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युवाओं पर चल रही धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के विषयों पर प्रेस ब्रीफिंग युवाओं पर चल रही धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के विषयों पर प्रेस ब्रीफिंग 

धर्मसभाः महिलाएं, उत्पीड़न, "नगण्य व्यक्ति" और ‘ह्युमन विताये’

धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में महिलाओं, उत्पीड़न और प्रवासन की भूमिका, "नगण्य व्यक्तियों" तक पहुंच और आध्यात्मिक परामर्श एवं ‘ह्युमन विताये’ विषयों की एक बड़ी श्रृंखला शामिल थी।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 13 अक्तूबर 2018 (रेई) : युवाओं पर चल रही धर्माध्यक्षीय धर्मसभा ने शुक्रवार 12 अक्टूबर को अपने वाद-विवाद और विचार मंथन के विषयों पर प्रेस ब्रीफिंग में संयुक्त राज्य अमेरिका के धर्माध्यक्ष रॉबर्ट बर्रोन और नीदरलैंड के धर्माध्यक्ष एवरर्डस जोहान्स डी जोंग और कोरिया के सिस्टर मीना क्वोन ने बताया कि सिनॉड एक सुखद अनुभव रहा है जिसमें अब तक स्पष्ट और खुली चर्चाएं हुई हैं। उन्हें लगा कि वातावरण लोकतांत्रिक था। इस बारे में कोई संदेह नहीं था कि सिनॉड के नायक निश्चित रूप से युवा लोग थे। उन्होंने कहा कि यह देखना बहुत निराला था कि कलीसिया ने किस तरह युवाओं की बात सुनी है। पूर्ण प्रक्रिया में कलीसिया की सार्वभौमिकता दिखाई देती है।

वाटिकन संचार विभाग के प्रीफेक्ट, डॉ पावलो रफिनी ने सभा में चर्चा का एक सारांश दिया। इनमें युवा लोगों को न केवल व्यावसायिक क्षेत्र में बल्कि जीवन भर साथ देना शामिल था। उन्होंने इराक में ख्रीस्तियों पर हो रहे अत्यचार पर उल्लेख किया इस दौरान इस विषय पर एक युवा प्रतिभागी द्वारा किए गए हस्तक्षेप को धर्मसभा से प्रशंसा मिली। महिलाओं की भूमिका; याजकों के दुर्व्यवहार; संचार और विश्वासियों की शिक्षा में कलीसिया की विफलता; प्रवासियों की समस्याएँ; अंतर-पीढ़ी संवाद; सामुदायिक जीवन जीने के नए तरीकों की संभावनाओं पर विचार किया गया।  

महिलाएँ

सिस्टर मीना क्वोन ने विशेष रूप से कार्यक्षेत्र में पुरुषों के समान महिलाओं के सम्मान की आवश्यकता के बारे में बातें कीं। उन्होंने कहा कि युवाओं को जीवन में आगे बढ़ाने के लिए धर्मबहनों और लोक धर्मियों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि कभी-कभी, कार्यालय में, धर्मबहनों को प्रेरितिक देखभाल से बाहर रखा जाता है और उन्हें समान जिम्मेदारी नहीं दी जाती और निर्णय लेने की प्रक्रिया से वंचित रखा जाता है। धर्माध्यक्ष बर्रोन और धर्माध्यक्ष डी जोंग ने कहा कि यद्यपि महिलाएं सिनॉड में मतदान नहीं कर सकती हैं, क्योंकि यह धर्माध्यक्षों की धर्मसभा है, परंतु वे दोनों महसूस करते हैं कि धर्मसभा में महिलाओं को बहुत सावधानी से सुना गया है और जो भी वे कहती हैं, वे धर्मसभा के अंतिम दस्तावेज में अपना स्थान पा लेंगी। सिस्टर क्वोन ने कहा कि युवा लोग असमानता और बहिष्कार के प्रति संवेदनशील हैं; वे सहयोग और समानता चाहते हैं।

