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मृत विश्वासियों का स्मृति दिवस एक आशा का दिन

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 नवम्बर 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 2 नवम्बर को रोम के लौरेनतीनो के क्रबस्थान में मृत विश्वासियों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित किया। इस क्रबस्थान का उद्घाटन 2002 में कार्डिनल कमिल्लो रूइनी द्वारा किया गया था।  विश्वासियों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

संत पापा ने प्रवचन में कहा, "आज के दिन की याद हमें अपने मूल में ले जाती है। यह आशा का दिन है। जो स्मरण दिलाता है कि हम किस चीज की आशा कर सकते हैं, पिता के प्रेम के सम्मुख उपस्थित होने की आशा।"

स्मृति, आशा एवं प्रकाश

संत पापा ने अपने चिंतन में तीन बातों पर प्रकाश डाला- स्मृति, आशा एवं प्रकाश जो हमें जीवन के रास्ते पर चलने में मदद करते हैं। हमें एक रास्ते पर चलने की आवश्यकता है और हम गलत रास्ते का चुनाव नहीं कर सकते। धन्यताएँ जिनके बारे येसु ने हमें बतलाया है वे हमें सही रास्ते पर ले चलते हैं और मन, दिल और आत्मा की शुद्धता हमें उस रास्ते पर उजाला प्रदान करती है।

हम आशा बनाये रखें

संत पापा ने प्रार्थना की कि हम एक परिवार एवं एक प्रजा के रूप में अपनी याद को कभी न खोयें। हम आशा बनाये रखें। आगे देखते हुए हमेशा क्षितिज पर मनन करें। प्रभु हमें प्रकाश को पहचानने की कृपा प्रदान करे जहाँ ईश्वर अत्यधिक प्रेम के साथ हमारा इंतजार करते हैं।

बच्चों की कब्र एवं संत पापाओं की समाधिस्थल पर प्रार्थना

ख्रीस्तयाग आरम्भ करने के पूर्व संत पापा ने बच्चों की कब्रों के पास रूककर मौन प्रार्थना की। पुरानी परम्परा को जारी रखते हुए, वाटिकन लौटने पर उन्होंने अपने पूर्वाधिकारियों के लिए प्रार्थना की। संत पेत्रुस महागिरजाघर के नीचे करीब एक सौ संत पापाओं को दफनाया गया है।

03 November 2018, 15:51