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धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा  (ANSA)

ईशप्रजा की सेवा में धर्माध्यक्षीय धर्मसभा

धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की संरचना पर संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक संविधान "एपिसकोपालिस कोम्मुनियो" को 18 सितम्बर को, वाटिकन प्रेस कार्यालय में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान प्रकाशित किया गया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 18 सितम्बर 2018 (रेई)˸ प्रेस सम्मेलन में धर्माध्यक्षों की धर्मसभा के महासचिव कार्डिनल लोरेनत्सो बालदिस्सेरी, धर्माध्यक्षों की धर्मसभा के उपसचिव मोनसिन्योर फाबियो फाबेने एवं धर्माध्यक्षों की धर्मसभा के महा सलाहकार ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दारियो विताली उपस्थित थे।

 धर्माध्यक्षों के धर्मसभा की स्थापना

कार्डिनल लोरेनत्सो बालदिस्सेरी ने वाटिकन न्यूज़ से कहा कि प्रेरितिक संविधान "एपिसकोपालिस कोम्मुनियो" जिसका प्रकाशन आज किया गया है उसकी तिथि है 15 सितम्बर। यह वही तिथि है जब संत पापा पौल षष्ठम ने सन् 1965 में धर्माध्यक्षों के धर्मसभा की स्थापना की थी। उनकी संत घोषणा 14 अक्टूबर को आगामी धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के दौरान की जायेगी।

उन्होंने कहा कि तीन साल पहले 17 अक्टूबर 2015 को सिनॉड की स्थापना की 50वीं वर्षगाँठ पर संत पापा फ्राँसिस ने पौल छाटवें सभागार में, एक विस्तृत भाषण दिया था जिसको कई टिप्पणीकार उनके प्रशासनकाल में ईशशास्त्रीय रूप से सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।

धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की भूमिका

संत पापा ने कहा था कि ऐसी परिस्थिति में, एक धर्माध्यक्षीय कलीसिया में धर्माध्यक्षीय धर्मसभा ही समुदाय की गतिशीलता को सबसे स्पष्ट रूप से प्रकट करती है जो हर कलीसियाई निर्णय को प्रेरित करती है। उन्होंने निर्दिष्ट किया था कि सिनॉड जो काथलिक धर्माध्यक्षों का प्रतिनिधित्व करती, सम्पूर्ण धर्माध्यक्षीय कलीसिया में, धर्माध्यक्षीय समुदाय की अभिव्यक्ति बन जाती है, जो धर्माध्यक्षों को ईश प्रजा की देखभाल हेतु आपस में तथा संत पापा के साथ जोड़ती है।

कार्डिनल ने कहा कि संत पापा का यह भाषण कुछ हद तक नये प्रेरितिक संविधान का सार है। रचनात्मक दृष्टिकोण से सिनॉड का विकास हो रहा है इसमें कोई आश्चर्य नहीं होनी चाहिए क्योंकि संत पापा पौल षष्ठम ने इसकी स्थापना के समय कहा था कि समय बीतने के साथ यह परिपक्व होगा। उसके बाद सन् 1965 में संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने भी कुछ उसी तरह के शब्दों में कहा था, "शायद इस उपकरण को विकसित होने की आवश्यकता है। शायद मेषपालीय सामुदायिक जिम्मेदारी, सिनॉड में ही अच्छी तरह अपने आपको व्यक्त कर सकती है।

इस प्रकार संत पापा फ्राँसिस धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के आदेश के संशोधन में अपने पूर्वाधिकारियों के साथ जुड़ रहे हैं जिसका अंतिम संस्करण संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें द्वारा 2006 में प्रकाशित किया गया था।

"एपिसकोपालिस कोम्मुनियो"

कार्डिनल ने संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितक संविधान "एपिसकोपालिस कोम्मुनियो" की जानकारी देते हुए कहा कि यह दो विस्तृत भागों में बंटा हुआ है, पहला भाग सैद्धांतिक है जिसमें 10 परिच्छेद हैं तथा दूसरा भाग अनुशासनात्मक, जिसमें 27 अनुच्छेद हैं। साराँश में, कहा जा सकता है कि चार परिच्छेदों की मुख्य व्याख्या संविधान के सैद्धांतिक भाग की कुंजी है। 

18 September 2018, 13:36