतःकरण के दुष्प्रयोग को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बतलाया है।

संत पापा फ्राँसिस ने अगस्त 2018 में, परिवार पर विश्व सभा में भाग लेने आयरलैंड की यात्रा के दौरान कहा था कि "दुराचार को न कहना, याजकवाद के हर प्रकार को मजबूती से न कहना है।" उन्होंने वहाँ उन घृणास्पद अपराधों पर कारर्वाई करने में कलीसिया के अधिकारियों की असफलता पर टिप्पणी की थी जो निश्चय ही आक्रोश पैदा करता तथा काथलिक समुदाय के लिए पीड़ा और शर्म का कारण है।  

19 February 2019, 16:42