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नाबालिकों की सुरक्षा हेतु काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन में  कर्डिनल ताग्ले का संबोधन नाबालिकों की सुरक्षा हेतु काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन में कर्डिनल ताग्ले का संबोधन  (Vatican Media)

नाबालिकों की सुरक्षा हेतु सभा के प्रथम दिन कर्डिनल ताग्ले का संबोधन

नाबालिकों की सुरक्षा हेतु सम्मेलन के प्रथम दिन, धर्माध्यक्षीय सम्मेलन को धर्माध्यक्षों को अपने संबोधन में कर्डिनल ताग्ले ने घावों की चंगाई हेतु आह्वान किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरूवार, 21 फरवरी 2019 (रेई) अपनी भेड़ों के दुःखों को जानना और उनके घावों की चंगाई हेतु कार्य करना धर्माध्यक्षों का मुख्य कार्य।

अभिषिक्त कलीसिया के चरवाहों द्वारा नाबालिकों से किया गया दुराचार ने न केवल दुराचार के शिकार हुए लोगों को घालय किया है वरन इसके द्वारा उनके परिवार, याजकवर्ग, कलीसिया, समाज, स्वयं शोषणकर्ता और धर्माध्यक्षगण भी घोटिल हुए हैं। यह सत्य है और हम नम्रता में इस सच्चाई को दुःख के साथ स्वीकार करते हैं कि धर्माध्यक्षों के रुप में हमने लोकधर्मियों और पूरी कलीयिसा, वास्तव में ईश्वर के शरीर को घायल किया है। दुराचार के शिकार हुए लोगों के प्रति हमरा प्रतिउत्तर, यहाँ तक की उन्हें अस्वीकार करना, शोषणकर्ताओं को बचाते हुए उनके बुराई को दबाने का प्रयास ने हमारे विश्वासियों को चोटिल किया है जिससे कारण हम उनके साथ अपने संबंध में एक बड़े घाव को पाते हैं, जिसकी सेवा हेतु हमें नियुक्त किया गया है। लोगों हमसे सही सवाल पूछ रहे हैं, “क्या आप, जिन्हें अपनी भेड़ों की रक्षा हेतु नियुक्त किया गया है, अपने कार्यों को करने के बदले उनसे दूर नहीं भाग रहे हैं, जब आप यह देखते और पाते हैं कि आप के बच्चों और संवेदनशील लोगों पर बुराई ढ़हाये गये हैंॽ घावों को चंगाई की जरुरत है। लेकिन चंगाई कहाँ से आती हैॽ धर्माध्यक्षों के रुप में हम जो घावों के अंग हैं कैसे इस विशिष्ट संदर्भ में चंगाई को प्रोत्साहित कर सकते हैंॽ घावों की चंगाई की इस विषयवस्तु को हम कई अंतर-अनुशासनात्मक अध्ययनों में पाते हैं। विश्वास और कलीसियाई दृष्टिकोण इस सदर्भ में हमारे मापदण्ड बनते हैं जैसे कि संत पापा फ्रांसिस ने हमें कई अवसरों पर इसकी ओर हमारा ध्यान आकृष्ट कराया है।

