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एल सालवादोर के तीर्थयात्रियों से मिलते हुए संत पापा एल सालवादोर के तीर्थयात्रियों से मिलते हुए संत पापा  (ANSA)

एल साल्वादोर के तीर्थयात्रियों से संत पापा की मुलाकात

धर्माध्यक्ष ऑस्कर रोमेरो के संत घोषणा समारोह में भाग लेने आये एल साल्वादोर के तीर्थयात्रियों से संत पापा फ्राँसिस ने मुलाकात कीऔर संत ऑस्कर रोमेरो के पदचिन्हों पर चलने की प्रेरणा दी।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 15 अक्टूबर 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 15 अक्टूबर को वाटिकन के संत पौल छठे सभागार में एल साल्वादोर से आये धर्माध्यक्ष, पुरोहितों और करीब 5 हजार तीर्थयात्रियों का स्वागत करते हुए उनसे मिलने की खुशी व्यक्त की और कहा, “अमेरिकी महाद्वीप के एक प्रतिष्ठित चरवाहे धर्माध्यक्ष ऑस्कर रोमेरो के संत घोषणा समारोह में भाग लेने हेतु आये आप सभी से मुलाकात करने का मुझे सौभाग्य मिला है साथ ही साथ यह संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के साथ उनके लगाव और निकटता को व्यक्त करता है।”

एल साल्वादोर के धर्माध्यक्ष

संत पापा ने एल साल्वादोर के धर्माध्यक्ष को अपने पुरोहितों और लोक धर्मियों की अगुवाई कर समारोह में भाग लेने हेतु आने के लिए धन्यवाद दिया। संत ऑस्कर रोमेरो चरवाहे के रुप में अपने उत्तरदायित्व को लेना जानते थे अपने लोगों के लिए उन्होंने अपना जीवन दे दिया। संत घोषणा के बाद वे आपके प्रेरितिक कार्यों के लिए एक जीवंत उदाहरण बन गये हैं संत धर्माध्यक्ष रोमेरो आपको अनेकता में एकता लाने हेतु मदद करें जो ईश्वर के पवित्र लोगों की विशेषता है।

पुरोहितों और धर्मसंघियों को संदेश

संत पापा ने वहाँ बड़ी संख्या में उपस्थित पुरोहितों, धर्मसंघियों और धर्मबहनों का अभिवादन करते हुए कहा कि नये संत की जीवन शैली आपको अपने पुरोहिताई कार्यों को करने, लोगों की सेवा में अपने आप को समर्पित होने की प्रेरणा दे। संत ऑस्कर रोमेरो ने अपने पुरोहितों को दो बड़े गर्त, ईश्वर की अनंत दया और मनुष्यों के अनंत दुःख-कष्ट के मध्य में रखा। संत पापा ने कहा कि आप  ईश्वर के प्रेम और क्षमा का मध्यस्त बनने के लिए अथक परिश्रम करें। जो लोग दुनिया की बुराई को छोड़ने का प्रयास करते हैं और अपने बुरे कृत्यों पर पछतावा करते हैं और ईश्वर के प्रेम का अनुभव करना चाहते हैं उन्हें ईश्वर के पास लौटने और अपना दिल प्रभु के लिए खोलने हेतु मदद करें।

संत ऑस्कर रोमेरो का संदेश  

संत पापा ने लातिनी अमेरिका के देशों और एल साल्वादोर से संत घोषणा समारोह में भाग लेने हेतु रोम आये सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन कर कहा कि संत ऑस्कर रोमेरो का संदेश बिना अपवाद सभी को संबोधित किया गया है। उन्होंने दृढ़ता से दोहराया कि प्रत्येक काथलिक को एक शहीद होना चाहिए, क्योंकि शहीद का अर्थ गवाह है, यानी, लोगों के लिए ईश्वर के संदेश का साक्ष्य (आगमन के पहले रविवार का प्रवचन, 27 नवंबर, 1977)। ईश्वर हमारे जीवन में उपस्थित होना चाहते हैं और हमें सभी मानवता के लिए स्वतंत्रता के संदेश की घोषणा करने के लिए बुलाते हैं। केवल ईश्वर हमें स्वतंत्र कर सकते हैं, पाप और बुराई से मुक्त कर सकते हैं। हमारे दिल के नफरत को प्यार में बदल सकते हैं जिससे हम अपने भाइयों और बहनों का स्वागत कर सकें और उन्हें प्यार कर सकें। एक सच्ची आजादी जो पहले से ही पृथ्वी पर उपस्थित है मनुष्य के दिल में मोक्ष की आशा जागृत करती है।

संत पापा ने कहा कि इस काम को पूरा करना आसान नहीं है। इसके लिए हमें प्रार्थना में ईश्वर से संयुक्त रहने और कलीसिया से जुड़े रहने की जरुरत है। संत ऑस्कर हमें बताते हैं कि ईश्वर के बिना और कलीसिया के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। एक अवसर पर, उन्होंने दृढ़करण संस्कार को "शहीदों के संस्कार" के रूप में पुष्ट किया। उन्होंने कहा कि "पवित्र आत्मा की शक्ति, जो शुरु में उन्हें अपने धर्माध्यक्ष, अपने संत पापा से प्राप्त हुआ, इसके बिना वे उत्पीड़न की परीक्षा में खड़े नहीं हो सकते थे और न ही वे मसीह के लिए मर सकते थे। ( 5दिसंबर, 1977 प्रवचन) संत पापा ने कहा, आइये हम उनके वचनों से प्रेरणा लें कि प्रभु हमें अपने दैनिक कठिनाइयों से उबरने के लिए विशेष कृपा दें और अगर जरुरी हो तो उनके लिए अपना जीवन देने की कृपा हमें दें।

शांति और सुलह का संदेश

संत पापा ने तीर्थयात्रियों के माध्यम से सभी एल साल्वादोर के विश्वासी भाइयों और बहनों को अपना अभिवादन भेजा जो अपनों के बीच एक संत को वेदी का सम्मान मिलने की खुशी मना रहे हैं। संत पापा ने कहा कि यदि लोगों में  सजीव विश्वास है तो यह उनके परिवार, समाज और लोकप्रिय धार्मिकता के विभिन्न रूपों में व्यक्त होती है। उन्होंने कहा कि सभी जगह कठिनाइयाँ और युद्ध की स्थिति है। एल साल्वादोर वासियों को भी युद्ध और संघर्ष का सामना करना पड़ा। कुछ बेहतर जीवन की आशा में अपना देश छोड़ चुके हैं। संत ऑस्कर रोमेरो की स्मृति लातिनी अमेरिका के सभी लोगों को शांति और सुलह का संदेश भेजने का एक असाधारण अवसर है।

अंत में संत पापा ने शांति की महारानी की छत्र छाया तले सुपुर्द करते हुए उन्हें अपना आशीर्वाद दिया और अपने सिए प्रार्थना की कामना करते हुए उन्हें विदा किया।

15 October 2018, 17:03