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"अभे मरिया" कार्यक्रम में बात करते संत पापा फ्राँसिस "अभे मरिया" कार्यक्रम में बात करते संत पापा फ्राँसिस 

मृत्यु की घड़ी पर संत पापा के विचार

कार्यक्रम में चर्चा का मुख्य विषय था "अब और हमारे मरने के समय।" चर्चा में अन्य अतिथि थे लेतित्सिया मोरात्ती, सोफिया कन्तीसानी एवं तालिता पौला लाइते।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 4 दिसम्बर 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ "पाप कभी नहीं मरने का भ्रम है।" संत पापा फ्राँसिस ने यह बात डॉन मार्को पोत्सो द्वारा प्रसारित टीवी 2000 के कार्यक्रम "अभे मरिया" (प्रणाम मरिया) में कही। कार्यक्रम को विगत शाम 9.05 बजे प्रसारित किया गया था।

कार्यक्रम में चर्चा का मुख्य विषय था "अब और हमारे मरने के समय।" चर्चा में अन्य अतिथि थे लेतित्सिया मोरात्ती, सोफिया कन्तीसानी एवं तालिता पौला लाइते।

संत पापा ने शैतान की याद की तथा मृत्यु पर चिंतन करने हेतु निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, "यह आसान समय नहीं है किन्तु मृत्यु को जीवन यात्रा की समाप्ति के रूप में सोचना वास्तविक है। पापमय जीवन जीते हुए व्यक्ति जानता है कि वह एक दिन मर जाएगा किन्तु इसके लिए वह कोई परवाह नहीं करता। यह एक भ्रम है और जिस तरह प्रणाम मरियम की प्रार्थना मुक्ति की कृपा से शुरू होती और उसका अंत पाप के फल से होता है उसी तरह यह मानवीय परिस्थिति की महान सच्चाई है। 

शांति

मृत्यु की घड़ी में हम माता मरियम को अपने पास रहने का आग्रह करें एवं उनसे शांति की याचना करें। संत पापा ने डॉन मार्को के साथ बातचीत में उस घटना का जिक्र किया जिसमें उन्होंने सेमिनरी में अध्ययन करते समय मृत्यु से परिचित होने के लिए "भले मरण" का अनुभव प्राप्त करने की साधना की थी। उन्होंने कहा कि उस घड़ी लोग प्रभु से दया की याचना करने लगते हैं। 

युवा एवं तरल संस्कृति

संत पापा ने युवाओं की याद की तथा उनके द्वारा अकेलापन एवं परित्यक्त महसूस करने पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हमारी संस्कृति एवं प्रस्तावों द्वारा हमने उन्हें दूर कर दिया है। हमने उन्हें एक ऐसी संस्कृति का निर्माण कराने हेतु मजबूर किया है जो ठोस नहीं है और एक दर्शनशास्त्री के सूत्र के प्रयोग के लिए तरल के समान है।" संत पापा ने कहा, "मैं इसे निश्चय ही तरल, बिना जड़ की संस्कृति कह सकता हूँ। इसके लिए हमारी सभ्यता दोषी है। आज युवाओं को अपने मूल में होने की आवश्यकता है। मरियम ने अपने मूल को कभी नहीं खोया।"

न्याय

संत पापा ने आत्महत्या की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "यह मुक्ति के द्वार को बंद करने के समान है किन्तु मैं जानता हूँ कि आत्महत्या पूर्ण स्वतंत्रता के साथ नहीं की जाती है।" संत पापा ने संत फ्राँसिस असीसी द्वारा मृत्यु को बहन पुकारे जाने की याद कर कहा, "मैं मृत्यु को अंतिम न्याय के रूप में चिंतन करना चाहता हूँ। जिसमें पाप को चुकाना पड़ेगा किन्तु मृत्यु दूसरी ओर मुक्ति के द्वार को खोल देती है।" संत पापा ने कहा कि मृत्यु के साये में जीना मेरी संस्कृति नहीं है किन्तु हरेक के जीने का अपना तरीका होता है। 

 

04 December 2018, 17:49