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कासिया की संत रीता, कुँवारी (रोम) कासिया की संत रीता, कुँवारी (रोम)  

कलीसिया द्वारा "ऑर्डर ऑफ वर्जिंन" पर पुनःविचार

धर्मसंघी एवं धर्मसमाजियों की प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ ने प्राचीन धर्मसंघ "ऑर्डर ऑफ वर्जिंस" के पुनःप्रवर्तन की 50वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में "एक्लेसिये स्पोनसाए इमागो” (कलीसिया एक दूल्हिन का प्रतीक) शीर्षक पर एक दिशा-निर्देश प्रकाशित किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 जुलाई 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ प्राचीन धर्मसंघ "ऑर्डर ऑफ वर्जिंस" का, संत पापा पौल षष्ठम द्वारा पुनःप्रवर्तन का सन् 2020 ई. में 50 साल पूरा होगा। समर्पित कुँवारियों की संख्या इस समय करीब 5,000 है तथा वे विश्व के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। समर्पित जीवन को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल जॉ ब्राज़ दी अविज ने कहा कि नया निर्देश एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो पहला दस्तावेज है जिसके द्वारा इस तरह के समर्पित जीवन के अनुशासन को सम्बोधित किया गया है। यह पुनःजागृत बुलाहट में रूचि दिखाने की प्रतिक्रिया है और यह कलीसिया के जीवन में इसके स्थान, आवश्यक आत्म आवलोकन एवं प्रशिक्षण पर प्रकाश डालता है।

इतिहास

दस्तावेज का विमोचन करते हुए धर्मसंघी एवं धर्मसमाजियों की प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के सचिव महाधर्माध्यक्ष जोश रोड्रिगस कारबाल्लो ने ऑर्डर ऑफ वर्जिंस के इतिहास का साराँश प्रस्तुत किया। धर्मसंघ की उत्पति नारियों के उस सुसमाचारी साक्ष्य से हुई है जिन्होंने प्रभु का अनुसरण करने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।

यह कलीसिया की संरचना में इस तरह स्थापित था कि इसे धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों एवं कुवाँरियों के समान ऑर्डर का दर्जा दिया गया। बाद में, मध्ययुग में इसे मठवास में विलय कर दिया गया। 

संत पापा पौल षष्ठम ने सन् 1970 ई. में ऑर्डर ऑफ वर्जिंस को बहाल कर कलीसिया को जीवन का वह रूप दिया जो उसे ख्रीस्त की दुल्हिन के रूप में उसी के स्वभाव का प्रतिबिंब प्रदान करता है। महाधर्माध्यक्ष कारबाल्लो ने कहा कि एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो के निर्माण में धर्माध्यक्षों, समर्पित कुँवारियोँ और विशेषज्ञों का सहयोग है। इस प्रकार के समर्पित जीवन की समृद्धि एवं विशिष्ठता पर प्रकाश डालने के लिए प्रत्येक ने अपना योगदान दिया है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिन क्या है?

दस्तावेज का पहला भाग ऑर्डर ऑफ वर्जिंन्स की बुलाहट और उसके साक्ष्य की छानबीन करता है। यह स्पष्ट करता है कि बुलाहट सर्वप्रथम मरियम के पदचिन्हों पर आधारित है जो ब्रह्मचार्य, निर्धनता एवं आज्ञापालन के जीवन को अपनाता और साथ-साथ प्रार्थना, पश्चाताप और दया के कार्यों के लिए समर्पित है। एक महत्वपूर्ण कारक यह है कि "कुँवारेपन के लिए कारिज्म प्रत्येक समर्पित धर्मबहन के कारिज्म के अनुरूप है जिसमें रचनात्मक स्वतंत्रता है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिंस को किस तरह से व्यवस्थित किया गया है

एक्लेसिए स्पोनसाये इमागो के दूसरे भाग में समर्पित कुँवारियों, उनके एकल अथवा परिवारों, दलों या धर्माध्यक्षों द्वारा धर्मप्रांतीय स्तर पर व्यवस्थित जीवन की व्याख्या करता है।

धर्माध्यक्ष कारबाल्लो ने कहा कि "एक खास कलीसिया की पुत्री के रूप में प्रत्येक समर्पित धर्मबहन अपने इतिहास को साझा करती है...इसके आध्यात्मिक उन्नति में सहयोग देती है तथा अपनी क्षमताओं द्वारा इसके मिशन में भाग लेती है। इस प्रकार एकाकी जीवन के लिए बुलायी गयी एक समर्पित धर्मबहन सामुदायिक जीवन को अपनाती है।  

किस प्रकार एक महिला समर्पित कुँवारी बनती है?

महाधर्माध्यक्ष कारबाल्लों ने बतलाया कि दस्तावेज का तीसरा भाग ऑर्डर ऑफ वर्जिंन के आत्म-जाँच एवं प्रशिक्षण की व्याख्या करता है। इसमें एक महिला के समर्पित होने के पूर्व एवं बाद में एक धर्माध्यक्ष की भूमिका को रेखांकित करता है।

ऑर्डर ऑफ वर्जिंस की 50वीं वर्षगाँठ

आगामी सन् 2020 ई. में ऑर्डर ऑफ वर्जिंस के बहाल की 50वीं वर्षगाँठ के साथ, महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि इस प्राचीन समर्पित जीवन शैली पर पुनः विचार के द्वारा पवित्रता के एक सच्चे आकर्षण एवं मांग को प्रस्तुत कर पायेगा। 

कार्डिनल डी अविज की उम्मीद है कि वर्षगाँठ समारोह विश्व भर की समर्पित कुँवारियों को रोम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सभा में भाग लेने हेतु एकत्रित करेगा।

05 July 2018, 18:10