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महाधर्माध्यक्ष बेरनादीतो आऊज़ा महाधर्माध्यक्ष बेरनादीतो आऊज़ा 

शांति हेतु साक्षात्कार की संस्कृति के विकास का आह्वान

वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष बेरनादीतो आऊज़ा ने कहा कि विवाद निपटारे में वास्तविक वार्ता "साक्षात्कार की संस्कृति" का आह्वान करती है, जो मानव व्यक्ति को समस्त राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों से ऊपर रखे।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

न्यूयॉर्क, शुक्रवार, 31 अगस्त 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र संघीय सुरक्षा परिषद में एक वाद-विवाद में भाग लेते हुए वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष बेरनादीतो आऊज़ा ने कहा कि विवाद निपटारे में वास्तविक वार्ता "साक्षात्कार की संस्कृति" का आह्वान करती है, जो मानव व्यक्ति को समस्त राजनैतिक, सामाजिक एवं थर्थिक गतिविधियों से ऊपर रखे.

संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवोक्षक महाधर्माध्यक्ष बेरनादीतो आऊज़ा ने, बुधवार, 29 अगस्त को संघर्षों में मध्यस्थता एवं समझौतों पर आयोजित वाद-विवाद में भाग ले रहे विभिन्न राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया.

विश्वसनीय मध्यस्थों की आवश्यकता

"साक्षात्कार की संस्कृति" का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि यथार्थ शांति हेतु मध्यस्थता की प्रक्रिया में विश्वसनीय मध्यस्थों की नितान्त आवश्यकता है जिसमें सभी दलों एवं पार्टियों की भागीदारी होना भी अनिवार्य है. इस सन्दर्भ में महाधर्माध्यक्ष आऊज़ा ने आर्जेन्टीना एवं चीले, मोज़ाम्बीक तथा हाल ही में कोलोम्बिया में परमधर्मपीठ एवं वाटिकन की मध्यस्थता द्वारा सम्पन्न शांति प्रक्रियाओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया.

उन्होंने कहा, "शांति की ओर जानेवाला मार्ग जितना अधिक कठिन हो उतना ही अधिक, एक दूसरे को स्वीकार करने, घावों का उपचार करने, सेतुओं का निर्माण करने, रिश्तों को मजबूत करने तथा एक दूसरे का समर्थन करने की दिशा में हमारे प्रयास होने चाहिये ".

मानव प्रतिष्ठा और जनकल्याण

सन्त पापा फ्राँसिस को उद्धृत कर महाधर्माध्यक्ष आऊज़ा ने "साक्षात्कार की संस्कृति" के निर्माण पर बल दिया जो आपसी समझदारी एवं परस्पर सम्मान की ओर अग्रसर करती तथा विवादों का समाधान खोजने में समर्थ बनती है. उन्होंने कहा कि इस संस्कृति को केवल विवादों के निपटारे हेतु ही नहीं अपितु दैनिक जीवन में पोषित किया जाना अनिवार्य है. 

कोलोम्बिया की शांति प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि संघर्ष का निपटारा सम्मान, मानव गरिमा की सुरक्षा तथा जनकल्याण पर आधारित होना चाहिये. उन्होंने कहा कि मानव गरिमा को मान्यता दिये बिना हिंसा उत्पन्न करने वाली परिस्थितियों को रोकना असम्भव है. साथ ही, महाधर्माध्यक्ष आऊज़ा ने कहा, "समझौतों को निष्पक्ष एवं न्याय-सम्मत होना चाहिये.

31 August 2018, 11:27