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संत पापा युवाओं के साथ संत पापा युवाओं के साथ  (AFP or licensors)

धर्माध्यक्षों की धर्मसभा: “कलीसिया को जगायें”, संत पापा

सिनॉड के प्रतिभागियों ने अफ्रीकी मुद्दों को नजरअंदाज करने के लिए युवाओं से माफ़ी मांगी। संत पापा फ्राँसिस ने हमेशा युवाओं के प्रति सम्मान दिखाया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 15 अक्तूबर 2018 (वाटिकन समाचार) : युवाओं पर चल रही धर्माध्यक्षीय धर्मसभा शनिवार 13 अक्टूबर को अपने वाद-विवाद और विचार मंथन के विषयों पर प्रेस ब्रीफिंग स्पेन के कार्डिनल जुआन जोसे ओमेला ओमेला, दक्षिण अफ्रीका के कार्डिनल विल्फ्रिड फॉक्स नेपियर, ओएफएम और मेक्सिको की सुश्री कोरीना फियोर मोर्टोला रोड्रिगुज ने किया।

सुश्री कोरीना ने कहा कि वह और सिनॉड में भाग लेने वाले सभी युवा इस सुन्दर समय और सिनॉड में अपने विचारों को प्रकट कर पाने के लिए संत पापा फ्राँसिस के प्रति शुक्रगुजार हैं। उन्होंने बताया कि अवकाश के समय कॉफी पीते हुए उन्होंने संत पापा फ्राँसिस से बातें की। संत पापा ने उसे कहा कि “युवा लोगों को कलीसिया को जगाना चाहिए।”  

सिनॉड धर्माध्यक्षों युवा लोगों से माफ़ी मांगी

सुश्री रोड्रिगुज ने कहा कि युवा लोग एक ऐसी कलीसिया चाहते हैं जो विपत्ति का मुकाबला करने से हार नहीं मानता – जब लोगों को प्रवास, हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है तो युवा लोग चाहते हैं कि कलीसिया में दया की प्रवृत्ति हो। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह बहुत भावुक महसूस कर रही थीं लेकिन यह कहना चाहती थी कि युवा लोगों के लिए भी हृदयस्पर्शी था जब सिनॉड के धर्माध्यक्षों ने खुद को नम्र किया और कलीसिया में जो भी हुआ उसके लिए माफ़ी मांगी जो कभी नहीं हुआ था।

उसने कहा कि युवा लोग निर्देशित होना नहीं चाहते हैं, वे दूसरों का साथ चाहते हैं। युवा लोग कलीसिया से दूर चले जाते हैं क्योंकि वहाँ मुलाकात की कमी है, वे उन लोगों से मुलाकात नहीं करते हैं जो अच्छा करने की कोशिश करते हैं। बहुत उत्साह के साथ उसने कहा कि उसके जैसे युवा लोग, अपने विश्वास की ऊर्जा, जो हरिकेन तूफान की तरह है उसे साझा करना चाहते हैं - जो जरुर ही कुछ अच्छा फल लायेगा।

स्पेन के कार्डिनल जुआन जोसे ओमेला ओमेला ने कहा कि कलीसिया बहुत उपदेश देती है और कहती है कि धर्म सकारात्मक है और हमें ईश्वर से प्यार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यद्यपि यह किया जाता है, पर युवा लोग दावा करते हैं कि हम जो भी उपदेश देते हैं वे उसका अभ्यास नहीं करते हैं। उन्होंने  संत पापा फ्राँसिस को एक मॉडल के रूप में पेश करते हुए कहा कि वे जो भी बोलते हैं उसे करते भी हैं, वे ईमानदार और सुसंगत हैं। कार्डिनल ने कहा कि संत पापा फ्रांसिस ने अति से छुटकारा पा लिया है और कलीसिया को भी ऐसा करना चाहिए।

अफ्रीकी मुद्दों को छोड़ दिया गया 

दक्षिण अफ्रीका के कार्डिनल विल्फ्रिड फॉक्स नेपियर, ओएफएम ने कहा कि साइनो दस्तावेज़ में अफ्रीका से कई तत्व गायब थे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उन्हें अंतिम दस्तावेज में उसे रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम में कई युवा लोग कलीसिया से दूर जा रहे हैं लेकिन अफ्रीका में युवा लोग कलीसिया की खोज कर रहे हैं।

उन्होंने बेरोजगारी, गरीबी और प्रवासन के संकट को उजागर किया था। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को स्पर्श किया गया था, लेकिन ज्यादातर अफ्रीका के बजाय यूरोपीय संदर्भ में। कार्डिनल ने कहा कि अफ्रीका में अनियंत्रित शोषण है, उदाहरण के लिए, बड़ी मात्रा खनिजों के निष्कासन और पर्यावरण का बुरा प्रभाव लोगों को अपना देश छोड़े के लिए मजबूर कर देता है।

उन्होंने कहा कि कुछ परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उन्हें जीविका चलाने के लए बच्चों को स्कूल से निकाल कर काम कराया जाता है। बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित हैं। इस तरह गरीबी का चक्र चलता ही रहेगा। कार्डिनल ने देश की सरकारों के रिश्वत और भ्रष्टाचार का उल्लेख किया जिसका अफ्रीकी युवाओं के भविष्य पर भारी प्रभाव पड़ता है।

संत पापा द्वारा युवाओं का सम्मान

कार्डिनल जुआन जोसे ओमेला ओमेला ने कहा कि संत पापा हमेशा सिनॉड की आम सभा में उपस्थित रहते हैं। वे ध्यानपूर्वक सुनते और मुख्य बातों को नोट करते हैं और स्पष्ट रूप से सभा को दिखाते हैं कि वे जो कर रहे हैं वह महत्वपूर्ण और अर्थपूर्ण है। संत पापा जानते हैं कि कब बोलना है। वे हमेशा दूसरों को, चाहे वे कूरिया के अधिकारी हों या धर्माध्यक्ष या युवा हों सबका सम्मान करते हैं।  

उन्होंने कहा कि एक बार संत पापा ने सभी से सिनॉड की शुरुआत में खुलकर अपने विचार प्रकट करने हेतु कहा था। सभा में कुछ बातें कही गई जो कुछ प्रतिभागियों को अच्छा नहीं लगी। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हर कोई अपने दिल की बात बोलने के लिए स्वतंत्र है। कार्डिनल ओमेला ओमेला ने कहा, "मुझे विश्वास है कि धर्मसभा का वातावरण अच्छा और खुला है।"

कार्डिनल नेपियर ने कहा कि उनका मानना था कि संत पापा फ्राँसिस पर की गई आलोचना अक्सर असंतुलित थी और ऐसी कई चीजें हैं जिसे संत पापा फ्राँसिस ने किया है जिनकी अक्सर बात नहीं की जाती है। उन्होंने उल्लेख किया कि अर्थव्यवस्था परिषद् में, अब बजट और हिसाब की जिम्मेदारी हैं, अतीत में इस तरह का मामला नहीं था।

15 October 2018, 17:27