घायल मानवता से अपने को संयुक्त करें

येसु अपने चेलों को पुनः अपने घावों को देखने का निमंत्रण देते हैं। वे थोमस से कहते हैं कि वे अपनी उंगुली को हाथों में घाव के निशानों और अपनी बगल पर रखे।  हम अपने में इस बात का अनुभव कर सकते हैं कि थोमस ने कैसा अनुभव किया होगा। लेकिन वह पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त के घावों को देखते हुए अपने गहन विश्वास को घोषित करता है, मेरे प्रभु और मेरे ईश्वर। येसु के घावों को देखना और उनका स्पर्श करना हमारे कार्य और विश्वास की अभिव्यक्ति का मूलभूत आधार है।  हम इस अंतरंग मिलन से अपने लिए क्या सीख सकते हैंॽ सुसमचार लेखक इस बात की पुनरावृति द्वारा हमें स्पष्ट करते हैं कि जो ख्रीस्त विश्वास, येसु ख्रीस्त की मृत्यु और पुनरुत्थान को घोषित करने हेतु भेजे गये हैं, वे इसकी सच्चाई को केवल तब घोषित कर सकते हैं जब वे मानवता के घावों से अपने को निरंतर संयुक्त रखते हैं। यह हमारे प्रेरितिक कार्य का एक मुख्य भाग है। यह थोमस के साथ खरा उतरता है जो सदा ही कलीसिया और विशेषकर वर्तमान समय की सच्चाई है। टॉमस हालिक लिखते हैं, “येसु थोमस के पास आते और अपने घावों को दिखलाते हैं। इसका अर्थ पुनरुत्थान “विलोपन” या क्रूस का अवमूल्यन नहीं है। घाव अपने में घाव है।” येसु ख्रीस्त के घाव हमारी दुनिया के घाव हैं। वे आगे कहते हैं, “हमारी दुनिया घावों से भरी हुई है। मैं इस बात से आश्वस्त हूँ कि वे जो दुनिया की घावों को अनदेखा करते उनका कोई अधिकार नहीं बनता कि वे “मेरे प्रभु और मेरे ईश्वर” को उच्चरित करें। मानवता के घावों में येसु ख्रीस्त के घावों को स्पर्श करना उनके लिए सच्चे विश्वास की अभिव्यक्ति है। वे आगे कहते हैं, “जब तक मैं घावों का स्पर्श नहीं करता मैं विश्वास नहीं कर सकता हूँ क्योंकि दुनिया और मावनजाति के कष्टदायक घाव और दुःख तकलीफें येसु ख्रीस्त के घाव हैं। येसु ख्रीस्त में अपने विश्वास को व्यक्त करने का मेरा कोई अधिकार नहीं जबतक मैं अपने पड़ोसियों के दुःखों को गंभीरता से नहीं लेता हूँ। वह विश्वास जो अपने लोगों की दुःखों को देखकर आँखें बंद कर लेता वह अपने में केवल एक मीरिचिका है।” विश्वास अपने में क्रूसित येसु के घावों औऱ पुनरूत्थान से जन्मता और पुनः जन्मता है जो मानवता के घावों को देखता और उनका स्पर्श करता है। केवल एक घायल विश्वास ही विश्वासनीय है।(हालिक) हम येसु ख्रीस्त में अपने विश्वास की अभिव्यक्ति कैसे कर सकते हैं जब हम यौन शोषण के शिकार लोगों के घावों की ओर से अपनी नजरें फेर लेते हैंॽ

हमारी चुनौती

हमारे लोग हमसे इस बात की मांग करते हैं कि हम उनके घावों को देखें और अपनी गलतियों को स्वीकार करें यदि हम येसु के पुनरूत्थान में अपने विश्वास का सच्चा और उचित साक्षा देना चाहते हैं। इस अर्थ हमारे लिए यह है कि हम व्यक्तिगत रूप से येसु ख्रीस्त के घायल शरीर की चंगाई हेतु उत्तरदायित्व लें जिससे फलस्वरुप हम अपनी ओर से यह समर्पित कोशिश करें कि जहाँ तक बन पड़े हम अपनी शक्ति और योग्यता के अनुसार बच्चों की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए अपने समुदायों की चिंता करें।

पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त में घावों की उपस्थिति मानव तर्क को खारिज करती है। यदि दुनिया पुनरूत्थान का क्रोरियोग्रफी करती तो येसु ख्रीस्त अपने को हेरोद और पिलातुस की दरबार में पेश करते हुए कहते, “मैंने इसके बारे में कहा था।” येसु अपने विजय की घोषणा दुनिया के दुःख दर्द, अन्याय औऱ हार की निशानियों को समाप्त करते हुए करते। वे उन सारी चीजों को अतीत के अंधकार में डाल देते लेकिन येसु ख्रीस्त के मार्ग ऐसे नहीं हैं। पुनरूत्थान अपने में कोई काल्पनिक विजय नहीं है। चेलों को अपने घाव दिखाने के द्वारा वे उनकी यादों को ताजा करते हैं। रॉबर्टो गोइज़ेटा इसके बारे में उचित रुप में कहते हैं, “येसु ख्रीस्त के घाव” महिमामय शरीर अपने में वह देहयुक्त स्मृति हैं जो हमें उनके जीवन और मृत्यु से संयुक्त करती है।” येसु के घाव उनके प्रेम और करूणा की वह निशानी है जिसके द्वारा वे अपने को गरीबों, बीमारों, नाकेदारों, अपमानित नारियों, कोढ़ियों, शोर-शराबे में जीने वाले बच्चों, बाहर के लोगों और विदेशियों से जोड़ते हैं। येसु के घाव उनका दूसरों के घावों को छूने का परिणाम है। वे अपना संबंध उनके साथ स्थापित करने के कारण समाज और धर्म के नाम पर क्रूसित किये जाते हैं। उन लोगों की कमजोरी और घावों में अपनी सझेदारी के कारण वे उनके लिए करुणामय भाई बनते न कि कोठर न्यायकर्ता। ईब्रानियों के नाम संत पौलुस का पत्र 5. 8-9 हमें इसके बारे में कहता है, “ईश्वर का पुत्र होने पर भी उन्होंने दुःख सह कर आज्ञापालन सीखा। वह पूर्ण रूप से सिद्ध बन कर, सब के लिए मुक्ति के स्रोत बन गये, जो उनकी आज्ञाओं का पालन करते हैं।”  पुनर्जीवित येसु के घाव शिष्यों को इस बात की याद दिलाती है कि उन्हें प्रेम में मानव हेतु घायल होने को तैयार रहना है। उन्हें घाव दूसरों के घाव हैं जिसे उन्होंने अपने शरीर में स्वतंत्र रुप में धारण किया। उन्होंने ने दूसरों को जख्म नहीं दिया वरन प्रेम और एकता में बन रहने हेतु उन्होंने अपने को घायल करना स्वीकार किया। केवल प्रेम और करूणा के घाव ही हमें चंगाई प्रदान कर सकते हैं।