ख्रीस्तियों पर अत्यचार

धर्माध्यक्ष बार्रोन ने कहा विश्व के अन्य देशों में अनेक लोग अपने विश्वास के लिए मारे जा रहे हैं। उनका विश्वास खुद के दायरे से बाहर निकल कर विश्व के लिए सोचने और उनके लिए काम करने हेतु प्रेरित करता है। धर्माध्यक्ष डी जोंग ने कहा कि इराक के बारे में सुनकर वे खुद से सवाल पूछने के लिए मजबूर हो गये कि "मैं इराक के ख्रीस्तियों के लिए अपने धर्मप्रांत में क्या कर रहा हूँ?" उन्होंने कहा कि सिनॉड भी एक ऐसा स्थान है जहां वैश्विक एकजुटता के प्रश्नों का पता लगाया जा सकता है।

प्रवास

धर्माध्यक्ष डी जोंग ने प्रवासन के बारे में बात की। अक्सर, यूरोप में, लोग अपने देशों में प्रवेश करने वाले प्रवासियों के बारे में शिकायत करते हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि पश्चिमी यूरोप प्रवासियों को स्वीकार करता है, लेकिन यह चीजों को परिप्रेक्ष्य में रखता है। एकल पश्चिमी देश यूरोपीय देशों से अधिक हजारों  प्रवासियों को स्वीकार करता है। डॉ. रफिनी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रवास न केवल महाद्वीपों के बीच का बल्कि महाद्वीपों के अंदर का मुद्दा है; उन्होंने विशेष रूप से अफ्रीका का उल्लेख किया।

"नगन्य व्यक्तियों" तक पहुंच और आध्यात्मिक परामर्श

धर्माध्यक्ष बर्रोन ने कहा कि उन्हें युवाओं की बातें हृदयस्पर्शी और बहुत ही महत्वपूर्ण लगी कि युवा लोग आध्यात्मिक परामर्श मांग रहे थे। वे एक ऐसी कलीसिया चाहते हैं जो माता और पिता का प्यार दे सके।  बहुत से युवा अस्थिर और टूटे पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं और इसलिए उन्हें अच्छे सलाह, प्रोत्साहन और शिक्षा की आवश्यकता है। धर्माध्यक्ष बर्रोन ने यह भी कहा कि उनके दिल में एक बहुत ही चुनौती पूर्ण सवाल है: कि हम "नगन्य व्यक्तियों" तक कैसे पहुंच सकते हैं - जिनके साथ कलीसिया का कोई संपर्क नहीं है, जिनके पास कोई धार्मिक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि कलीसिया को उन तक पहुंचने का तरीका ढूंढना है। यह एक चुनौती है,  उनके पास जाने का साधन सोशल मीडिया है हम इसका सही उपयोग कर सकते हैं।  

‘ह्युमन विताये’

धर्मसभा में संत पापा पौल छठे के प्रेरितिक पत्र ‘ह्युमन विताये’ पर चर्चा किये जाने के बारे पूछे जाने पर धर्माध्यक्ष बर्रोन ने कहा कि  इसपर कोई सीधी चर्चा नहीं थी लेकिन यह निश्चित रूप से आया था। उन्होंने कहा कि इस समय संत पापा पॉल छठे का संत प्रकरण  एक भविष्यवाणी कदम था क्योंकि यदि आप आज हमारे संदर्भ में दस्तावेज़ पढ़ते हैं, तो यह एक नया अर्थ लेता है और दिखाता है कि उन्होंने जो भविष्यवाणी की वह सही सिद्ध हुई। उन्होंने कहा कि धर्मसभा और छोटे समूहों ने विवाह और पारिवारिक जीवन के बारे में बहुत कुछ कहा था, लेकिन यह ‘ह्युमन विताये’ की भविष्यवाणी की गुणवत्ता का जश्न मनाने का एक पल था।

13 October 2018, 15:57