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स्लोवाकिया  के ब्रातिस्लावा स्थित यहूदी शोक  स्मारक पर सन्त पापा फ्राँसिस की श्रद्धान्जलि स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा स्थित यहूदी शोक स्मारक पर सन्त पापा फ्राँसिस की श्रद्धान्जलि 

सन्त पापा ने यूरोपीय देशों को स्वार्थ के विरुद्ध किया सचेत

सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस ने सोमवार को, हंगरी तथा स्लोवाकिया में अपनी चार दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन, यूरोपीय देशों में बढ़ती आप्रवास विरोधी भावनाओं, राष्ट्रीयवाद एवं स्वार्थगत मानसिकता की पृष्ठभूमि में व्यक्तिगत अधिकारों पर अधिकाधिक केन्द्रित रहने के ख़तरों के प्रति सचेत किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

स्लोवाकिया, मंगलवार, 14 सितम्बर 2021 (रेई, रायटर्स): सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस ने सोमवार को, हंगरी तथा स्लोवाकिया में अपनी चार दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन, यूरोपीय देशों में बढ़ती आप्रवास विरोधी भावनाओं, राष्ट्रीयवाद एवं स्वार्थगत मानसिकता की पृष्ठभूमि में व्यक्तिगत अधिकारों पर अधिकाधिक केन्द्रित रहने के ख़तरों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य है कि यूरोप के राष्ट्र स्वार्थी एवं रक्षात्मक मानसिकता के प्रलोभन में न पड़ें।

भ्रातृभाव की आवश्यकता

पूर्वी यूरोप के राष्ट्रों द्वारा सहे गये साम्यवादी शासनकाल के दमनचक्र को याद करते हुए सन्त पापा ने कहा, "इन देशों में, कुछ दशक पहले तक, एक एकल विचार प्रणाली वाले साम्यवाद ने स्वतंत्रता का गला घोंट दिया था। आज एक और एकतरफा निकाय स्वतंत्रता के अर्थ को ही खाली कर रहा है तथा प्रगति को केवल लाभ, व्यक्तिगत ज़रूरतों एवं अधिकारों तक सीमित कर रहा है।"  

स्लोवाकिया की राष्ट्रपति सुज़ाना कापूतोवा तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनाधिकारियों एवं कूटनैतिकों को राष्ट्रपति भवन के उद्यान में सम्बोधित करते हुए सन्त पापा ने कहा, "यूरोपीय एकीकरण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिये भ्रातृभाव की नितान्त आवश्यकता है।"

राष्ट्रीयवाद के विरुद्ध चेतावनी

सन् 1993 तक स्लोवाकिया, साम्यवादी शासन काल के दौरान, चेकोस्लोवाकिया का भाग था। स्लोवाकिया तथा लगभग सभी पूर्वी यूरोप के देशों ने साम्यवादी काल के पतन के बाद आर्थिक विकास का आनन्द उठाया है हालांकि, दुर्भाग्यवश, यूरोपीय संघ में अपने एकीकरण के बाद से इन देशों में, विशेष रूप से, मध्य पूर्व से आनेवाले आप्रवासियों के विरुद्ध राष्ट्रीयवाद को भी प्रश्रय मिला है।  

सन्त पापा ने आप्रवास संकट से निपटने के लिये प्रायः यूरोपीय समाधान खोजे जाने की पैरवी की है तथा उन सरकारों की कड़ी आलोचना की है जो इस समस्या को एकतरफा एवं अलगाववादी कार्रवाइयों से सुलझाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा, "अन्यों को देखने का हमारा ख्रीस्तीय तौर-तरीका उन्हें बोझ अथवा समस्या के रूप में देखने से इनकार करता है, अपितु सहायता एवं सुरक्षा करने लायक भाइयों एवं बहनों की तरह देखने के लिये प्रेरित करता है।"

शर्मनाक तथ्य

सोमवार को स्लोवाकिया के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों एवं धर्मसंघियों को अपना सन्देश देने के उपरान्त सन्त पापा फ्राँसिस ने ब्रातिस्लावा शहर में एक यहूदी सभागृह के स्थल पर निर्मित नाज़ी नरसंहार के शिकार बने लगभग एक लाख यहूदियों के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, "यह एक शर्मनाक तथ्य है कि ईश्वर में विश्वास करने का दावा करनेवाले लोगों ने "अमानवीयता के अकथनीय कृत्यों" किया अथवा इन्हें होने दिया।"  

ध्वस्त कर दिये गये यहूदी मन्दिर के स्थल पर निर्मित स्मारक पर शोक समारोह का आयोजन किया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद साम्यवादी शासनकाल के दौरान यहूदी मन्दिर को, ज़ाहिरा तौर पर, एक पुल के निर्माण हेतु ध्वस्त कर दिया गया था। इस विषय में पत्रकारों से ब्रातिस्लावा के सहयोगी धर्माध्यक्ष जोसफ हालको ने कहा कि यह विरोधाभासी है कि साम्यवादियों ने आस-पास की अन्य इमारतों को ज्यों का त्यों रहने दिया जबकि यहूदी मन्दिर को ध्वस्त कर डाला।

ग़ौरतलब है कि अभी विगत सप्ताह ही स्लावाकिया में यहूदियों पर अत्याचारों की 80 वीं बरसी मनाई गई। इस अवसर पर स्लोवाकियाई प्रधान मंत्री एडवर्ड हेगर ने राष्ट्र की ओर से यहूदी समुदाय से क्षमा की याचना कर विनम्रता का आदर्श प्रस्तुत किया।

14 September 2021, 11:11