डरो मत

हम अपने को घायल लोगों के मध्य लाने से भयभीत न हो क्योंकि यह स्वयं हमें घायल करता है। हाँ हमारे घाव उस स्मृति को ताजा बनायें रखने की निशानी होगी जैसा कि चेलों के साथ हुआ। पुनर्जीवित येसु के घाव चेलों को उनके धोखे, परित्याग की याद दिलाती है जब वे भय के कारण अपने जीवन को बचाने हेतु भाग गये। वे खतरे की घड़ी में, शिष्य होने की कीमत चुकाने के भय से भाग जाते हैं। येसु के घाव उन्होंने और हमें इस बात की याद दिलाती है कि बहुत बार हम अपने अभिलाषी और नियमावली के अंध पालन में अपनी शक्ति का दुरूपयोग करते जो निर्दोषों को दोषी करार देती है। पुनर्जीवित येसु के घाव में हम निर्दोषों के दुःख के अलावे अपनी कमजोरियों और पापों की यादगारी को देखते हैं।

यदि हम चंगाई का माध्यम होना चाहते हैं तो हमें उस मनोभाव का परित्याग करना होगा जो दुनियावी है जो दूसरों के घावों को देखने और स्पर्श करने से हमें मना करती है जो कि दूसरों में येसु के घाव हैं। दुराचार और ठोकर के शिकार हुए लोग हमें इस समय अपने विश्वास में मजबूत होने की मांग करते हैं। दुनिया को आज पुनर्जीवित येसु में हमारे सच्चे साक्ष्य की जरुरत है।

रॉबर्टो गूज़ीटा इस बात से अश्वस्त है कि घावों और मृत्यु का तिरस्कार हमें दूसरों की मृत्यु के साथ स्वयं के मृत्यु की ओर ले चलती है। आज हम अपने हृदय में एक बड़े भय को व्याप्त पाते हैं और इसी कारण हम दूसरों के घावों का स्पर्श करने से जी चुराते हैं यह इसीलिए कि हम स्वयं के घावों, नौतिकता, कमजोरी, पापमय स्थिति औऱ संवेदनशीलता को छूने में अपने को भयभीत पाते हैं। अर्नेस्ट बेकर इस बात का अवलोकन करते हैं कि हम अपनी संवेदनशीलता के कारण अपने दुःख और दर्द को नजरअंदाज करते हैं। हम अपने को इस बात से झूठलाते हैं कि धन की अधिकता, सही जीवन बीमा, अति कड़ी सुरक्षा, सीसी टी. वी. कैमरा, अति आधुनिक कार और गैजटस् तथा स्वास्थ्य कल्बों की सदस्यता हमें अमरणशील बना सकती है। दुःख की बात हमारे लिए यह है कि हम अपने बीच से घावों को गलियों में निकालते और अपने घरों की दीवारों को रंगते हुए करते हैं विशेषकर जब कोई अति सम्मानीय व्यक्ति हमारे बीच में आता है। गोजिटा मार्मिक ढंग से कहते हैं, “यदि हम मृत्यु को अस्वीकार करते तो हम उसका शिकार होते हैं।” हम इसे अपने ऊपर लेते हैं। भय और टूटने का दर्द हमें सच्चे मानवीय संबंध से दूर करता है। इस तरह हमारा आंतरिक स्वरुप अपने में न तो कोई दर्द और खुशी का अनुभव करता और न ही प्रेम का। हममें प्रेम करने की क्षमता मर जाती है। घाव का भय हमें दूसरों से अलग करते हुए हमें दूसरों के आवश्यकता के प्रति उदासीन बनता देता है। भय़ हमें हिंसक और अतर्किक व्यवहार वाला व्यक्ति बना देता है। धमकी की अनुपस्थिति में भी भय के कारण हम अपने को सुरक्षित करने हेतु प्रेरित हो जाते हैं। दूसरों में और समाज में भय को बोने वाले अपने आप से भयभीत हैं। पुनर्जीवित येसु में हम यह देखते हैं कि दूसरों के घावों का स्पर्श करने में हम अपने घावों को छूते और येसु ख्रीस्त के साथ रहते हैं। हम एक दूसरे के भाई-बहन बन जाते हैं। हम मानव जाति और सृष्टि को चोटिल करने के द्वारा अपने सामान्य अपराध को स्वीकार करते हैं। हम सुलह की पुकार सुनते हैं। हम अपने टूटे हुए संसार में ईश्वर को धैर्यवान स्थिति में बना हुआ पाते हैं।  

