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वाटिकन में विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के धर्माचार्य वाटिकन में विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के धर्माचार्य   (AFP or licensors)

"विश्वास सापेक्षवाद को पराजित करने में सक्षम" धर्मसभा

काथलिक धर्माध्यक्षों की विश्व धर्मसभा ने गुरुवार को, 2018 के अक्टूबर माह में हुई धर्मसभा पर जारी दस्तावेज़ का, अँग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित किया जिसमें इस तथ्य पर बल दिया गया है कि विश्वास सापेक्षवाद को पराजित करने में सक्षम है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 11 जनवरी 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): काथलिक धर्माध्यक्षों की विश्व धर्मसभा ने गुरुवार को 2018 के अक्टूबर माह में हुई धर्मसभा पर जारी दस्तावेज़ का, अँग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित किया जिसमें इस तथ्य पर बल दिया गया है कि विश्वास सापेक्षवाद को पराजित करने में सक्षम है.    

ईश्वर के साथ यथार्थ साक्षात्कार का आह्वान

धस धर्मसभा में, विशेष रूप से, युवा प्रेरिताई, विश्वास एवं बुलाहट का विवेक विषयों पर ध्यान केन्द्रित किया गया था. दस्तावेज़ में युवाओं का आह्वान किया गया है कि वे जीवन पर नैतिक रूप से सापेक्ष दृष्टिकोण अपनाने के बजाय, ईश्वर के साथ यथार्थ साक्षात्कार की तलाश करें. आज बढ़ते अनेकानेक धर्मपन्थों की पृष्ठभूमि में धर्मसभा के आचार्यों ने दस्तावेज़ में लिखा कि युवा लोगों को केवल कलीसिया क्या कर रही है उस पर ध्यान नहीं देना चाहिये अपितु कलीसियाई सिद्धान्तों एवं धर्मशिक्षा को संवर्धित करने का प्रयास करना चाहिये इसलिये कि युवा लोग कलीसिया के भविष्य ही नहीं अपितु उसके वर्तमान भी हैं.

दस्तावेज़ में कहा गया, "युवाओं का धार्मिक अनुभव उन सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है जिनमें वे जीवन यापन करते हैं." इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया कि विश्व के कुछेक क्षेत्रों के कलीसियाई जीवन और सामुदायिक अनुभव सशक्त एवं सजीव है जिनमें युवा लोग हर्षपूर्वक भाग लेते हैं किन्तु कुछेक क्षेत्रों में अधिकांश काथलिक लोग कलीसिया से सम्बद्ध होने का अनुभव नहीं कर पाते हैं जहाँ धार्मिक गति -विधियों में युवाओं की अभिरुचि कम ही होती है.   

धर्म कोई निजी धारणा नहीं

उन्होंने कहा, धर्म कोई निजी धारणा नहीं है और न ही इसे मानसिक स्वास्थ्य की खोज का साधन बनाया जाना चाहिये अपितु जीवन्त ईश्वर के रहस्य का मर्म समझने के लिये उदार रहना चाहिये.

धर्मसभा के आचार्यों ने चेतावनी दी कि ख्रीस्त एवं कलीसिया के साथ सम्बन्धों पर आधारित विश्वास को, नैतिक एवं धार्मिक सापेक्षवाद समझने की भूल से दूर रहा जाये.  

धर्माचार्यों ने कहा, "ईसाई समुदायों में हम कभी-कभी, सुसमाचार के प्रकाश में ईश्वर के साथ साक्षात्कार के बजाय, नैतिक और चिकित्सीय ईश्वरवाद के प्रस्ताव का जोखिम उठा लेते हैं, जो सुरक्षा और आराम हेतु मानवीय आवश्यकता को पूरा कर सके."

यह स्वीकार करते हुए कि मानव की पूर्णता जीवन्त ईश्वर के यथार्थ व्यक्तिगत अनुभव से आती है, धर्मसभा के आचार्यों ने कहा कि लोगों को नैतिक और धार्मिक सापेक्षवाद से बाहर निकालने के लिए विश्वास पर आधारित यथार्थ एवं ठोस समुदायों की आवश्यकता है.

11 January 2019, 11:56