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ऑस्ट्रेलिया के युवा कार्यकर्ता सेबेस्टियन दुहौ ऑस्ट्रेलिया के युवा कार्यकर्ता सेबेस्टियन दुहौ  

युवा कार्यकर्ता की उम्मीद, कलीसिया संदेश के अनुकूल बनाना सीखे

धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में श्रोता के रुप में उपस्थित ऑस्ट्रेलिया के युवा कार्यकर्ता सेबेस्टियन दुहौ ने धर्मसभा में युवाओं के बीच सुसमाचार प्रचार हेतु उचित भाषा के उपयोग की सलाह दी।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 20 अक्टूबर 2018 (वाटिकन न्यूज): ऑस्ट्रेलिया में ब्रदर्स ऑफ क्रिस्टियन स्कूल के युवा कार्यकर्ता सेबेस्टियन दुहौ का कहना है, "जो कुछ भी युवा लोगों से बात करता है वह एक महान उपकरण है।” सेबेस्टियन दुहौ युवाओं पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में भाग लेने वाले युवा श्रोताओं में से एक है। उन्होंने वाटिकन संवाददाता डेविन वाटकिन्स के साथ हुए साक्षात्कार में अपनी आशा व्यक्त करते हुए कहा कि कलीसिया अपने संदेश को अनुकूलित करने के तरीके को खोजेगी ताकि युवा लोग इसे समझ सकेंगे।

परिभाषित शर्तें

सेबेस्टियन का कहना है कि सिनॉड में साहचर्य, बुलाहट और आत्म-परख के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया जा रहा है। धर्माध्यक्षों के पास इन वास्तविकताओं के अलग-अलग विचार हैं उनकी अलग-अलग समझ है और इन विचारों को खुलकर चर्चा करने में सक्षम होना सकारात्मक दृष्टिकोण है।, सिनॉड दस्तावेज़ के मसौदे को देखते हुए इन मुद्दों को परिभाषित करना आवश्यक है।

दूर चले गये लोगों को फिर से वापस लाना

सेबेस्टियन ने कहा कि कलीसिया को युवा लोगों के लिए एक नया दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। इसका मतलब है कलीसिया की भाषा का अनुकूलन ताकि युवा संदेश को समझ सकें।

"जब से कलीसिया का जन्म हुआ है, तब से कलीसिया हमेशा लोगों के साथ चल रही है। लोगों के साथ संबंध बना रही है, वार्तालाप कर रही है और एक-दूसरे से प्यार कर रही है।"

सेबेस्टियन ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश,कलीसिया येसु मसीह के बारे बताने के बजाय कलीसिया अपने बारे में "युवाओं से वार्ता" करती है। "हमें कलीसिया की जड़ों तक वापस जाने की जरूरत है। कलीसिया सभी लोगों के लिए एक प्रामाणिक, पारदर्शी, प्रेमपूर्ण, सांप्रदायिक स्थान बने।"

20 October 2018, 16:30