एकजुटता में साथ चलाना

डॉ. रॉबर्ट एनराइट, अमेरिका में विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और माफी के सामाजिक वैज्ञानिक अध्ययन के अग्रणी कहते हैं, “न्याय मिलने के बाद, हम दुराचार के शिकार को किस तरह चंगाई हेतु मदद कर सकते हैंॽ न्याय अपने में जरूरी है लेकिन यह स्वयं में टूटे मानव हृदय को चंगा नहीं करता है। यदि हम दुराचार के शिकार लोगों को चंगाई देना में मदद करना चाहते हैं तो हमें उनके क्रोध रुपी घाव और दर्द को गंभीरता से लेने की जरुरत है। क्रोध अपने में एक बीमारी हो सकती है जो धीरे-धीरे लेकिन निरंतर लोगों को प्रभावित करती है, जब तक उनका जोश और उनकी शांति खत्म न हो जाये। वे अपने में तनाव, तीव्र चिंता, अस्वाद, व्यक्तिगत कमजोर आत्म-छवि और आपसी लडाई-झगड़े का शिकार होते हैं जो आंतरिक टूटेपन के कारण होती है। उनकी चंगाई के क्रम में हमें उन्हें यह कहने से पहले अपने में इस बात को सुस्पष्ट करने की जरुरत है कि हम उन्हें दुऱाचारी को क्षमा देने हेतु सलाह नहीं दे रहे हैं। हम अपने में बिना सवाल जबाव किये इस बात को जानते हैं कि दुराचार के शिकार व्यक्ति जब एक क्षमा देने की स्थिति में आता तो वह अपने में एक गहरी चंगाई का अनुभव करता है और उसके हृदय का क्रोध अपने में कम हो जाता है। हम जानते हैं कि क्षमादान अपने में एक शक्तिशाली वैज्ञानिक समर्थित मार्ग है जो मानव हृदय को दर्द और क्रोध से निजात दिलाता है। कलीसिया के रुप में हमें यौन शोषण के शिकार लोगों के साथ विश्वास, शर्तहीन प्रेम में चलते हुए उन्हें इस बात के लिए निरंतर प्रेरित करने का जरूरत है कि वे दूसरे को क्षमा करें क्योंकि क्षमा के द्वारा हम अपने को ईश्वरीय चंगाई का स्रोत बनाते हैं। 

अंत में कुछ परिस्थितियों में धर्माध्यक्ष और धर्मसंघी अधिकारी अपने को इस दुविधा में पाते हैं कि शोषक और शोषण का शिकार में किसे चुना जाये। हमें किसकी सहायता करनी चाहिएॽ किसे सहायता की आवश्यकता हैॽ न्याय और क्षमा की ओर ध्याय देते हुए हमें दोनों को सहायता करने की जरुरत है। शोषण का शिकार हुए लोगों के संबंध में हमें चाहिए कि हम उनके गहरे घावों को चंगाई करने में मदद करें। शोषक के संबंध में, हम न्याय में, उनकी आतंरिक भावनाओं, घावों को अनदेखा किये बिना सच्चाई का सामना करने में उसकी मदद करें।

निष्कर्ष

पुनर्जीवित येसु और शिष्यों से सीखते हुए हम दुराचार का शिकार हुए लोगों की ओर देखें, उनके घावों, परिवारों, दोषी और निर्दोष याजक, कलीसिया और समाज का स्पर्श करें। येसु के घावों की ओर नजरें फेरे जो धोखें और शक्ति के दुरूपयोग का शिकार हुए हम उऩ लोगों के घावों को देखते हैं जो रक्षा करने हेतु नियुक्त किये लोगों के द्वारा अपने को आहत पाते हैं। येसु में हम करुणा और न्याय को पाते जो हमें  क्षमा को देखने में मदद करती है। कलीसिया न्याय और करूणा का साधन बने जो पवित्र आत्मा के द्वारा दुनिया में मेल-मिलाप के कार्य को निर्देशित करते हैं। पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त पुनः हमारे बीच खड़े होते और अपने घावों को दिखलाते हुए कहते हैं, “तुम्हे शांति मिले।” हम अपने विश्वास के इस महान रहस्य में विकास करें। 

21 February 2019, 18:19