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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  

देवदूत प्रार्थना : त्रिएक ईश्वर के प्रेम का जीवित चिन्ह है सभी के प्रति प्रेम

संत पापा फ्रांसिस ने पवित्र तृत्वमय ईश्वर के महापर्व के दिन रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान कहा कि यह पर्व हमें प्रेम और प्रकाश के महान रहस्य पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है जहाँ से हम आते एवं जिधर, पृथ्वी पर हमारी यात्रा आगे बढ़ती है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 30 मई 2021 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 30 मई को, संत पापा फ्रांसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

एकता का संबंध

इस पर्व जिसमें हम ईश्वर, एकमात्र ईश्वर के रहस्य का महापर्व मना रहे हैं, और ये ईश्वर हैं ˸ पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा, तीन जन। ईश्वर एक है किन्तु पिता एक ईश्वर है पुत्र एक ईश्वर है और पवित्र आत्मा यह ईश्वर हैं वे तीन ईश्वर नहीं हैं, एक ईश्वर है और उसमें तीन जन। यह एक रहस्य है जिसको येसु ख्रीस्त ने पवित्र तृत्व के रूप में प्रकट किया है। आज हम इसे मनाने के लिए रूकते हैं क्योंकि वे जन ईश्वर के विशेषण नहीं हैं। वे व्यक्ति हैं, वास्तविक, अलग-अलग, भिन्न; किन्तु उस तरह नहीं जैसा कि एक दर्शनशास्त्री ने कहा था, वे ईश्वर के अवतार हैं। संत पापा ने कहा कि नहीं, वे व्यक्ति हैं।

पिता हैं, जिनसे मैं पिता हमारे कह कर प्रार्थना करता हूँ। जिन्होंने मुक्ति एवं न्याय प्रदान की है। पवित्र आत्मा हैं जो हममें एवं कलीसिया में निवास करते हैं। वे हमारे हृदय में बोलते हैं क्योंकि हम उस रहस्य को संत योहन की अभिव्यक्ति में पाते हैं जो पूरी प्रकाशना का सार है, "ईश्वर प्रेम हैं।" पिता प्रेम हैं, पुत्र प्रेम हैं, पवित्र आत्मा प्रेम हैं। और वे चूँकि प्रेम हैं, ईश्वर, यथापि एक होते हुए भी वे अकेले नहीं हैं किन्तु पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा एक-दूसरे से संयुक्त हैं। चूँकि प्रेम, वास्तव में, एक आत्मदान है और अपने असल एवं असीम सच्चाई में स्वयं पिता ने पुत्र को उत्पन्न किया जिसमें उन्होंने अपने आप को हमें दिया। दूसरी ओर पुत्र ने भी पिता के लिए अपने आप को सौंपा और उनके बीच प्रेम है पवित्र आत्मा, उनकी एकता का संबंध। इसे समझना आसान नहीं है किन्तु इस रहस्य को जीया जा सकता है, हम सभी इस रहस्य को जी सकते हैं।  

प्रेम और प्रकाश का रहस्य

इस तृत्वमय ईश्वर का रहस्य स्वयं येसु के द्वारा प्रकट हुआ है। जिन्होंने ईश्वर के चेहरे को एक करुणावान पिता के रूप में दिखाया; अपने आपको एक सच्चे मनुष्य, ईश्वर के पुत्र एवं पिता के शब्द के रूप में प्रकट किया; मुक्तिदाता जिन्होंने हमें अपना जीवन अर्पित किया और पवित्र आत्मा के बारे बतलाया जो पिता और पुत्र से प्रसृत हुए, सच्चाई की आत्मा, सांत्वनादाता अर्थात् हमारे सांत्वना दाता एवं सहायक हैं। उनपर हमने पिछले रविवार को चर्चा की है। और पुनरूत्थान के बाद जब वे शिष्यों को दिखाई दिये उन्होंने उन्हें सभी लोगों के बीच सुसमाचार का प्रचार करने, पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर बपतिस्मा देने भेजा। (मती. 28,19)

आज का समारोह, इस प्रकार, हमें प्रेम एवं प्रकाश के इस महान रहस्य पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है जिससे हम आते और जिस ओर हमारी इस धरती की यात्रा आगे बढ़ती है।

एकता को जीना 

सुसमाचार के संदेश एवं हर प्रकार के ख्रीस्तीय मिशन में, इस एकता को कोई भी अनदेखा नहीं कर सकता जिसको येसु ने कहा है, हमारे बीच पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा की एकता का अनुसरण करते हुए इस एकता को अनदेखा नहीं किया जा सकता : सुसमाचार की सुन्दरता मांग करती है कि उसे जीया जाए - एकता और हमारे बीच इसका साक्ष्य दिया जाए जो कि एक- दूसरे से भिन्न हैं।

संत पापा ने कहा, "और मैं साहस के साथ कह सकता हूँ कि यह एकता ख्रीस्तियों के लिए आवश्यक है : यह कोई मनोभाव नहीं है, कहने का तरीका भी नहीं, यह आवश्यक है क्योंकि एकता प्रेम से उत्पन्न होती है, ईश्वर की करूणा से, येसु ख्रीस्त द्वारा न्याय संगत ठहराये जाने से और हमारे हृदय में पवित्र आत्मा की उपस्थिति से।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि धन्य कुँवारी मरियम अपनी सरलता एवं दीनता में, तृत्वमय ईश्वर की सुन्दरता को प्रतिबिम्बित किया क्योंकि उन्होंने येसु का अपने जीवन में पूर्णतया स्वागत किया। वे हमारे विश्वास को पोषित करें, हमें ईश्वर की पूजा करनेवाले एवं भाई-बहनों के सेवक बनायें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना में संत पापा का संदेश

 

30 May 2021, 16:55

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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